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‘अंधेरे में भी दुश्मन को खोज निकाले, चुटकियों में कर दे ढेर…’, भारत को मिल रहे नए 'हवाई टैंक' अपाचे की होगी बॉर्डर पर तैनाती, बढ़ी PAK की टेंशन

अंधेरे में भी दुश्मन को ढूंढने की क्षमता, निशाना अचूक... PAK सीमा होगी तैनाती. भारत को मिलने जा रहे 'हवाई टैंक' से बढ़ गई पाकिस्तान सेना की टेंशन. आखिर क्या है इसकी खासियत जिसकी खूब चर्चा हो रही है.

Image: Indian Air Force / X
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भारत की सैन्य शक्ति को और धार मिलने जा रही है. अगले तीन दिनों में भारतीय वायु सेना को अमेरिका से तीन उन्नत AH-64E अपाचे लड़ाकू हेलिकॉप्टर मिलने जा रहे हैं. इनकी डिलिवरी अब अंतिम चरण में है. इन अत्याधुनिक हेलीकॉप्टर्स को पाकिस्तान से सटी सीमा पर तैनात किया जाएगा, जिससे सीमावर्ती क्षेत्रों में भारतीय सेना की निगरानी, हमला और जवाबी कार्रवाई की क्षमता में जबरदस्त बढ़ोतरी होगी.

पाक सीमा पर गरजेंगे भारत के 'हवाई टैंक'
अपाचे हेलिकॉप्टरों को 'हवा में उड़ता टैंक' कहा जाता है. ये हर मौसम में, दिन और रात में ऑपरेशन करने में सक्षम हैं और दुश्मन के बख्तरबंद वाहनों, ठिकानों और रडारों को सटीक निशाना बना सकते हैं. इसकी हालिया खेप हिंडन एयरबेस पर उतरेगी, जहां से इनकी आगे की तैनाती के जोधपुर में की जाएगी.

यह डिलिवरी राजस्थान के जोधपुर में सेना द्वारा पहला अपाचे स्क्वाड्रन स्थापित किए जाने के करीब 15 महीने बाद हो रही है. इस स्क्वाड्रन की शुरुआत के बाद अब अतिरिक्त हेलिकॉप्टरों की तैनाती से सेना की मारक क्षमता और रणनीतिक मौजूदगी को और बल मिलेगा.

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ट्रंप के टैरिफ वार के कारण डिलिवरी में हुई देरी
हालांकि इन हेलिकॉप्टरों की डिलिवरी में वैश्विक सप्लाई चेन की रुकावटों और बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियों के चलते देरी हुई थी, लेकिन अब सभी तैयारियाँ पूरी हो चुकी हैं. इससे पहले, भारतीय वायुसेना के पास दो अपाचे स्क्वाड्रन पहले से सक्रिय हैं, एक पठानकोट में और दूसरा जोरहाट में.

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60 करोड़ डॉलर का सौदा, डोनाल्ड ट्रंप की भारत यात्रा के दौरान हुआ था समझौता
2015 में भारत ने अमेरिका से 22 अपाचे हेलिकॉप्टर खरीदने का करार किया था, जिनकी आपूर्ति 2020 तक पूरी हो गई. इसके बाद, तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भारत यात्रा के दौरान एक नया सौदा हुआ, जिसमें भारत ने छह और अपाचे खरीदने के लिए 60 करोड़ डॉलर की डील साइन की थी.

भारत के ’मेक इन इंडिया' को मिल रही ताकत 
इन हेलिकॉप्टरों का निर्माण भारत में टाटा बोइंग एयरोस्पेस लिमिटेड के संयंत्र में हो रहा है, जो टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स और अमेरिकी कंपनी बोइंग का संयुक्त उद्यम है. इससे भारतीय रक्षा उत्पादन क्षमता को भी मजबूती मिल रही है. जानकारी के मुताबिक इसी संयंत्र से 2023 में एक अपाचे हेलिकॉप्टर भारतीय सेना को सौंपा गया था — यह भारत में बना पहला अपाचे था. इससे न केवल आत्मनिर्भर भारत अभियान को बढ़ावा मिला, बल्कि घरेलू रक्षा उत्पादन की क्षमता भी बढ़ी.

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इन तीन अपाचे हेलिकॉप्टरों की तैनाती केवल संख्या में इजाफा नहीं, बल्कि भारत की सीमाओं की सुरक्षा और दुश्मनों को करारा जवाब देने की रणनीतिक तैयारी का प्रतीक है. यह कदम न सिर्फ सैन्य दृष्टि से अहम है, बल्कि भारत की वैश्विक सामरिक स्थिति को भी मजबूत करता है. 

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अपाचे, जिसे रात के अंधेरे में भी ढूंढना मुश्किल
अपाचे हेलिकॉप्टरों की सबसे बड़ी ताकत है इनका नाइट विजन नेविगेशन सिस्टम. इस तकनीक के जरिए ये हेलिकॉप्टर घने अंधेरे में भी दुश्मन के ठिकानों की पहचान कर सकते हैं और उन पर सटीक हमला कर सकते हैं. इन्हें सिर्फ युद्ध के लिए ही नहीं, बल्कि सुरक्षा और शांति मिशनों में भी इस्तेमाल किया जा सकता है.

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