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इज़रायल ने चुन-चुनकर ईरान के टॉप कमांडर्स को किया ढेर, लिस्ट की जारी, IRGC में मोसाद की घुसपैठ से हड़कंप!

IRAN-ISRAEL War: इज़रायल ने ईरान में इतने सटीक हमले किए हैं कि उसके सर्वोच्च नेता सहित करीब 7 से 10 टॉप कमांडर्स मारे गए हैं. इतना ही नहीं, IRGC में भी मोसाद की एंट्री ने हड़कंप मचा दिया है. कहा जा रहा है कि इज़रायल ने खुफिया इनपुट के आधार पर चुन-चुनकर खामेनेई के लोगों को ढेर कर दिया.

Iran Top Commanders Eliminated / IAF/ X
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ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की पुष्टि आधिकारिक तौर पर हो चुकी है. ईरान के सरकारी मीडिया ने रविवार सुबह पुष्टि की कि खामेनेई अमेरिका-इज़रायल के हमलों में मारे गए. ईरान की फार्स न्यूज़ एजेंसी ने सूत्रों के हवाले से बताया कि खामेनेई के चार रिश्तेदार, जिनमें उनकी बेटी, पोता और दामाद शामिल हैं, भी अमेरिकी-इज़रायली हमलों में मारे गए.

इतना ही नहीं, इज़रायल ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई, उनके परिवार सहित उनकी नाक-आंख-कान और ईरान के टॉप मिलिट्री ऑफिशियल्स, कमांडर्स और एडवाइजर्स का भी चुन-चुनकर खात्मा कर दिया. इज़रायली वायुसेना ने दावा किया है कि उसने ‘ऑपरेशन रोरिंग लायन’ के तहत ईरान के करीब 7 बड़े अधिकारियों को मार गिराया है. कहा जा रहा है कि इस हमले के बाद इज़रायल ने ईरान की कमर ही तोड़ दी है, जिसका असर दशकों तक महसूस किया जाएगा.

इज़रायली वायुसेना ने ईरान के मिलिट्री बेस और सरकारी ठिकानों को निशाना बनाया. इन हमलों में ईरान के टॉप कमांडर्स ढेर हो गए. ईरान ने बीते साल वाली गलती दोहराई—कई वरिष्ठ अधिकारी फिर से एक ही जगह जुटे थे, जिस पर इज़रायल ने सटीक हमले किए. ये हमले इतने कामयाब रहे कि इसमें ईरान के 7 बड़े अधिकारी मारे गए.

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इज़रायली एयरफोर्स ने मारे गए मिलिट्री ऑफिशियल्स की लिस्ट जारी की है. आखिर कौन-कौन हैं वे?

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  • अजीज़ नसीरजादेह: ईरान के रक्षा मंत्री
  • मोहम्मद पाकपुर: IRGC के ताकतवर कमांडर-इन-चीफ
  • अली शमखानी: सर्वोच्च नेता खामेनेई के सबसे भरोसेमंद सलाहकार
  • मोहम्मद शिराज़ी: सर्वोच्च नेता के सैन्य ब्यूरो के रणनीतिकार
  • सालेह असदी: खुफिया तंत्र के मास्टरमाइंड
  • होसैन जबल अमेलियन: SPND के अध्यक्ष
  • रेज़ा मोज़ाफ़री-निया: SPND के पूर्व अध्यक्ष और परमाणु कार्यक्रम के प्रमुख रणनीतिकार

अब IRGC की क्या भूमिका होगी?

आपको बता दें कि ईरानी सर्वोच्च नेता और इतनी बड़ी संख्या में मिलिट्री कमांडर्स की मौत के बाद अहमद वाहिदी को ईरान का नया कमांडर-इन-चीफ तैनात किया गया है. अब इसके बाद IRGC, जो ईरान की रेगुलर सेना से भी ताकतवर मानी जाती है और जिसके पास अपनी नेवी, एयरफोर्स, मिलिट्री और खुफिया तंत्र है, उसके अस्तित्व पर संकट खड़ा हो गया है. IRGC को खामेनेई की निजी सेना के तौर पर देखा जाता था, जिसका उद्देश्य ईरान में सुप्रीम लीडर की सुरक्षा और इस्लामी शासन को बनाए रखना था. अब देखने वाली बात होगी कि यह आगे कैसे काम करेगी.

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इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) ईरान की चुनी हुई सरकार के अधिकार क्षेत्र से बाहर काम करता है और सीधे सर्वोच्च नेता के प्रति जवाबदेह है, रेगुलर आर्मी के उलट, जो रक्षा मंत्रालय के अधीन होती है. मामले से परिचित तीन सूत्रों ने रॉयटर्स को बताया कि शनिवार के हमलों में IRGC कमांडर मोहम्मद पाकपुर भी मारे गए हैं, जिसके बाद IRGC में शक्ति का संतुलन बदल जाएगा.

ईरानी क्रांति के बाद हुआ था IRGC का गठन!

1979 की क्रांति के बाद गठित गार्ड्स ने इराक के साथ 1980-88 के युद्ध के दौरान अपना प्रभाव बढ़ाया और तब से ईरान के सशस्त्र बलों की सबसे शक्तिशाली और सबसे सुसज्जित शाखा के रूप में विकसित हुए हैं. दशकों से IRGC ने राजनीति और व्यापार में अपनी मजबूत पकड़ बना ली है और युद्धक्षेत्र से कहीं आगे तक अपना प्रभाव फैलाया है. इसकी विशिष्ट कुद्स फोर्स ने मध्य पूर्व में सहयोगी शिया समूहों का समर्थन करते हुए ईरान की क्षेत्रीय रणनीति का नेतृत्व किया.

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2020 में अमेरिका द्वारा कुद्स फोर्स के कमांडर कासिम सुलेमानी की हत्या और 2024 में इज़रायल द्वारा हिज़्बुल्लाह के खिलाफ चलाए गए अभियान के बाद इस रणनीति को बड़ा झटका लगा. IRGC के नियंत्रण में स्थित बासिज मिलिशिया को अक्सर घरेलू विरोध प्रदर्शनों को दबाने के लिए तैनात किया जाता रहा है.

कई IRGC के टॉप कमांडर्स पर इज़रायली हमलों ने उच्च स्तर पर खुफिया जानकारी की घुसपैठ की आशंकाओं को जन्म दिया है. इसके बावजूद, व्यापक रूप से यह माना जा रहा है कि IRGC इस्लामी गणराज्य के भविष्य को आकार देने में निर्णायक भूमिका निभाएगा.

क्या अब ईरान में चुनाव होगा?

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आपको बता दें कि ईरान में धार्मिक निगरानी के साथ-साथ निर्वाचित संस्थाएं भी मौजूद हैं. नागरिक हर चार साल में राष्ट्रपति और संसद के लिए मतदान करते हैं, लेकिन अंतिम अधिकार सर्वोच्च नेता के पास होता है. ईरानी चार साल के कार्यकाल के लिए राष्ट्रपति और संसद का चुनाव करते हैं. रॉयटर्स के अनुसार, राष्ट्रपति सरकार का गठन करते हैं और दिन-प्रतिदिन की नीतियों का प्रबंधन करते हैं, हालांकि निर्णय देश के गैर-निर्वाचित नेतृत्व द्वारा तय की गई सीमाओं के भीतर ही लिए जाते हैं.

अब ईरान में सरकार का क्या होगा?

1979 की क्रांति के बाद शुरुआती वर्षों में चुनावों में भारी भागीदारी देखी गई. हालांकि समय के साथ व्यवस्था में विश्वास कम होता गया. गार्जियन काउंसिल द्वारा उम्मीदवारों पर लगाए गए प्रतिबंध, 2009 के चुनाव परिणामों पर हुए भारी विवाद और राज्य के गैर-निर्वाचित हिस्सों के वर्चस्व ने चुनावी राजनीति में विश्वास को कमजोर कर दिया.

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राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन, जिन्हें अपेक्षाकृत उदारवादी माना जाता है, 2024 में एक कट्टरपंथी प्रतिद्वंद्वी को हराकर चुने गए. इज़रायल ने कहा कि शनिवार के हमलों में उन्हें भी निशाना बनाया गया था, लेकिन ताज़ा जानकारी के मुताबिक वे फिलहाल सुरक्षित हैं.

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