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इजरायल के PM नेतन्याहू ने दिखाए कड़क तेवर, सेना को दिया हिज़्बुल्लाह को तबाह करने का आदेश

इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने अपनी सेना को पूरी ताक़त के साथ हिज़्बुल्लाह पर हमला करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही PM नेतन्याहू ने 21 दिनों के युद्धविराम के प्रस्ताव को भी ख़ारिज कर दिया है। जिससे यह साफ़ हो गया है कि अब आने वाले दिनों में इजरायल हमास की तरह अब हिजबुल्लाह को भी पूरी तरह ख़त्म करने के लिए ताबड़तोड़ हमला करेगा।

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इजरायल और आतंकवादी समूह ‘हिजबुल्लाह’ के बीच चल रहा विवाद अब और भी बढ़ने वाला है। इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने अपनी सेना को पूरी ताक़त के साथ हिज़्बुल्लाह पर हमला करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही PM नेतन्याहू ने 21 दिनों के युद्धविराम के प्रस्ताव को भी ख़ारिज कर दिया है। जिससे यह साफ़ हो गया है कि अब आने वाले दिनों में इजरायल हमास की तरह अब हिजबुल्लाह को भी पूरी तरह ख़त्म करने के लिए ताबड़तोड़ हमला करेगा। 


दरअसल, हाल ही में लेबनान में की हवाई हमले और कम्युनिकेशन डिवाइस में विस्फोट से बहुत से लोगों की जान गई थी, इस घटना के बाद लेबनान में आतंकवादी संगठन हिजबुल्लाह ने इज़रायल पर ताबड़तोड़ हमला करने का दावा किया। इस दावे के बाद इज़रायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू के आदेश पर हिज़्बुल्लाह के ठिकानों पर सेना ताबड़तोड़ जवाबी कारवाई कर रही है। वही इस जंग को रोकने के लिए अमेरिका-फ़्रांस ने सीजफ़ायर करने की अपील की लेकिन इज़रायल ने इससे इंकार कर दिया। इजरायली प्रधानमंत्री  नेतन्याहू के कार्यालय की ओर से एक बयान जारी करते हुए ये बताया गया कि जा “युद्धविराम संबंधी रिपोर्ट असत्य है.” पीएम ऑफिस के मुताबिक़ उस युद्ध विराम प्रस्ताव पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। जिसकी मध्यस्थता संयुक्त राज्य अमेरिका और फ्रांस ने की थी।

 

हिज़्बुल्लाह के ख़ात्मे तक जारी रहेगी जंग

इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू अब हिज़्बुल्लाह को लेकर काफ़ी सख़्त रवैय्या अपनाते हुए उसे पूरी तरह बर्बाद करने का फ़ैसला कर चुके है। वही उनकी सरकार में विदेश मंत्री इजरायल कैट्ज ने सोशल मीडिया पर अपना बयान जारी करते हुए कहा- कि उनका देश युद्ध विराम पर विचार नहीं करेगा।युद्धविराम नहीं होगा, इज़रायल हिजबुल्लाह के खिलाफ अपनी लड़ाई जीत तक और जब तक निवासी उत्तर में अपने घरों में वापस नहीं लौट सकते, तब तक जारी रखेगा।

सीजफ़ायर को लेकर क्यों नहीं बनी सहमति 

बताते चले की इज़रायल-हिज़्बुल्लाह के बीच जारी जंग को लेकर अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, यूरोपीय संघ, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, ब्रिटेन और कतर की तरफ़ से युद्धविराम को लेकर अपील की गई थी। इन सभी देशों ने एक संयुक्त बयान के अनुसार 8 अक्टूबर, 2023 से लेबनान और इजरायल के बीच हालात बर्दाशत से बाहर हैं। इनकी जंग की वजह से व्यापक क्षेत्रीय तनाव का जोखिम पैदा हो गया है। यह किसी के हित में नहीं, न ही इजरायल के लोगों के और न ही लेबनान के। लेकिन इस प्रस्ताव को इज़रायल ने साफ़तौर पर ख़ारिज ही नहीं बल्कि सेना को हिज़्बुल्लाह पर हमला करने का आदेश बाई दे दिया गया। 


आपको बता दें कि युद्धविराम की अपील  की ओर से की गई थी. संयुक्त बयान के अनुसार 8 अक्टूबर, 2023 से लेबनान और इजरायल के बीच हालात बर्दाशत से बाहर हैं. इनकी वजह से व्यापक क्षेत्रीय तनाव का जोखिम पैदा हो गया है. यह किसी के हित में नहीं, न ही इजरायल के लोगों के और न ही लेबनान के। संयुक्त बयान में कूटनीतिक वार्ता के लिए 21 दिवसीय युद्ध विराम की अपील की गई। यह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव (यूएनएससीआर) 1701 के अनुरूप है, जिसने 2006 के इजरायल-हिजबुल्लाह युद्ध को समाप्त किया था। अब देखना ये होगा कि आने वले समय में क्या युद्धविराम कि प्रस्ताव देने वाले देशों का कोई इज़रायल कोलेकर कोई संयुक्त क़दम होगा या फिर इज़रायल हिज़्बुल्लाह को पूरी तरह से तबाह करके की मानेगा। 
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