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विपक्ष भी उतारने जा रहा उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार? तमिलनाडु के इस दिग्गज सांसद के नाम पर लग सकती है मुहर, जानें कौन हैं?

NDA की तरफ से उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार की घोषणा के बाद अब विपक्षी दल INDIA अलायंस भी अपना उम्मीदवार उतारने की तैयारी में है. 18 अगस्त को देर शाम एक बैठक के जरिए तमिलनाडु के इस दिग्गज सांसद के नाम पर मुहर लग सकती है.

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NDA द्वारा उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार की घोषणा के बाद अब विपक्षी दल INDIA अलायंस भी अपने उम्मीदवार की घोषणा के लिए आज शाम को बैठक बुलाई है. इस बीच विपक्षी दल की तरफ से जिस नाम की सबसे ज्यादा चर्चा चल रही है, उनका नाम तिरुचि एन सिवा है, जो तमिलनाडु से हैं. दरअसल, विपक्षी दल ने यह दांव इसलिए चुना है, क्योंकि एनडीए दल के उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन तमिलनाडु से हैं. यही वजह की विपक्ष ने भी तमिलनाडु वाला कार्ड खेला है. जानकारी के लिए बता दें कि तमिलनाडु में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं. ऐसे में इस मौके को भुनाने में विपक्ष और एनडीए दोनों दल जुटे हुए हैं. 

कौन हैं तिरुची एन सिवा? 

बता दें कि तिरुची एन सिवा तमिलनाडु के और डीएमके पार्टी के अनुभवी नेता हैं. उनका जन्म 6 जून, 1954 को हुआ था. वह साल 1996 में पहली बार सांसद बने थे. उनकी पहचान एक वक्ता और लेखक के तौर पर भी है. 71 वर्षीय तिरुचि डीएमके की तरफ से 4 बार राज्यसभा जा चुके हैं. उनका संसदीय करियर काफी लंबा रहा है और सभी दलों से व्यक्तिगत रिश्ते भी हैं. तिरुचि को ट्रांसजेंडरों के अधिकारों की रक्षा के लिए ऐतिहासिक प्राइवेट मेंबर बिल लाने के लिए भी जाना जाता है. उनके द्वारा यह बिल साल 2014 में पेश किया गया था. यह कई दशकों बाद हुआ था, जब किसी प्राइवेट मेंबर बिल को पास किया गया था. 

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आखिर तिरुचि सिवा ही क्यों? 

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दरअसल, विपक्षी दल तिरुचि एन सिवा के नाम पर इसलिए सहमति जता सकते हैं, क्योंकि वह तमिलनाडु डीएमके के राज्यसभा सांसद हैं. वह प्रदेश के विपक्ष के बड़े नेता हैं. तिरुचि का नाम उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के लिए आगे लाना तमिल अस्मिता से भी जोड़कर देखा जा रहा है. हालांकि, केंद्र सरकार विपक्ष के सभी दलों से मिलकर सीपी राधाकृष्णन के नाम पर फाइनल मुहर लगाने की कोशिश में जुटी हुई है. अगर ऐसा होता है, तो फिर चुनाव की जरूरत नहीं पड़ेगी. कुल मिलाकर देखा जाए, तो पक्ष और विपक्ष दोनों उपराष्ट्रपति के बहाने विधानसभा चुनाव के लिए अभी से माहौल बनाने की तैयारी में है. 

कांग्रेस की बड़ी मजबूरी

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वहीं तिरुचि एन सिवा के नाम पर तमिल नेता का समर्थन करना कांग्रेस की एक बड़ी मजबूरी भी है. इसके पीछे की वजह को अगर समझा जाए, तो तमिल नेता के समर्थन के नाम पर भटकती दिख रही डीएमके को रोकना है. यही वजह है कि विपक्ष एकजुट होकर तिरुचि के नाम पर मुहर लगा सकता है. वहीं सीपी राधाकृष्णन के नाम के ऐलान के बाद डीएमके ने विपक्षी अलायंस से मांग की थी कि उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के लिए तमिलनाडु के ही किसी नेता का नाम घोषित हो.

बिहार से उम्मीदवार उतारने की तैयारी

सीपी राधाकृष्णन का नाम एनडीए की तरफ से फाइनल होने के बाद इस बात की भी चर्चा जोरों पर है कि विपक्ष बिहार से किसी नेता का नाम उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के लिए आगे ला सकता है. दरअसल, ऐसा इसलिए हो सकता है, क्योंकि वहां पर भी विधानसभा चुनाव होने हैं और विपक्ष अपना वोट बैंक बनाने के खातिर यह कदम उठा सकती है. 

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बीजेपी ने विपक्ष के सामने खड़ा किया संकट

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तमिलनाडु में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं. ऐसे में बीजेपी ने उपराष्ट्रपति पद के लिए तमिलनाडु के दिग्गज व अनुभवी नेता को उतार कर बड़ा दांव चला है. बीजेपी ने डीएमके, एआईएडीएमके और कांग्रेस के लिए धर्मसंकट खड़ा कर दिया है. तिरुचि का नाम फाइनल होने पर डीएमके को मजबूरी में समर्थन देना होगा. वरना तमिल नेता के नाम का विरोध करने पर उसे घेरा जा सकेगा. वहीं अब इस फैसले से एआईएडीएमके के लिए आगे कोई भी विकल्प मौजूद नहीं है. 

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