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सीजफायर का उल्लंघन पाक आर्मी और शहबाज सरकार के बीच टकराव का परिणाम!

देश के सीमावर्ती राज्य जम्मू-कश्मीर, राजस्थान और गुजरात के कई क्षेत्रों में पाकिस्तानी सेना ने फायरिंग और ड्रोन के जरिए हमला किया. जिसे भारतीय सेना ने नाकाम कर दिया. इन सब के बीच बड़ा सवाल यह उठता है कि पाकिस्तान की सेना ने सीजफायर का उल्लंघन क्यों किया ?

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भारत और पाकिस्तान में बीते कई दिनों से आपसी टकराव और सैन्य कार्रवाई के बाद दोनों देशों के बीच शनिवार युद्ध विराम को लेकर सहमति बनी. लेकिन कुछ घंटे के भीतर ही पाकिस्तान ने अपना असली रंग दिखा दिया. देश के सीमावर्ती राज्य जम्मू-कश्मीर, राजस्थान और गुजरात के कई क्षेत्रों में पाकिस्तानी सेना ने फायरिंग और ड्रोन के जरिए हमला किया. जिसे भारतीय सेना ने नाकाम कर दिया. इन सब के बीच बड़ा सवाल यह उठता है कि पाकिस्तान की सेना ने सीजफायर का उल्लंघन क्यों किया? 

दरअसल, पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत के रुख और एयर स्ट्राइक की कार्रवाई के बाद भले ही पाकिस्तान की सरकार में शामिल तमाम मंत्री अपने देशवासियों के सामने भारत को कड़ा जवाब देने का खोखला दावा कर रहे हो, लेकिन ये मंत्री और नेता अपनी सेना और जमीनी हकीकत को जानते हुए विश्व के बड़े देशों के सामने भारत के साथ मध्यस्थता कराने का अनुरोध कर रहे थे. ऐसे में जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पाकिस्तान के युद्ध विराम के अनुरोध का भारत सरकार ने मान रखा, तब जाकर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ समेत तमाम नेताओं ने राहत की सांस ली. दोनों देश के बीच शनिवार शाम 5:00 बजे से युद्ध विराम लागू हुआ. लेकिन पाकिस्तान की सेना ने इस समझौते का सम्मान नहीं किया. भारत के कई सीमावर्ती इलाकों में हमला करने का नाकाम प्रयास किया. पाकिस्तान सेना की ये हरकत इस बात का साफ संकेत देती है कि पाकिस्तान की सरकार और सुना के बीच आपसी टकराव है. 

पाक सेना और सरकार में है आपसी टकराव

पाकिस्तान की सेना का कट्टरपंथी गिरोह कई बार अपनी सरकार के खिलाफ राजनीतिक विद्रोह करता रहा है, कई मौकों पर पाकिस्तान की सेना अपने राजनीतिक नेतृत्व के फैसलों को मानने से इनकार करती रही है. शनिवार को सीजफायर के ऐलान के बाद पाकिस्तान को सेना के द्वारा भारत पर की गई गोलीबारी भी इसी का नतीजा माना जा रहा है. पाकिस्तान के आर्मी चीफ असीम मुनीर कट्टरपंथी सोच, सैन्य आक्रामक नीति और भारत को उकसाने वाली रणनीति ही सीजफायर उल्लंघन का प्रमुख कारण माना जा रहा है. इसको लेकर कुछ विशेषज्ञों का मानना है, असीम मुनीर पाकिस्तान सेना के भीतर अपने नेतृत्व को लेकर असंतोष और आलोचनाओं के चलते लोगों का ध्यान भटकने के लिए भारत के खिलाफ भड़काऊ बयानबाजी और तनाव बढ़ाने के कदम उठाते रहे है. 

सेना की छवि मजबूत दिखाने की कोशिश

पहलगाम आतंकी हमले को लेकर भी यह बात सामने आई थी कि पाकिस्तान आर्मी चीफ असीम मुनीर ने भारत को लेकर भड़काऊ बयान दिया था. इसके बाद आतंकी हमले को अंजाम दिया गया. पाकिस्तान सेना के कुछ जूनियर और रिटायर्ड अधिकारियों ने आर्मी चीफ पर आरोप लगाया है कि वो सेना का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए करते रहे है. असीम मुनीर पर पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के समर्थक और अन्य राजनीतिक दलों का भी दबाव है, यही वजह है कि मुनीर कई बार ऐसे कदम उठाए जो भारत के खिलाफ रहे हैं ताकि पाकिस्तान के भीतर उनकी और सेना की छवि मजबूत हो. यही वजह है कि पाकिस्तान के राजनीतिक नेतृत्व के द्वारा भारत के साथ सीजफायर पर सहमति बनाने के बाद सेना द्वारा इसे महज 3 घंटे के भीतर ना मानकर मुनीर ने यह संदेश देने की प्रयास किया है कि पाकिस्तान में सेना का ही सिक्का चलता है. मुनीर ने पहले भी कई बार कश्मीर को पाकिस्तान के गले की नस बताया था. और वह लगातार टू नेशन थ्योरी का समर्थन भी करते रहे हैं. 

युद्ध विराम पर पाक सेना की नहीं आई प्रतिक्रिया 

वही पाकिस्तान की आर्मी और राजनीति पर नजर रखने वाले विशेषज्ञ यह मानते है कि पाकिस्तान के सत्ता वास्तविक तौर पर असीम मुनीर के हाथ है, जबकि प्रधानमंत्री सिर्फ एक कठपुतली है.
बताते चले कि शनिवार को भारत के साथ युद्ध विराम का ऐलान होते ही पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, उप प्रधानमंत्री इशाक डार न्यू सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया दी थी. डार ने सोशल मीडिया के एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा था "पाकिस्तान और भारत ने तत्काल प्रभाव से युद्ध विराम पर सहमति जताई है। पाकिस्तान ने हमेशा अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता से समझौता किए बिना क्षेत्र में शांति और सुरक्षा के लिए प्रयास किया है!" वही पाक सेना ने अपना कोई भी बयान जारी नहीं किया. 
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