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बिहार चुनाव के बीच लालू-राबड़ी-तेजस्वी को बड़ा झटका, कोर्ट ने IRCTC घोटाले में तय किए आरोप

IRCTC SCAM: कोर्ट में विशेष जज विशाल गोगने ने लालू यादव से कहा कि, आपने साजिश रचते हुए, अपने पद और लोक सेवा का दुरुपयोग किया है. कोर्ट ने लालू-राबड़ी और तेजस्वी को झटका देते हुए धारा 420 के तहत आरोप तय किए हैं.

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बिहार चुनाव से पहले लालू परिवार की मुश्किलें बढ़ गई हैं. IRCTC स्कैम और लैंड फॉर जॉब घोटाला केस की कोर्ट में सुनवाई हुई. दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट ने लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं. कोर्ट ने लालू-राबड़ी और तेजस्वी को झटका देते हुए धारा 420 के तहत आरोप तय किए हैं. कोर्ट का ये फैसला ऐसे समय में आया है जब बिहार चुनाव के लिए महागठबंधन पर सीटों की सहमति बननी है. 

कोर्ट ने कहा है, लालू यादव की जानकारी में टेंडर घोटाले की पूरी साजिश रची गई थी. इससे इंकार नहीं किया जा सकता है कि, टेंडर में उनकी दखलअंदाजी थी. राउज एवेन्यू कोर्ट की सीबीआई अदालत के जज विशाल गोगने ने IRCTC केस में फैसला सुनाया. विशेष CBI अदालत ने कहा कि लालू यादव ने टेंडर प्रक्रिया में दखल देते हुए टेंडर प्रक्रिया में बड़ा बदलाव करवाया था. विशेष CBI कोर्ट ने लालू यादव के खिलाफ तय कर दिए हैं. लालू के साथ ही राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव के खिलाफ भी धोखाधड़ी, भ्रष्टाचार समेत अन्य धाराओं के तहत आरोप तय किए गए हैं. 

‘राबड़ी और तेजस्वी को जमीन का अधिकार देने की साजिश’

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इससे पहले कोर्ट ने लैंड फॉर जॉब केस में 25 अगस्त 2025 को सभी पक्षों की दलीलें सुनने और सबूतों की समीक्षा करने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. अब कोर्ट ने आरोप तय कर दिए हैं. कोर्ट ने कहा कि, सब कुछ लालू यादव की जानकारी में हुआ. कोर्ट ने कहा कि जमीन का हक राबड़ी और तेजस्वी को देने की साजिश थी.

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लालू यादव ने सरकारी पद का दुरुपयोग किया. कोर्ट ने लालू यादव से पूछा कि आरोप सही मानते हैं या गलत? इस पर लालू यादव ने कहा कि मैं दोषी नहीं हूं. राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव से भी यही सवाल किए गए. राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव का जवाब भी यही था कि हम दोषी नहीं है. कोर्ट में लालू यादव व्हीलचेयर से पहुंचे थे. उनके साथ लालू यादव और तेजस्वी यादव भी मौजूद थे. 

क्या है IRCTC घोटाला? 

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CBI के मुताबिक, रेल मंत्री रहते हुए लालू यादव ने साल 2005-2006 में कोचर बंधुओं को IRCTC के 2 होटल जो रांची और पुरी में हैं. वो लीज पर दिए थे. इसके बदले पटना में 3 एकड़ जमीन ली थी. इस मामले में 7 जुलाई 2017 में 5 लालू यादव समेत 5 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया था. इस केस के सिलसिले में लालू यादव के 12 ठिकानों पर छापेमारी भी की गई थी. कोर्ट ने 16 अप्रैल 2018 को लालू-राबड़ी और तेजस्वी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की. 

FIR में लालू-राबड़ी पर क्या आरोप लगे? 

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उस समय के CBI के एडिशनल डायरेक्टर राकेश अस्थाना के मुताबिक, लालू यादव ने रेल मंत्री रहते हुए पुरी और रांची के BNR होटल को IRCTC को ट्रांसफर कर दिया था. इनके रख-रखाव का टेंडर देने के लिए विनय कोचर की कंपनी मेसर्स सुजाता को चुना गया, लेकिन इस टेंडर प्रोसेस में बड़ा हेरफेर किया गया था. 
CBI के मुताबिक लालू परिवार को सुजाता होटल को होटल कठेका देने के लिए कथित तौर पर पटना में 3 एकड़ बेशकीमती जमीन रिश्वत के तौर पर दी गई थी. यह जमीन किसी बेनामी कंपनी डिजिटल मार्केटिंग लिमिटेड के जरिए ट्रांसफर की गई थी. बाद में इसे राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव के स्वामित्व वाली कंपनी के नाम कर दिया गया. 

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