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52 जिले, 161 फर्मों पर FIR, 85 अरेस्ट... CM योगी के निर्देश पर FSDA का बड़ा एक्शन, कोडीनयुक्त सिरप की पैरेलल सप्लाई चेन ध्वस्त

कोडीन कफ सिरप के अवैध डायवर्जन के मामले में सीएम योगी के निर्देश पर FSDA ने बड़ा एक्शन लिया है. कोडीनयुक्त कफ सिरप की पैरेलल सप्लाई चेन को ध्वस्त किया गया है. एक ओर जहां 52 जिलों में सघन जांच और 161 फर्मों पर FIR की गई है, वहीं 36 जनपदों में अवैध डायवर्जन का खुलासा हुआ है. अब इस पर NDPS और BNS के तहत कार्रवाई होगी.

CM Yogi Action on Codeine Case
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योगी सरकार ने पिछले पौने नौ वर्षों में अवैध नशे के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की है. योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत ताबड़तोड़ एक्शन ने अवैध नशे के सौदागरों की कमर तोड़ दी है. इसी क्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) को कोडीनयुक्त कफ सिरप एवं NDPS श्रेणी की औषधियों के अवैध भंडारण, क्रय-विक्रय, वितरण तथा अवैध डायवर्जन पर प्रभावी नियंत्रण के लिए अभियान चलाने के निर्देश दिए. इस पर तीन माह पहले अभियान शुरू किया गया.

क्रैकडाउन से पहले शुरू हुई अंदरूनी गहन जांच!

विभाग ने कोडीनयुक्त कफ सिरप के अवैध डायवर्जन को लेकर देश का सबसे बड़ा क्रैकडाउन शुरू करने से पहले अंदरूनी गहन जांच शुरू की. इस दौरान झारखंड, हरियाणा, हिमाचल, उत्तराखंड जैसे राज्यों में विवेचना की गई और यूपी के सुपर स्टॉकिस्ट और होलसेलर के साथ उनके कारोबारी रिश्तों के सबूत जुटाए. इसके बाद प्रदेश में क्रैकडाउन शुरू हुआ, जिसने सिरप के अवैध डायवर्जन की परतें उधेड़ दीं. FSDA की रिपोर्ट के आधार पर पुलिस और STF ने नशे के सौदागरों को दबोचने के लिए एक्शन शुरू किया.

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नशे के कारोबार में लिप्त लोगों पर NDPS और BNS के तहत कार्रवाई के निर्देश!

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इतना ही नहीं, CM योगी के निर्देश पर सिरप का नशे के रूप में इस्तेमाल करने वालों के खिलाफ NDPS और BNS के तहत मुकदमे दर्ज किए गए. इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने मामले में NDPS एक्ट के तहत मुकदमा चलाने को सही ठहराते हुए 22 मामलों में आरोपियों की रिट याचिकाओं को खारिज कर दिया. कोर्ट ने 22 मामलों में आरोपियों द्वारा अरेस्ट स्टे की रिट याचिकाओं को भी खारिज कर दिया.

52 जनपदों में सघन जांच अभियान, 161 फर्मों पर FIR

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FSDA ने पिछले तीन माह में कोडीनयुक्त कफ सिरप और NDPS श्रेणी की औषधियों के अवैध भंडारण, क्रय-विक्रय, वितरण तथा अवैध डायवर्जन पर कुल 52 जनपदों में 332 से अधिक थोक औषधि विक्रय प्रतिष्ठानों की जांच की. जांच के दौरान प्राप्त अभिलेखीय एवं भौतिक साक्ष्यों के आधार पर 36 जनपदों की कुल 161 फर्मों/संचालकों के विरुद्ध BNS तथा NDPS एक्ट की सुसंगत धाराओं के तहत रिपोर्ट दर्ज कराई गई.

वहीं, जिलाधिकारियों को गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई के लिए पत्र लिखा गया, ताकि अवैध नशे से अर्जित संपत्ति को जब्त किया जा सके. CM के निर्देश पर FSDA ने कोडीनयुक्त कफ सिरप की नशे के रूप में तस्करी करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की, जो पूरे देश में सबसे बड़ा क्रैकडाउन है.

पकड़ में आया पूरा नारकोटिक्स नेक्सस

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FSDA आयुक्त ने मामले की तह तक पहुंचने के लिए जनपद स्तर पर कई टीमें बनाईं. टीमों की निगरानी के लिए मुख्यालय पर एक टीम बनाई गई. विभिन्न टीमें जांच के लिए विभिन्न प्रदेशों में गईं और गोपनीय तरीके से साक्ष्य जुटाए. टीम ने केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो, ग्वालियर, मध्य प्रदेश से कोडीन फॉस्फेट का कोटा एवं उठान के विवरण को एकत्रित किया.

कई राज्यों में जांच अभियान

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वहीं टीम ने कोडीनयुक्त कफ सिरप निर्माता फर्मों की जांच के लिए हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और उत्तराखंड का दौरा किया. यहां से सिरप के निर्माण और वितरण से संबंधित अभिलेख जुटाए गए. इसके बाद सिरप के क्रय-विक्रय अभिलेख के लिए रांची, दिल्ली और लखनऊ का रुख किया गया. इस दौरान पाया गया कि अधिकांश होलसेलर्स के पास स्टॉक पहुंचने का सत्यापन नहीं है और रिटेल मेडिकल स्टोर के नाम पर कोई भी विक्रय बिल नहीं मिला, जबकि दिल्ली और रांची के सुपर स्टॉकिस्ट और इनसे जुड़े कुछ चिन्हित होलसेलर्स के नाम पर बिलिंग करके सिरप के साथ NDPS श्रेणी की दवाओं की एक समानांतर वितरण श्रृंखला बनाई गई. इसका खुलासा करने के लिए विभाग द्वारा कड़ी मेहनत की गई. इसके बाद पूरी चेन को कनेक्ट किया गया, जिसके बाद सिरप के अवैध डायवर्जन का मामला सामने आया.

कैसे पकड़ में आया फर्जीवाड़ा!

कई मामलों में फर्में विक्रय बिल प्रस्तुत करने में असफल रहीं, जबकि कुछ फर्मों द्वारा केवल कागजी अभिलेखों में सिरप का क्रय-विक्रय दर्शाया गया. प्रस्तुत विक्रय विवरणों में भी किसी भी फुटकर औषधि प्रतिष्ठान को कोडीनयुक्त कफ सिरप की वास्तविक आपूर्ति का सत्यापन नहीं हो सका, जिससे कथित आपूर्ति को अप्रमाणित पाया गया.

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वर्ष 2024-25 में प्रदेश में कोडीनयुक्त कफ सिरप की आपूर्ति वास्तविक चिकित्सीय आवश्यकता से कई गुना अधिक पाई गई. जांच में एबॉट हेल्थ केयर द्वारा निर्मित फेन्सिडिल की 2.23 करोड़ से अधिक बोतलें, लैबोरेट फार्मास्युटिकल्स द्वारा निर्मित एस्कॉफ की 73 लाख से अधिक बोतलें तथा अन्य कंपनियों द्वारा निर्मित लगभग 25 लाख बोतलों की आपूर्ति दर्ज मिली, जिनका चिकित्सीय उपयोग प्रमाणित नहीं हो सका.

पुलिस और STF ने 85 अभियुक्तों को किया गिरफ्तार!

FSDA ने रिपोर्ट CM और पुलिस को सौंपी. इसके आधार पर पुलिस और STF ने 79 अभियोग दर्ज किए. इसमें अब तक 85 अभियुक्तों की गिरफ्तारी की जा चुकी है. वर्तमान में एक्शन जारी है. वहीं मामले में गठित SIT भी जांच कर रही है. जानकारों की मानें तो अगले माह SIT जांच रिपोर्ट CM को सौंप सकती है.

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लाइसेंसिंग प्रणाली सख्त करने का प्रस्ताव

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इतना ही नहीं, मुख्यमंत्री के निर्देश पर FSDA मुख्यालय द्वारा थोक औषधि विक्रय लाइसेंसिंग प्रणाली को और अधिक सख्त व पारदर्शी बनाने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है. इसमें थोक प्रतिष्ठान की जियो-टैगिंग, भंडारण क्षमता की पुष्टि और उनकी फोटोग्राफी कराने का प्रस्ताव शामिल है. वहीं प्रतिष्ठान के टेक्निकल पर्सन के अनुभव प्रमाण पत्र का ड्रग इंस्पेक्टर द्वारा सत्यापन करने का भी प्रस्ताव भेजा गया है. कोडीनयुक्त कफ सिरप के निर्माण, बल्क सप्लाई, वितरण एवं निगरानी के लिए भारत सरकार से आवश्यक अधिसूचना एवं दिशा-निर्देश जारी करने के लिए भी प्रस्ताव भेजा जा रहा है.

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