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इंफोसिस फाउंडर ने सर्वे में हिस्सा लेने से किया मना... तो भड़के कर्नाटक सीएम ने बोला हमला, कहा - क्या वह सब जानते हैं?

इंफोसिस फाउंडर एनआर नारायण मूर्ति और उनकी पत्नी लेखिका सुधा मूर्ति पर हमला बोलते हुए सिद्धारमैया ने कहा कि 'राज्य में चल रहा सामाजिक और शैक्षणिक सर्वे सिर्फ पिछड़े वर्गों के लिए नहीं, बल्कि पूरी आबादी के लिए है. सरकार ने 20 बार स्पष्ट किया है कि यह सभी वर्गों को कवर करता है, अगर उन्होंने इसे नहीं समझा, तो मैं क्या करूं. क्या सिर्फ इसलिए कि वे इंफोसिस हैं, सब जानते हैं?'

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कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने इंफोसिस के फाउंडर एनआर नारायण मूर्ति और लेखिका सुधा मूर्ति पर बड़ा हमला बोला है. उन्होंने राज्य में चल रहे सामाजिक और शैक्षणिक सर्वे पर अपना बयान देते हुए मूर्ति दंपति पर निशाना साधा है. दरअसल, हाल ही में जब एक सर्वे टीम सरकार द्वारा कराए जा रहे सर्वे के लिए नारायण मूर्ति के घर पहुंची, तो उन्होंने इसके लिए मना कर दिया. नारायण मूर्ति ने बताया कि वह पिछड़े वर्ग से नहीं है. इसलिए सरकारी सर्वे से उनका कोई लेना-देना नहीं है. 

सीएम सिद्धारमैया ने नारायण मूर्ति पर बोला हमला

इंफोसिस फाउंडर एनआर नारायण मूर्ति और उनकी पत्नी लेखिका सुधा मूर्ति पर हमला बोलते हुए सिद्धारमैया ने कहा कि 'राज्य में चल रहा सामाजिक और शैक्षणिक सर्वे सिर्फ पिछड़े वर्गों के लिए नहीं, बल्कि पूरी आबादी के लिए है. सरकार ने 20 बार स्पष्ट किया है कि यह सभी वर्गों को कवर करता है, अगर उन्होंने इसे नहीं समझा, तो मैं क्या करूं. क्या सिर्फ इसलिए कि वे इंफोसिस हैं, सब जानते हैं?' उन्होंने आगे कहा कि इस सर्वे का मकसद है कि जनसंख्या के सामाजिक-आर्थिक हालात का सही डेटा सामने आए. इस दौरान उन्होंने कहा कि अगर सुधा और नारायण मूर्ति अब भी सोचते हैं कि यह पिछड़े वर्गों का सर्वे है, तो वे गलत है. केंद्र सरकार भी ऐसा सर्वे कर रही है. तब वे क्या करेंगे, शायद उन्हें गलत जानकारी दी गई है. 

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इंफोसिस फाउंडर ने सर्वे के लिए किया मना 

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अधिकारियों ने बताया कि जब सर्वे की टीम मूर्ति दंपति के घर पहुंची थी, तो उन्होंने सर्वे के लिए मना कर दिया. उनका कहना था कि वह किसी पिछड़े वर्ग से नहीं हैं. इसलिए इस सरकारी सर्वे का उनसे कोई लेना-देना नहीं.  

मूर्ति दंपति ने सर्वे फार्म पर लिखा अपना बयान 

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नारायण मूर्ति ने सर्वे फार्म पर अपने हाथ से एक बयान भी लिखा है, जिसमें उनके द्वारा कहा गया है कि यह सर्वे हमारे मामले में प्रासंगिक नहीं है और ना ही उपयोगी है. इसके बाद दोनों ने सर्वे से औपचारिक रूप से बाहर रहने का सेल्फ डिक्लेरेशन लेटर भी जमा किया. 

उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने भी दी प्रतिक्रिया 

नारायण मूर्ति और उनकी पत्नी द्वारा सर्वे के लिए मना किए जाने पर कर्नाटक सरकार के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने भी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि हम किसी को भी मजबूर नहीं कर रहे हैं. यह सर्वे पूरी तरह से सुरक्षित है. कोई भी इसमें हिस्सा ले सकता है और फिर अपनी मर्जी से मना भी कर सकता है. 

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कर्नाटक हाई कोर्ट का अंतरिम आदेश 

इस मामले पर कर्नाटक हाई कोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में सरकार को निर्देश देते हुए कहा कि 'राज्य सरकार सार्वजनिक रूप से यह स्पष्ट करें कि यह सामाजिक-आर्थिक और शैक्षणिक सर्वे अनिवार्य नहीं है.' कोर्ट का यह भी कहना है कि 'सर्वे टीम किसी नागरिक से जबरन जानकारी नहीं मांग सकती और जो भी डाटा एकत्र होगा. वह सिर्फ पिछड़ा वर्ग आयोग की निगरानी में रहेगा.' कोर्ट ने यह भी कहा कि सर्वे का उद्देश्य पिछले वर्गों को लाभ पहुंचाना है. इससे नागरिकों के अधिकारों का उल्लंघन नहीं होता.

इंफोसिस के पूर्व सीईओ ने सर्वे पर उठाए सवाल 

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राज्य सरकार द्वारा प्रदेश भर में चलाए जा रहे सर्वे पर इंफोसिस के पूर्व सीईओ मोहंदास पाई ने सवाल उठाते हुए कहा कि 'कर्नाटक के मंत्री जाति, तुष्टिकरण और वोट बैंक पर ध्यान दे रहे हैं. उनका ध्यान विकास, टेक्नोलॉजी और नौकरियों पर नहीं है. इस तरह के सर्वे राज्य को पीछे ले जा रहे हैं. सरकार मुफ्त योजनाओं के लिए कर्ज ले रही है, जबकि असली मुद्दे छूट रहे हैं.'

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