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UP में घुसपैठियों में मची भगदड़, धरपकड़ के लिए पुलिस की छापेमारी तेज, झुग्गी छोड़ भागे बांग्लादेशी-रोहिंग्या!

योगी सरकार के आदेश पर लखनऊ के डालीबाग में अवैध रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठियों की खोज के लिए पुलिस ने बड़ा अभियान चलाया. जांच में झुग्गियों से उर्दू किताबें, पंखे और VIP जैसी सुविधाएं मिलीं. पुलिस ने आधार कार्ड और NRC दस्तावेज चेक किए, जिनमें ज्यादातर पहचान पत्र असम के बरपेटा जिले के निकले.

UP POLICE
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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त निर्देशों के बाद राज्यभर में अवैध रूप से रह रहे रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठियों की पहचान के लिए पुलिस ने तेज अभियान शुरू कर दिया है. इसी कार्रवाई के तहत लखनऊ के डालीबाग इलाके में पुलिस टीमों ने बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान चलाया. यहां मौजूद झुग्गियों में रहने वाले लोग खुद को अनपढ़ मजदूर बताते हैं, लेकिन जांच के दौरान कई झोपड़ियों से उर्दू में लिखी किताबें, पंखे, बल्ब और VIP कैंप जैसी सुविधाएं बरामद हुईं. 

पुलिस ने क्या कहा?

इस अभियान को लेकर पुलिस का कहना है कि मिले सामान की जांच की जा रही है और इलाके में बाहरी लोगों की मौजूदगी पर खास नजर रखी जा रही है. छापेमारी के दौरान पुलिस टीम ने झुग्गियों में रहने वाले लोगों के आधार कार्ड और NRC से जुड़े कागजों की गहन जांच की. जांच में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि ज्यादातर संदिग्धों के आधार कार्ड असम के बरपेटा जिले के ही पाए गए. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इन दस्तावेजों की प्रामाणिकता की पुष्टि के लिए असम पुलिस से आधिकारिक तौर पर संपर्क किया जा रहा है, ताकि यह पता चल सके कि पहचान पत्र असली हैं या फिर किसी फर्जी नेटवर्क के जरिए बनाए गए हैं. तलाशी के दौरान पुलिस को कई झुग्गियों में ऐसी सुविधाएं भी मिलीं, जो एक सामान्य अस्थायी बस्ती में होना असामान्य है. कई जगहों पर बिजली की व्यवस्थित लाइन, पंखे, बल्ब, मोबाइल चार्जिंग पॉइंट और साफ-सुथरी रहने की जगह देखकर टीम भी हैरान रह गई. कुछ झोपड़ियां तो इतनी व्यवस्थित दिखीं कि वे किसी अस्थायी VIP कैंप जैसी प्रतीत हो रही थीं. अधिकारियों का कहना है कि मिले सामान और बुनियादी सुविधाओं का विवरण तैयार कर आगे की जांच में शामिल किया जा रहा है.

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झुग्गी से मिली उर्दू किताबें 

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तलाशी के दौरान जब पुलिस एक झुग्गी में पहुंची, तो अंदर से उर्दू में लिखी कई किताबें बरामद हुईं. जबकि वहां रहने वाले ज्यादातर लोग खुद को अनपढ़ बताते हैं और दावा करते हैं कि वे नगर निगम में दिहाड़ी मजदूरी करते हैं. ऐसे में संदेह और गहरा हो गया है कि कहीं पहचान से जुड़ी पूरी कहानी ही मनगढ़ंत तो नहीं. पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश में है कि इन लोगों को यहां बसाने वाला कौन है और इनके दस्तावेज किस चैनल से तैयार करवाए गए. अधिकारियों का कहना है कि जांच इस दिशा में भी आगे बढ़ाई जा रही है कि ये लोग शहर में किन गतिविधियों में शामिल हैं और इनके पीछे कोई संगठित नेटवर्क तो सक्रिय नहीं. फिलहाल इलाके में पुलिस की लगातार छापेमारी जारी है और हर संदिग्ध तथ्य की बारीकी से जांच की जा रही है.

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बता दें कि फिलहाल पूरे मामले की जांच तेज है और पुलिस हर पहलू को गंभीरता से परख रही है. अधिकारियों का कहना है कि दस्तावेजों की पुष्टि, संदिग्ध गतिविधियों की जांच और नेटवर्क की पड़ताल के बाद ही पूरी तस्वीर साफ हो पाएगी. हालांकि लगातार चल रही छापेमारी से इतना तो स्पष्ट है कि मामला सतही नहीं, बल्कि गहराई तक जांच की मांग करता है. पुलिस की कार्रवाई जारी है और आने वाले दिनों में कई अहम खुलासे होने की संभावना है.

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