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जिस Hindenburg के दम पर Congress ने Modi को कोसा, उद्योगपति Harsh Goenka ने उसका मजाक उड़ाया

जिस अमेरिकी कंपनी Hindenburg की रिपोर्ट के दम पर Congress ने Modi सरकार को कोसना शुरू किया, देश के मशहूर उद्योगपति Harsh Goenka ने उसी Hindenburg का मजाक उड़ाया

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 Hindenburg : Hindenburg ।  नाम तो सुना ही होगा। एक अमेरिकी कंपनी। जिसका जन्म साल 2017 में हुआ। और कारपोरेट वर्ल्ड से जुड़े बड़े से बड़े खुलासे के लिए मशहूर है।  यही वजह है कि भारत को लेकर जब भी हिंडनबर्ग कोई खुलासा करता है तो देश की सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी कांग्रेस के कान खड़े हो जाते हैं। और सड़क से लेकर संसद तक हिंडनबर्ग की रिपोर्ट के दम पर मोदी सरकार के खिलाफ हल्ला बोल देती है। इस बार भी कुछ ऐसा ही हुआ जब भारत के दिग्गज उद्योगपति गौतम अडानी और Securities and Exchange Board of India यानि सेबी के खिलाफ कथित तौर पर बड़ा खुलासा किया। जिसके बाद कांग्रेस ने तो जैसे आसमान सिर पर उठा लिया।


महज सात साल पुरानी अमेरिकी कंपनी हिंडनबर्ग की एक रिपोर्ट पर कांग्रेस जहां उछल कूद मचाने लगी। तो वहीं देश के दिग्गज उद्योगपति हिंडनबर्ग जैसी कंपनी का मजाक उड़ाने में लगे रहे।  क्योंकि ये बात वो भी जानते हैं कि इससे पहले भी हिंडनबर्ग अडानी ग्रुप पर गंभीर आरोप लगा चुका है। लेकिन उसके आरोपों में कोई दम नजर नहीं आया। 24 आरोपों में से 23 में तो अडानी ग्रुप को क्लीन चिट मिल गई।  यही वजह है कि इस बार जब हिंडनबर्ग ने अडानी ग्रुप और सेबी के खिलाफ रिपोर्ट जारी की तो भारत के उद्योगपतियों ने इस रिपोर्ट को कोई भाव नहीं दिया। 

देश के दिग्गज उद्योगपति और आरपीजी ग्रुप के चेयरमैन हर्ष गोयनका ने तो हिंडनबर्ग का मजाक उड़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। 12 अगस्त को ही हर्ष गोयनका ने हिंडनबर्ग और अडानी से जुड़ा एक मीम शेयर किया।  जिसमें लिखा था। ब्रेकिंग न्यूज। अडानी हिंडनबर्ग को खरीदने वाले हैं। इसी मीम को शेयर करते हुए हर्ष गोयनका ने लिखा। "स्वामी हर्षानंद ने कहा है ये बेस्ट है, ना रहेगा बांस ना बजेगी बांसुरी "

वैसे तो उद्योगपति हर्ष गोयनका ने हिंडनबर्ग को लेकर बस एक मीम शेयर किया है। लेकिन ये मीम बता रहा है कि जिस हिंडनबर्ग की एक रिपोर्ट पर पूरी कांग्रेस इतना गंभीर हो गई कि सीधे मोदी सरकार पर हल्ला बोल दिया।  तोप समझी जाने वाली उसी हिंडनबर्ग कंपनी को हर्ष गोयनका जैसे उद्योगपति भी हल्के में लेने लगे हैं। तो वहीं पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने तो हिंडनबर्ग रिपोर्ट को भारत के खिलाफ एक बड़ी साजिश बता दिया।

आपको बता दें जिस हिंडनबर्ग की रिपोर्ट पर बवाल मचा हुआ है। उसकी स्थापना साल 2017 में नाथन एंडरसन ने की थी। इसे कारपोरेट वर्ल्ड से जुड़े खुलासे के तौक पर जाना जाता है। इसका नाम हिंडनबर्ग एक आपदा पर रखा गया है।  साल 1937 में एक जर्मन यात्री हवाई पोत में आग लग गई थी।  जिसमें 35 लोग मारे गये थे।  अमेरिकी कंपनी हिंडनबर्ग के दावे के मुताबिक फर्म यह पता लगती है कि शेयर मार्केट में कहीं गलत तरीके से पैसों की हेरा-फेरी तो नहीं हो रही है? क्या कंपनी अपने फायदे के लिए शेयर मार्केट में गलत तरह से दूसरी कंपनियों के शेयर को बेट लगाकर नुकसान तो नहीं पहुंचा रही। 

 इसी तरह के खुलासे करने वाली हिंडनबर्ग ने जब अडानी ग्रुप को लेकर रिपोर्ट जारी की तो कांग्रेस जहां मोदी सरकार पर निशाना साधने लगी तो वहीं दूसरी तरफ हर्ष गोयनका जैसे उद्योगपति हिंडनबर्ग का मजाक उड़ाते हुए कहने लगे अडानी हिंडनबर्ग को ही खरीदने वाले हैं। 

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