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'अब कभी बहाल नहीं होगी सिंधु जल संधि...', अमित शाह ने पाकिस्तान को दे दिया क्लियर कट मैसेज

गृह मंत्री अमित शाह ने पाकिस्तान को साफ संदेश देते हुए बता दिया है कि सिंधु जल संधि अब कभी बहाल नहीं होगी. एक इंटरव्यू में शाह ने कहा है कि 'यह संधि अब कभी बहाल नहीं होगी. अंतरराष्ट्रीय संधियों को एकतरफा रद्द नहीं किया जा सकता था, लेकिन हमारे पास इसे स्थगित करने का अधिकार था, जो हमने किया है. इस संधि में दोनों देशों की शांति और प्रगति की प्रस्तावना थी. लेकिन बार-बार इसका उल्लंघन किया गया. ऐसे में अब कुछ भी नहीं बचा है.'

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पहलगाम आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि समझौता रद्द होने के बाद बहाली के सपने देख रहा पाकिस्तान को भारत ने करारा झटका दिया है. गृहमंत्री अमित शाह ने साफ शब्दों में कहा है कि अब कभी भी सिंधु जल संधि समझौता बहाल नहीं होगी. मोदी सरकार ने इस नदी के जल को विशेष रूप से राजस्थान की तरफ मोड़ने का प्लान तैयार किया है. इसको लेकर एक नहर के निर्माण की भी तैयारी चल रही है. जानकारी के लिए बता दें कि भारत ने साल 1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता के चलते पाकिस्तान से यह संधि की थी. 

सिंधु जल संधि अब कभी बहाल नहीं होगी - अमित शाह 

गृह मंत्री अमित शाह ने पाकिस्तान को साफ संदेश देते हुए बता दिया है कि सिंधु जल संधि अब कभी बहाल नहीं होगी. एक इंटरव्यू में शाह ने कहा है कि 'यह संधि अब कभी बहाल नहीं होगी. अंतरराष्ट्रीय संधियों को एकतरफा रद्द नहीं किया जा सकता था, लेकिन हमारे पास इसे स्थगित करने का अधिकार था, जो हमने किया है. इस संधि में  दोनों देशों की शांति और प्रगति के लिए प्रस्तावना थी. लेकिन बार-बार इसका उल्लंघन किया गया. ऐसे में अब कुछ भी नहीं बचा है. जो पानी अब तक पाकिस्तान को मिल रहा था, वह अब भारत के भीतर ही मोड़ेंगे. अब नहर बनाकर पाकिस्तान को दिया जाने वाला पानी राजस्थान को देंगे. पाकिस्तान को अब वह पानी नहीं मिलेगा, जो उसे अनुचित तरीके से मिल रहा था.' गृहमंत्री अमित शाह के बयानों से यह साफ हो गया है कि भारत अब सिंधु नदी प्रणाली पर अपने अधिकारों का ज्यादा से ज्यादा उपयोग करेगा. 

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सिंधु नदी का पानी रोकने पर पाकिस्तान ने निकाली थी भड़ास

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सिंधु जल संधि समझौता रद्द होने के बाद पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान की भड़ास सामने निकल कर आई थी. उसने कहा था कि इस संधि से बाहर निकालने का किसी को भी एकतरफा अधिकार नहीं है. अगर ऐसा होता है, तो उसकी नजर में यह 'युद्ध की कार्रवाई' माना जाएगा. बता दे की झेलम नदी का पानी पाकिस्तान की कृषि के लिए काफी ज्यादा उपयोगी है. इस नदी का पानी रोकने से पाकिस्तान की 80 प्रतिशत खेती पूरी तरीके से प्रभावित हो जाएगी. दूसरी तरफ भारत झेलम जैसी प्रमुख नदियों का जल ज्यादा से ज्यादा अपनी ओर खींचने की योजना बना रहा है. 

पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय विकल्पों की तलाश कर रहा 

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बता दें कि गृहमंत्री अमित शाह के बयान पर पाकिस्तान विदेश मंत्रालय की तरफ से कोई बयान सामने नहीं आया है. पाकिस्तान इस मसले पर अंतरराष्ट्रीय विकल्पों की तलाश कर रहा है. 

कब हुआ था सिंधु जल संधि समझौता?

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भारत-पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि समझौता 1960 के बीच हुई थी. इसमें मुख्य गारंटर के तौर पर विश्व बैंक शामिल हुआ था. समझौते के मुताबिक, भारत को तीन पूर्वी नदियों (सतलुज, ब्यास, रावी) का उपयोग और पाकिस्तान को तीन पश्चिमी नदियों (झेलम, चिनाब, सिंधु) का उपयोग करने की प्राथमिकता दी गई थी. दोनों देशों के लिए यह सबसे स्थिर समझौता माना जाता रहा है, लेकिन हाल की घटनाओं ने इसे संकट में डाल दिया. फिलहाल यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या इस पर दक्षिण एशिया में भू- राजनीतिक टकराव की भूमिका बन सकती है.

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