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भारत का अभेद्य किला 'चिकन नेक' और भी ज्यादा होगा मजबूत, बांग्लादेश समेत अन्य दुश्मनों की उड़ी नींद, सरकार ने बनाया खुफिया प्लान

बता दें कि सोमवार को आम बजट में रेल मंत्रालय संबंधी प्रावधानों की जानकारी देते हुए केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि 'पूर्वोत्तर को देश के शेष भाग से जोड़ने वाले 40 किलोमीटर लंबे रणनीतिक गलियारे के लिए विशेष योजना बनाई जा रही है. इस भूमिगत रेलवे ट्रैक को बिछाने और मौजूदा ट्रैक को 4 लाइन बनाने की योजना पर काफी तेजी से काम चल रहा है.

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केंद्र की मोदी सरकार ने पूर्वोत्तर में सिलीगुड़ी कॉरिडोर यानी 'चिकन नेक' को और भी ज्यादा मजबूत करने की तैयारी शुरू कर दी है. इसको लेकर केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि इस क्षेत्र में एक 40 किलोमीटर लंबा भूमिगत रेल लाइन बनाने की योजना पर काम चल रहा है. इसका मकसद मुख्य भूमि से पूर्वोत्तर के राज्यों को जोड़ने का है. वहीं इस कॉरिडोर को और भी ज्यादा मजबूत करने के पीछे एक और वजह बांग्लादेश की बढ़ती हिमाकत है. बीते कुछ महीनों से ढाका की तरफ से चिकन नेक को लेकर कई बड़े बयान सामने आए हैं. इनमें सिलीगुड़ी कॉरिडोर को बांग्लादेश में जोड़ने को लेकर बात कही गई थी.

चिकन नेक को और भी ज्यादा मजबूत करने की चल रही तैयारी 

बता दें कि सोमवार को आम बजट में रेल मंत्रालय संबंधी प्रावधानों की जानकारी देते हुए केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि 'पूर्वोत्तर को देश के शेष भाग से जोड़ने वाले 40 किलोमीटर लंबे रणनीतिक गलियारे के लिए विशेष योजना बनाई जा रही है. इस भूमिगत रेलवे ट्रैक को बिछाने और मौजूदा ट्रैक को 4 लाइन बनाने की योजना पर काफी तेजी से काम चल रहा है.' केंद्रीय मंत्री के अलावा पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के महाप्रबंधक चेतन कुमार ने भी इस योजना के बारे में आम जानकारी साझा की है. उन्होंने बताया कि 'इस संकरे कॉरिडोर में भूमिगत रेल लाइन बिछाने के लिए योजना पर काम किया जा रहा है. भारतीय रेलवे द्वारा इस रेल लाइन को पश्चिम बंगाल की टिन मिले हार्ट से शुरू होकर रंगापानी रेलवे स्टेशनों के पास तक जोड़ने की तैयारी है.

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चिकेन नेक पूर्वोत्तर राज्यों को जोड़ने का एक महत्वपूर्ण स्थान 

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जानकारी के लिए बता दें कि भारत और बाकी अन्य भाग के अलावा पूर्वोत्तर राज्यों को जोड़ने और सामान के आदान प्रदान के लिए चिकन नेक एक बेहद ही महत्वपूर्ण गलियारा है. बांग्लादेश में जब शेख हसीना सरकार थी, तो उस दौरान भारत ने एक सड़क परियोजना के ऊपर भी काम किया था, लेकिन शेख हसीना के देश छोड़ने के बाद बांग्लादेश में भारत विरोधी भावना बढ़ रही है. ऐसे समय में यह रूट बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं है. इसके अलावा भारत में म्यांमार की सितपे पोर्ट के जरिए पूर्वोत्तर राज्यों तक पहुंचने के लिए एक नया रास्ता भी बनाने की कोशिश की थी, लेकिन यह प्रोजेक्ट म्यांमार में सैन्य तानाशाही और चीनी दखल के चलते अधर में लटका हुआ है. 

भारत के दुश्मन देशों की नजर इस महत्वपूर्ण गलियारे के ऊपर 

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बता दें कि भारत के कई दुश्मन देशों की नजर हमेशा से इस रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण गलियारे के ऊपर बनी रही है, जिसके चलते भारत सरकार ने भी इसकी सुरक्षा के लिए हमेशा से मजबूत कदम उठाए हैं. दिल्ली दंगों के मुख्य आरोपी शरजील इमाम का भी इसी कॉरिडोर को लेकर एक बयान सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ था. उसने CAA आंदोलन के दौरान असम और अन्य पूर्वोत्तर राज्यों को भारत से अलग करने की बात कही थी. इसके अलावा बांग्लादेश के अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद युनुस ने भी खुद बीजिंग यात्रा के दौरान इसे बंगाल की खाड़ी का रक्षक बताते हुए भारत के 7 राज्यों को रास्ते के लिए बांग्लादेश की जरूरत पड़ने वाला बताया है. यही नहीं युनुस ने चीन को भी यहां आने के लिए आमंत्रित किया था. चिकन नेक यानी सिलिगुड़ी कॉरिडोर 8 राज्यों और 4.5 करोड़ लोगों की जीवन की रेखा है. यहां से सेना की सभी तरह की सप्लाई, सड़क, रेल और पाइपलाइन सब इसी पर निर्भर है. यह भारत को जोड़ने वाला संकरा गलियारा है, जो सबसे कम चौड़ी जगह पर 22 किलोमीटर चौड़ा है. 

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