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भारतीय रेल का कमाल, मोदी सरकार ने बदल दी रेल इंफ्रास्ट्रक्चर की तस्वीर, बुलेट ट्रेन से पहले ही गोली की स्पीड से चलेंगी ट्रेनें

देश की लाइफलाइन कही जाने वाली भारतीय रेलवे बीते 11 वर्षों में बुनियादी ढांचे के मामले में एक नए युग में प्रवेश कर चुकी है. पटरियों की मजबूती, सुरक्षा मानकों की सख्ती और ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाने के लिए जिस स्तर पर काम हुआ है, उसने रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर की तस्वीर ही बदल दी है.

भारतीय रेल / सांकेतिक तस्वीर
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भारत दुनिया का सबसे बड़ा रेल नेटवर्क वाला देश है. देश में रेलवे महज सफर का जरिया नहीं, बल्कि ख्वाबों को पूरा करने का माध्यम भी है. रेल न सिर्फ लोगों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक सुरक्षित और आरामदायक यात्रा मुहैया कराती है, बल्कि भारत की अर्थव्यवस्था को भी नई गति प्रदान कर रही है. इसी कारण आज़ादी के अमृत काल यानी अमृत भारत परियोजना के तहत भारतीय रेलवे ने पिछले ग्यारह वर्षों में अपने ट्रैक इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने और सुरक्षा मानकों को बेहतर बनाने में काफी प्रगति की है. लगातार निवेश और फोकस्ड काम के चलते ट्रेन संचालन अब देशभर में ज्यादा सुरक्षित, तेज और भरोसेमंद हो गया है.

हाई-स्पीड ट्रेनों की ओर तेजी से बढ़ रहा भारतीय रेल

भारत में रेल इंफ्रास्ट्रक्चर ने रफ्तार पकड़ ली है. रेलवे अब सेमी हाई-स्पीड से मल्टी और हाई-स्पीड ट्रेनों की ओर तेजी से बढ़ रहा है. पीएम मोदी ने कहा था कि उनकी सरकार की कोशिश है कि देश के एक कोने से दूसरे कोने तक 24 घंटे में पहुंचा जा सके. इसी कड़ी में सरकार ट्रैकों को बुलेट ट्रेन के स्तर पर तैयार कर रही है. इसमें सफलता भी मिली है. 

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मोदी सरकार में बदली गई रेल पटरियों की तस्वीर

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पटरियों की मजबूती, सुरक्षा मानकों की सख्ती और ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाने के लिए जिस स्तर पर काम हुआ है, उसने रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर की तस्वीर ही बदल दी है. ट्रैक नवीनीकरण से लेकर हाई-स्पीड कॉरिडोर, सुरक्षा बाड़, आधुनिक मशीनें और उन्नत टर्नआउट सिस्टम तक हर मोर्चे पर भारतीय रेलवे ने बड़े और ठोस कदम उठाए हैं. इसका सीधा असर यात्रियों की सुरक्षा, ट्रेनों की गति और संचालन की विश्वसनीयता पर पड़ा है.

हाई-स्पीड रेलवे ट्रैक की लंबाई हुई दोगुनी से ज्यादा

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इसी व्यापक बदलाव का नतीजा है कि आज भारत में हाई-स्पीड रेलवे ट्रैक की लंबाई बीते 11 वर्षों में दोगुनी से भी अधिक हो चुकी है. रेल मंत्रालय के अनुसार, 2014 में जहां 110 किमी प्रति घंटे या उससे अधिक गति की अनुमति देने वाले ट्रैक की कुल लंबाई 31,445 किलोमीटर थी, जो कुल रेलवे नेटवर्क का लगभग 40 प्रतिशत थी, वहीं अब यह बढ़कर 84,244 किलोमीटर हो गई है. यह कुल नेटवर्क का करीब 80 प्रतिशत है, जिससे देशभर में ट्रेन संचालन पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज, सुरक्षित और कुशल हुआ है.

रेल मंत्रालय ने बताया कि इस अवधि में भारतीय रेलवे ने ट्रैक इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने और सुरक्षा मानकों को बेहतर बनाने पर विशेष ध्यान केंद्रित किया है. लगातार निवेश और योजनाबद्ध कार्यों के चलते ट्रैक की गुणवत्ता, विश्वसनीयता और संरचनात्मक मजबूती में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है, जिसका लाभ अब सीधे यात्रियों और माल परिवहनदोनों को मिल रहा है.

युद्ध स्तर पर हो रहा ट्रैकों का नवीनीकरण!

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वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान भारतीय रेलवे ने 6,851 किलोमीटर से अधिक पटरियों का नवीनीकरण किया. चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 में 7,500 किलोमीटर से अधिक ट्रैक के नवीनीकरण का कार्य प्रगति पर है, जबकि 2026-27 के लिए 7,900 किलोमीटर पटरियों के नवीनीकरण की योजना बनाई गई है. ये आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि रेलवे लंबे समय तक ट्रैक की गुणवत्ता और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की रणनीति पर लगातार आगे बढ़ रहा है.

स्पीड, सुरक्षा और क्वालिटी का ध्यान

रेल संचालन को निर्बाध और सुचारू बनाए रखने के लिए टर्नआउट नवीनीकरण में भी उल्लेखनीय तेजी आई है. वर्ष 2024-25 में 7,161 थिक वेब स्विच और 1,704 वेल्डेबल सीएमएस (कास्ट मैंगनीज स्टील) क्रॉसिंग स्थापित की गईं. वहीं 2025-26 में 8,000 से अधिक थिक वेब स्विच और 3,000 से अधिक वेल्डेबल सीएमएस क्रॉसिंग लगाए जा रहे हैं, जो ट्रेनों की गति और सुरक्षा दोनों के लिए बेहद अहम हैं.

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ट्रैक की स्थिरता बनाए रखने और यात्रियों की सवारी गुणवत्ता में सुधार के लिए गिट्टी की मशीनीकृत गहन स्क्रीनिंग का कार्य लगातार किया जा रहा है. 2024-25 में 7,442 किलोमीटर ट्रैक की डीप स्क्रीनिंग पूरी की गई, जबकि 2025-26 में 7,500 किलोमीटर से अधिक ट्रैक की गहन स्क्रीनिंग का काम जारी है. इससे ट्रैक की मजबूती बढ़ी है और तेज रफ्तार ट्रेनों के लिए आधार और अधिक सुदृढ़ हुआ है.

ट्रैक के रखरखाव में भी अभूतपूर्व काम

मेंटेनेंस क्षमता को बढ़ाने के लिए ट्रैक मशीनों के इस्तेमाल में भी बड़ा विस्तार किया गया है. वर्ष 2014 के बाद से 1,100 से अधिक आधुनिक ट्रैक मशीनें खरीदी गई हैं, जिससे रेलवे अब कम समय में अधिक प्रभावी और तकनीक-आधारित रखरखाव कर पा रहा है.

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फेंसिग, बाड़ लगाने के काम में भी आई तेजी

सुरक्षा के लिहाज से रेलवे ट्रैक के किनारे बाड़ लगाने का कार्य भी प्राथमिकता के आधार पर किया जा रहा है. इसका उद्देश्य मवेशियों के कुचले जाने और पटरियों पर अनधिकृत प्रवेश की घटनाओं को कम करना है. अब तक लगभग 15,000 किलोमीटर ट्रैक पर सुरक्षा बाड़ लगाई जा चुकी है, जिससे उन खंडों पर सुरक्षा में उल्लेखनीय सुधार हुआ है, जहां ट्रेनें 110 किमी प्रति घंटे से अधिक की गति से चलती हैं.

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इन निरंतर और व्यापक प्रयासों के परिणामस्वरूप भारतीय रेलवे ने पिछले 11 वर्षों में ट्रैक उन्नयन, सुरक्षा और गति के क्षेत्र में ऐतिहासिक प्रगति हासिल की है. आज रेलवे न सिर्फ तेज रफ्तार की ओर बढ़ रहा है, बल्कि एक ऐसे मजबूत और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण कर रहा है, जो आने वाले दशकों तक देश की परिवहन जरूरतों को सुरक्षित, भरोसेमंद और प्रभावी तरीके से पूरा करेगा.

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