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भारतीय तटरक्षक बल की बढ़ी ताकत, ICG को मिला पहला स्वदेशी प्रदूषण नियंत्रण पोत ‘समुद्र प्रताप’, रक्षा मंत्री करेंगे राष्ट्र को समर्पित

Samudra Pratap: यह रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत की सोच को और मजबूत करता है. ‘समुद्र प्रताप’ न सिर्फ तटरक्षक बल की ताकत बढ़ाएगा, बल्कि यह भी दिखाएगा कि भारत अब अत्याधुनिक रक्षा उपकरण खुद बनाने में पूरी तरह सक्षम हो रहा है.

Image Source: Social Media
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ICG receives first Indigenous Pollution Control Vessel Samudra Pratap: भारतीय तटरक्षक बल की ताकत बहुत जल्द और ज्यादा बढ़ने वाली है. देश को समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि मिलने जा रही है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह 5 जनवरी को तटरक्षक बल के पहले स्वदेशी प्रदूषण नियंत्रण पोत ‘समुद्र प्रताप’ को आधिकारिक रूप से बेड़े में शामिल करेंगे. यह पोत खास तौर पर समुद्र में फैलने वाले प्रदूषण से निपटने और समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने के लिए बनाया गया है. इसके शामिल होने से भारत की समुद्री सीमाओं की निगरानी और सुरक्षा पहले से कहीं बेहतर हो जाएगी.

‘समुद्र प्रताप’ की मुख्य खूबियां


‘समुद्र प्रताप’ एक बेहद विशाल और ताकतवर जहाज है. इसकी लंबाई लगभग 114.5 मीटर है और इसका वजन करीब 4,200 टन है. इस पोत को बनाने में 60 प्रतिशत से ज्यादा स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल किया गया है, जो भारत की आत्मनिर्भरता को दर्शाता है. यह जहाज 22 समुद्री मील से ज्यादा की रफ्तार से चल सकता है और बिना रुके करीब 6,000 समुद्री मील तक की यात्रा कर सकता है. इसकी यह क्षमता इसे लंबे समय तक समुद्र में तैनात रहने के लिए बेहद उपयोगी बनाती है.

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समुद्री सुरक्षा में निभाएगा अहम भूमिका


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यह पोत सिर्फ प्रदूषण नियंत्रण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके जिम्मे कई अहम काम होंगे. यह समुद्री प्रदूषण से जुड़े नियमों को लागू करने, समुद्री कानूनों का पालन सुनिश्चित करने, खोज और बचाव अभियान चलाने और भारत के विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) की सुरक्षा में बड़ी भूमिका निभाएगा. किसी भी समुद्री हादसे या तेल रिसाव जैसी स्थिति में यह जहाज तुरंत कार्रवाई करने में सक्षम होगा.

तटरक्षक बल का बयान

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गोवा शिपयार्ड लिमिटेड ने दिसंबर महीने में इस पोत को औपचारिक रूप से तटरक्षक बल को सौंप दिया था. तटरक्षक बल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि यह दो प्रदूषण नियंत्रण पोतों में से पहला है. उन्होंने यह भी कहा कि ‘समुद्र प्रताप’ अब तक का आईसीजी (ICG) का सबसे बड़ा और सबसे आधुनिक पोत है. इसके साथ एक वीडियो भी साझा किया गया, जिसमें इसकी आधुनिक खूबियां दिखाई गईं.

आधुनिक तकनीक से पूरी तरह लैस


‘समुद्र प्रताप’ में कई तरह की अत्याधुनिक तकनीक लगाई गई है. इसमें तेल रिसाव की पहचान करने वाली मशीनें और रासायनिक डिटेक्टर मौजूद हैं, जो समुद्र में किसी भी तरह के प्रदूषण का तुरंत पता लगा सकते हैं. सुरक्षा के लिए इसमें 30 मिमी की तोप, दो रिमोट कंट्रोल बंदूकें, आधुनिक फायर कंट्रोल सिस्टम, स्वदेशी इंटीग्रेटेड ब्रिज सिस्टम और ऑटोमैटिक पावर मैनेजमेंट सिस्टम लगाया गया है. इसके अलावा, इसमें आग बुझाने के लिए एक बेहद शक्तिशाली बाहरी प्रणाली भी है.

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आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम

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अधिकारियों के अनुसार, इस पोत के शामिल होने से भारत की समुद्री प्रदूषण से निपटने की क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी. साथ ही, यह रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत की सोच को और मजबूत करता है. ‘समुद्र प्रताप’ न सिर्फ तटरक्षक बल की ताकत बढ़ाएगा, बल्कि यह भी दिखाएगा कि भारत अब अत्याधुनिक रक्षा उपकरण खुद बनाने में पूरी तरह सक्षम हो रहा है.

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