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भारत के 'चिकेन नेक' पर डाली नजर तो आंख निकाल लेगी भारतीय सेना, मोदी सरकार ने सिलीगुड़ी कॉरिडोर को बना दिया अभेद्य

भारत ने बांग्लादेश और पाकिस्तान से उत्पन्न हो रहे खतरों को देखते हुए चिकन नेक यानी सिलीगुड़ी कॉरिडोर की सुरक्षा को अभेद्य बना दिया है। यहां तीन दिशाओं में स्थापित सैन्य स्टेशन यह स्पष्ट संदेश देते हैं कि मोहम्मद यूनुस हो या कोई भी दुश्मन, भारत की ओर आंख उठाने से पहले सौ बार सोचेगा कि सामने कैसी फौज खड़ी है।

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बांग्लादेश और पाकिस्तान के सैन्य अधिकारियों तथा मोहम्मद यूनुस द्वारा भारत के लिए सामरिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण इस कॉरिडोर पर दिए गए बयानों को भारत ने गंभीरता से लिया है और अब इस पर ठोस कार्रवाई भी शुरू कर दी है. इसी क्रम में पूर्वोत्तर की लाइफलाइन माने जाने वाले सिलीगुड़ी कॉरिडोर की सुरक्षा को अभेद्य बनाने हेतु सेना ने बड़े स्तर पर तैयारी की है.

जानकारी के मुताबिक बांग्लादेश सीमा से सटे क्षेत्रों में तीन नए सैन्य स्टेशन असम के बामुनी, बिहार के किशनगंज और पश्चिम बंगाल के चोपड़ा में स्थापित किए जा चुके हैं. सिलीगुड़ी कॉरिडोर के सामरिक महत्व और भौगोलिक संरचना को देखते हुए इन स्थानों का चयन किया गया है. विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी विपरीत परिस्थिति में सेना और BSF को तेज़ और लचीली तैनाती (मोबिलाइजेशन) में यह मदद करेंगे.

सिलीगुड़ी कॉरिडोर देश की सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है. संकरी चौड़ाई के कारण ‘चिकन नेक’ कहलाने वाला यह इलाका कुछ हिस्सों में मात्र 22 किलोमीटर चौड़ा है. यह गलियारा पूर्वोत्तर के आठों राज्यों को मुख्य भारत से जोड़ने वाली जीवनरेखा है. यदि यहां कोई समस्या पैदा होती है तो पूरा पूर्वोत्तर प्रभावित हो सकता है. रणनीतिक विशेषज्ञ कह चुके हैं कि यदि दुश्मन इस कॉरिडोर पर कब्जा करने की स्थिति में आ जाए, तो सेना की सप्लाई और मूवमेंट तक बाधित हो सकती है.

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भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है सिलीगुड़ी कॉरिडोर?

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सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, दुश्मनों की नजर हमेशा इस क्षेत्र पर रहती है. तनाव या संघर्ष की स्थिति में भारत-विरोधी ताकतें इस कॉरिडोर को निशाना बना सकती हैं. खासकर बांग्लादेश में तख्तापलट और भारत-हितैषी सरकार के जाने के बाद इस क्षेत्र की सुरक्षा को मजबूत करना बेहद जरूरी हो गया था.

मोहम्मद यूनुस को भारत का जवाब!

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भारत ने अपनी तैयारियां उस समय और तेज कर दीं जब बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने ढाका में पाकिस्तान के जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी के प्रमुख जनरल साहिर शमशाद मिर्ज़ा से मुलाकात की. इसके बाद चिकन नेक को लेकर यूनुस के विवादित बयान ने भी चिंता बढ़ाई.

सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक नए सैन्य स्टेशनों की स्थापना के साथ-साथ निगरानी नेटवर्क, बाड़बंदी और त्वरित प्रतिक्रिया इकाइयों को भी अपग्रेड किया जा रहा है. भारत ने यह स्पष्ट संदेश दे दिया है कि देश की अखंडता और सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा. इस नए कॉरिडोर सुरक्षा ढांचे में बिहार का किशनगंज भी शामिल है, जहां मुस्लिम आबादी करीब 70% है.

खुफिया निगरानी सिस्टम और सिक्योरिटी अपग्रेड

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गृहमंत्री अमित शाह सहित कई केंद्रीय मंत्री हाल ही में किशनगंज का दौरा कर चुके हैं, जो दर्शाता है कि सीमांचल क्षेत्र सरकार के लिए कितना महत्वपूर्ण है. गृहमंत्री ने दौरे में स्पष्ट कहा था कि देश की सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता. इसी कारण वॉर-टाइम की तैयारी के तहत सेना ने यह तैनाती की है, जिससे दुश्मन कोई भी कदम उठाने से पहले सोचे कि उसके सामने कैसी फौज तैनात है. किशनगंज शहर से बांग्लादेश की सीमा सिर्फ 23 किलोमीटर दूर स्थित है.

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