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'इस अपमान को आसानी से नहीं भूलेगा भारत...', पूर्व US सचिव ने ट्रंप को चेताया, कहा-अमेरिका नहीं तो अन्य साझीदार, बाजार और खरीदार भी खोज लेगा'

'इस अपमान को आसानी से नहीं भूलेगा भारत...', अमेरिका के पूर्व अवर सचिव क्रिस्टोफर पैडिला ने ट्रंप को चेतावनी देते हुए कहा है कि टैरिफ जैसे अल्पकालिक मुद्दों के कारण अमेरिका अपने मजबूत सहयोगी देश को खो देगा. उन्होंने साफ कहा कि भारत अपनी स्वतंत्र विदेश नीति में दखल कतई स्वीकार नहीं करेगा. भारत जैसे जीवंत राष्ट्र को दबाव में लाने की नीति फेल हो जाएगी. उन्होंने कहा कि अगर ऐसे ही दबाव बनाते रहे तो भारत अमेरिका को छोड़ नए साझीदार, बाजार और खरीदार भी खोज लेगा.'

Image: Donald Trump / Christopher Padilla (File Photo)
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगातार की जा रही टिप्पणियों, दबाव, और 80% टैरिफ की धमकी के बीच, भारत के साथ 2000 के दशक में हुए सिविल परमाणु समझौते और व्यापारिक वार्ताओं में शामिल रहे अमेरिका के वाणिज्य विभाग में अंतरराष्ट्रीय व्यापार के पूर्व अवर सचिव और विदेश नीति मामलों के विशेषज्ञ क्रिस्टोफर पैडिला ने ट्रंप और अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि भारत जैसे जीवंत लोकतंत्र पर दबाव की रणनीति कभी काम नहीं करने वाली. यह कोई छोटा देश नहीं है, जो अपने मूलभूत हितों पर समझौता कर ले. उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि भारत वह देश नहीं है जो अपना अपमान आसानी से भुला दे.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने घरेलू वोट बैंक और MAGA (Make America Great Again) एजेंडा को धार देने के लिए भारत जैसे अपने मजबूत और ऐतिहासिक साझेदार को खुद से दूर धकेल रहे हैं. वह लगातार ऐसे बयान दे रहे हैं, जिनसे भारत में अमेरिका-विरोधी भावना गहराती जा रही है.

1971 के युद्ध के समय पाकिस्तान के पक्ष में झुकाव और नई दिल्ली के संकट के समय अमेरिका की निष्क्रियता को लेकर पहले से मौजूद अविश्वास को ट्रंप ने और बढ़ा दिया है. इससे अमेरिका पर भरोसा न करने वाली सोच और भावनाएं और अधिक मजबूत हो रही हैं.

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इसी बीच, अमेरिका के वाणिज्य विभाग में अंतरराष्ट्रीय व्यापार के पूर्व अवर सचिव और विदेश नीति मामलों के विशेषज्ञ क्रिस्टोफर पैडिला ने चेतावनी दी है कि अमेरिका और भारत के बीच जारी व्यापारिक तनाव इस रणनीतिक साझेदारी को दीर्घकालिक रूप से नुकसान पहुँचा सकता है.

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'छोटे मुद्दों को लेकर भारत के साथ संबंधों को खतरे में डाल रहा अमेरिका'

क्रिस्टोफर पैडिला ने कहा, "मुझे चिंता है कि हम अल्पकालिक मुद्दों के चलते इस महत्वपूर्ण संबंध को खतरे में डाल रहे हैं." पैडिला अमेरिका के अन्य विशेषज्ञों की इस बात को दोहरा रहे हैं कि ट्रंप के इस हठ के कारण वर्षों से बने विश्वास को धक्का लगेगा और एक ऐसी खाई बन सकती है, जिसे पाटना लगभग असंभव होगा.

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'अमेरिका की नीति को लंबे समय तक याद रखेगा भारत': पैडिला

पैडिला ने इस दौरान चेताया कि भारत में अमेरिका की कुछ हालिया नीतियों को लंबे समय तक याद रखा जाएगा. उन्होंने यह भी चिंता जताई कि भारत में यह सवाल उठ सकता है कि क्या अमेरिका वास्तव में एक भरोसेमंद साझेदार है?

'इस अपमान को आसानी से नहीं भूलेगा भारत'

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उन्होंने कहा, "मैं जानता हूँ कि भारत में मेरे सहयोगियों के साथ वर्षों के काम के दौरान यह अनुभव रहा है कि ऐसे अपमान जल्दी नहीं भुलाए जाते." पैडिला उस ऐतिहासिक संदर्भ की ओर इशारा कर रहे थे जब भारत को महज गेहूं और जरूरी सामान की आपूर्ति के लिए अमेरिका द्वारा अपमानित किया गया था. 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान अमेरिका एक पक्ष बन गया था और उसने अपना 7वां जंगी बेड़ा भेजने की धमकी तक दे डाली थी. अमेरिका की इस धमकी के बाद रूस ने हस्तक्षेप करते हुए कहा था कि यदि अमेरिकी नेवी आई, तो वह भी अपने युद्धपोत भेजेगा.

इस घटना के 54 वर्ष बीत जाने के बाद भी भारत की जनता, पीढ़ी दर पीढ़ी इस अपमान और टीस को भुला नहीं पाई है. उन्हें याद है कि किस तरह संकट की घड़ी में अमेरिका ने भारत का साथ नहीं दिया, जबकि सोवियत संघ ने समर्थन किया था. इसी कारण तत्कालीन USSR (अब रूस) से भारत के संबंध सदैव मजबूत बने रहे हैं, चाहे सरकार कोई भी रही हो.

संकट की जड़: कृषि-डेयरी क्षेत्र पर दबाव और स्वतंत्र विदेश नीति में दखल

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पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू. बुश के प्रशासन में सेवा दे चुके पैडिला वर्तमान में ब्रंसविक नामक वैश्विक सलाहकार फर्म में वरिष्ठ सलाहकार हैं. उन्होंने कहा कि इस संकट की जड़ राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत के कृषि और डेयरी क्षेत्र को खोलने के दबाव और भारत की स्वतंत्र विदेश नीति में दखल के प्रयासों में छिपी है. पैडिला ने कहा, "भारतीय कृषि बाजार की संरचना को देखते हुए, इसमें बदलाव की मांग भारत के लिए एक मूलभूत मुद्दा है — और दूसरा उसकी स्वतंत्र विदेश नीति."

'भारत नए साझेदार, बाजार और खरीदार खोज लेगा'

भारत के निर्यातों पर अमेरिकी टैरिफ के प्रभाव पर पैडिला ने कहा, "यह दर्दनाक जरूर होगा, लेकिन भारतीय निर्यातक वैकल्पिक बाजारों की तलाश कर सकते हैं." उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि रत्न और वस्त्र जैसे उत्पादों के लिए वैश्विक बाजार पहले से ही मौजूद हैं, और भारत में बनने वाले आईफोन भी अन्य देशों में बेचे जा सकते हैं.

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'भारत के प्रति बदल गई अमेरिकी नीति'

विदेश नीति पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि रूस के साथ भारत के रिश्ते हमेशा अमेरिका-भारत संबंधों में एक ‘अड़चन’ रहे हैं, लेकिन चीन के संदर्भ में भारत की रणनीतिक अहमियत को देखते हुए अमेरिका अब तक इसे स्वीकार करता रहा है. हालांकि अब उस नीति में बदलाव आता दिखाई दे रहा है.

'चीन के प्रति नरम रुख हैरानी का विषय'

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क्रिस्टोफर पैडिला ने आश्चर्य जताया कि अमेरिका फिलहाल चीन के प्रति नरम रुख अपना रहा है, जबकि भारत जैसे पुराने साझेदार के साथ संबंधों को नुकसान पहुँचा रहा है. इसी भावना को अमेरिकी स्टेट साउथ कैरोलिना की पूर्व गवर्नर और संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका की पूर्व राजदूत निक्की हेली ने भी दोहराया. हेली ने कहा कि यह चौंकाने वाली बात है कि अमेरिका ने अपने सबसे बड़े प्रतिद्वंदी चीन को टैरिफ में 90 दिनों की छूट दी, लेकिन भारत पर 1 अगस्त से कठोरता लागू कर दी. उन्होंने ट्रंप की दोहरी नीति की पोल खोलते हुए कहा कि यदि चीन को इतनी आसानी से बच निकलने दिया गया, तो भारत उसके साथ चला जाएगा — और अमेरिका अपने सबसे मजबूत साझेदार को खो देगा.

'अमेरिका की जबरदस्ती वाली रणनीति घातक'

पैडिला ने चेतावनी दी कि अमेरिका की यह जबरदस्ती वाली रणनीति भारत को रूस और चीन के करीब ले जा सकती है, हालांकि इन तीनों देशों की विदेश नीतियों में परस्पर विरोधाभास हैं. उन्होंने कहा, "यह अमेरिका के हित में नहीं है कि वह भारत जैसे देशों को मजबूर कर किसी और ध्रुव की ओर धकेले."

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'भारत एक जीवंत लोकतंत्र है-दबाव की नीति यहां नहीं चलेगी'

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भारत के साथ 2000 के दशक में हुए सिविल परमाणु समझौते और व्यापारिक वार्ताओं में शामिल रहे पैडिला ने दो टूक कहा, "भारत कोई छोटा या निर्भर देश नहीं है. यह एक जीवंत और आत्मनिर्भर लोकतंत्र है, जो अपने मूलभूत हितों पर कभी समझौता नहीं करेगा. दबाव की रणनीति यहाँ सफल नहीं हो सकती."

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