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अमेरिका को पछाड़ भारत बनेगा दूसरी अर्थव्यवस्था! टैरिफ विवाद के बीच एक रिपोर्ट ने ट्रंप की नींद उड़ाई, जानिए कैसे होगा खेल

अमेरिका के साथ चल रहे टैरिफ विवाद के बीच एक रिपोर्ट में भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर चौंकाने वाला दावा किया गया है. इस रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत अमेरिका को पछाड़कर दुनिया की दूसरी अर्थव्यवस्था कैसे बनेगा और चीन से कैसे कड़ी टक्कर मिलेगी.

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अमेरिका के साथ चल रहे टैरिफ विवाद को लेकर भारतीय अर्थव्यवस्था पर एक अच्छी खबर सामने आई है. एक पेशेवर सेवा देने वाली कंपनी की तरफ से जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक व्यापार स्थिरता और अमेरिकी शुल्क दबावों के बीच भारत की अर्थव्यवस्था 2030 तक 20.7 लाख करोड़ डॉलर तक पहुंच सकती है. वहीं 2038 तक भारत अमेरिका को पछाड़कर दुनिया की दूसरी अर्थव्यवस्था भी बन सकता है. 

अमेरिका को पछाड़ भारत दुनिया की दूसरी अर्थव्यवस्था बनेगा

दुनिया में पेशेवर सेवा प्रदान करने वाली कंपनी ईवाई द्वारा जारी एक रिपोर्ट में बताया गया है कि 'भारत इस समय चीन और अमेरिका के बाद क्रय शक्ति क्षमता के आधार पर तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था है. वहीं 2024-25 जीडीपी के आधार पर भारत का बाजार 14.2 लाख करोड़ डॉलर का रहा, जो बाजार विनिमय दरों पर रखी गई अर्थव्यवस्था से करीब 3.6 गुना अधिक है. 

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'भारत की जीडीपी 34.2 करोड़ डॉलर हो जाएगी'

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ईवाई द्वारा की गई रिसर्च और आकलन के बाद पेश रिपोर्ट में बताया गया है कि 'भारत और अमेरिका के क्रमशः 6.5 प्रतिशत एवं 2.01 प्रतिशत की औसत वृद्धि दर बनाए रखने की स्थिति में भारत का बाजार 34.02 लाख करोड़ डॉलर की हो जाएगी. वर्ष 2028 तक भारत विनिमय दरों के आधार पर जर्मनी को पछाड़ते हुए तीसरी अर्थव्यवस्था बन सकता है. 

'भारत 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य की तरफ बढ़ रहा'

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ईवाई कंपनी के मुख्य नीति सलाहकार डीके श्रीवास्तव ने कहा कि 'आने वाले समय में युवा एवं कुशल कार्यबल, मजबूत बचत, निवेश दर और टिकाऊ ऋण प्रोफाइल जैसी भारत की तुलनात्मक मजबूती, वैश्विक अस्थिरता के बावजूद उच्च वृद्धि दर को बनाए रखने में मददगार होंगी. भारत अपने जरूरी प्रौद्योगिकी क्षमताओं के चलते 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य की तरफ काफी तेजी से बढ़ रहा है.'

'अमेरिकी टैरिफ दर पर भारत की जीडीपी को 0.9% का नुकसान'

कंपनी द्वारा पेश की गई रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 'अमेरिका द्वारा भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ दर लगाए जाने की वजह से जीडीपी को बड़ा झटका लग सकता है. इसमें करीब 0.9% तक की गिरावट आ सकती है. हालांकि, यह भी अनुमान लगाया गया है कि अगर एक-तिहाई प्रभाव मांग में कमी आता है, तो सभी प्रभाव जीडीपी सिर्फ 0.3 प्रतिशत तक सीमित रह जाएगी. वहीं उचित नीतिगत उपाय के सहारे या प्रभाव के चलते यह 0.1 तक भी पहुंच सकता है. अगर इसी तरीके से जीडीपी दर चलती रही, तो चालू वित्त वर्ष में देश की आर्थिक वृद्धि दर 6.5 प्रतिशत से घटकर 6.4 प्रतिशत तक रह सकती है.'

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'अमेरिकी शुल्क का प्रभाव भारतीय निर्यात पर' 

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इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि उच्च अमेरिकी शुल्क का जो प्रभाव है, वह भारतीय निर्यात के 48 अरब डॉलर से अधिक मूल्य उत्पादों पर पड़ेगा. इनमें वस्त्र रत्न एवं आभूषण, झींगा, चमड़ा, जूते चप्पल, रसायन पशु, उत्पाद यांत्रिक विद्युत मशीनरी जैसे कई अन्य क्षेत्र में इसका गहरा प्रभाव पड़ेगा. हालांकि, अमेरिका द्वारा यह शुल्क ऊर्जा, दवा और इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं पर लागू नहीं की गई है. ऐसे में इन क्षेत्रों के निर्यात से भारत को कोई नुकसान नहीं होगा. 

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