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सिंधु जल समझौते पर भारत का एक और बड़ा फैसला, दुलहस्ती प्रोजेक्ट से पाकिस्तान में मची खलबली

पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने सख्त रुख अपनाते हुए सिंधु जल समझौते को स्थगित कर दिया. इसके बाद सरकार ने चिनाब नदी पर दुलहस्ती हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट के दूसरे चरण को मंजूरी दी. इस फैसले से पाकिस्तान बौखला गया है.

Indus Water Agreement
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आतंक को पालने और बढ़ावा देने वाले देश पाकिस्तान की हालत दिन पर दिन बिगड़ती जा रही है. भारत से टकराव की नीति ने उसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी मुश्किल में डाल दिया है. पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने जिस तरह से सख्त रुख अपनाया है, उसने साफ संदेश दे दिया है कि अब नरमी का दौर खत्म हो चुका है. हालात ऐसे बन गए हैं कि पाकिस्तान अब खुद को बचाने के लिए कभी दुनिया के सामने गिड़गिड़ाता नजर आता है. तो कभी उसके देश के नेता बौखलाहट में अनर्गल बयानबाजी करते हैं. 

दरअसल, 22 अप्रैल को जम्मू कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था. इस हमले में आतंकियों ने 22 पर्यटकों से उनका धर्म पूछकर बेरहमी से हत्या कर दी थी. जांच में सामने आया कि इस हमले में पाकिस्तानी आतंकवादी शामिल थे. इसके बाद भारत सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए सिंधु जल समझौते को स्थगित कर दिया. यह फैसला पाकिस्तान के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं था.

क्या है दुलहस्ती हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट?

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सिंधु जल समझौते के स्थगन के बाद भारत ने एक और रणनीतिक कदम उठाया है. पर्यावरण विभाग की एक समिति ने चिनाब नदी पर दुलहस्ती हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट के दूसरे चरण को मंजूरी दे दी है. यह मंजूरी 27 तारीख को मिली और इसकी खबर आते ही पाकिस्तान में खलबली मच गई. भारत के इस फैसले से पाकिस्तान की बेचैनी साफ दिखाई देने लगी है. पाकिस्तान की सांसद और पूर्व मंत्री शेरी रहमान ने इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने भारत पर पानी को हथियार बनाने का आरोप लगाया है. एक्स पर लिखे अपने पोस्ट में शेरी रहमान ने कहा कि दुलहस्ती हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट स्टेज-2 को मंजूरी देना सिंधु जल समझौते का उल्लंघन है. उनका दावा है कि इस समझौते के तहत कोई भी फैसला एकतरफा नहीं लिया जा सकता.

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शेरी रहमान ने क्या कहा?

शेरी रहमान ने यह भी कहा कि सिंधु जल समझौते के अनुसार पाकिस्तान का अधिकार चिनाब, झेलम और सिंधु नदी के जल पर है, जबकि भारत को रावी, ब्यास और सतलुज नदियों का पानी मिलता है. उन्होंने आरोप लगाया कि भारत ने अवैध तरीके से सिंधु जल समझौते को स्थगित किया है और अब एक के बाद एक विवादित परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ा रहा है. पाकिस्तान की आपत्ति यहीं खत्म नहीं होती. शेरी रहमान ने सावलकोट, रेटल, बड़सर, पाकल डुल, क्वार, कीरू और किरथाई जैसी परियोजनाओं का भी जिक्र किया. उनके अनुसार अब दुलहस्ती प्रोजेक्ट का दूसरा चरण भी इसी कड़ी में जोड़ दिया गया है. हालांकि भारत का रुख इस पूरे मामले में बिल्कुल साफ और स्पष्ट है.

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 भारत ने रूख किया साफ

भारत सरकार का कहना है कि जब तक पाकिस्तान अपनी धरती पर पल रहे आतंकी संगठनों के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं करता, तब तक किसी भी तरह की बातचीत संभव नहीं है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई बार साफ शब्दों में कह चुके हैं कि पानी और खून एक साथ नहीं बह सकते. इस बयान से भारत की नीति और मंशा दोनों स्पष्ट हो जाती हैं.

 260 मेगावाट बिजली उत्पादन 

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दुलहस्ती हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट के तहत भारत 260 मेगावाट बिजली उत्पादन की तैयारी कर रहा है. इसके अलावा इसी चिनाब नदी पर सावलकोट हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट भी प्रस्तावित है, जिसकी क्षमता करीब 1856 मेगावाट बताई जा रही है. इन परियोजनाओं से न सिर्फ भारत की ऊर्जा जरूरतें पूरी होंगी, बल्कि जम्मू कश्मीर के विकास को भी नई गति मिलेगी.

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बता दें कि भारत का यह कदम दिखाता है कि अब राष्ट्रीय सुरक्षा और हितों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा. पाकिस्तान की बौखलाहट इस बात का संकेत है कि भारत के फैसले उसे अंदर तक प्रभावित कर रहे हैं. आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि पाकिस्तान अपनी नीतियों में बदलाव करता है या फिर इसी तरह अंतरराष्ट्रीय मंचों पर शिकायतें करता रह जाएगा.

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