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'भारत हमारा पसंदीदा पार्टनर, पसंद का पार्टनर', आतंकवाद से लड़ाई में साथ आया जर्मनी, UNSC में दावेदारी का किया समर्थन

PM मोदी और जर्मन चांसलर ने द्विपक्षीय वार्ता के बाद साझा बयान जारी किया. दोनों नेताओं ने तकनीकी, रणनीतिक और आर्थिक क्षेत्रों में संबंधों को और मजबूत बनाने पर जोर दिया. दोनों ने आतंकवाद के खिलाफ मिलकर काम करने का संकल्प लिया और UNSC में सुधारों की वकालत की.

PM Modi and Fredrich Merz
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने सोमवार को गांधीनगर के महात्मा मंदिर कन्वेंशन सेंटर में डेलीगेशन स्तर की बातचीत की, जिसमें भारत-जर्मनी के सहयोग को और बढ़ाने पर जोर दिया गया. यह बैठक दोनों देशों के बीच 25 साल पुरानी रणनीतिक साझेदारी की प्रगति की समीक्षा करने और विभिन्न क्षेत्रों में साझेदारी को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से हुई.

बैठक में दोनों नेताओं ने व्यापार और निवेश, तकनीक, शिक्षा, स्किल और मोबिलिटी में सहयोग पर चर्चा की. इसके अलावा रक्षा और सुरक्षा, विज्ञान, अनुसंधान, हरित विकास, और लोगों के बीच संबंधों जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में साझेदारी को और मजबूत करने पर भी ध्यान दिया गया.

प्रतिनिधिमंडल स्तर की बातचीत के बाद प्रधानमंत्री मोदी और जर्मन चांसलर फ्रिडरिक मर्ज ने संयुक्त रूप से मीडिया को संबोधित किया, जिसमें उन्होंने भारत और जर्मनी के बीच विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करने को लेकर हुए कई महत्वपूर्ण समझौतों की जानकारी दी. इस दौरान दोनों नेताओं ने भारत-जर्मनी के बीच रणनीतिक, आर्थिक और तकनीकी क्षेत्रों में अपने संबंधों को और सशक्त बनाने पर बल दिया.

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भारत-जर्मनी ने  संयुक्त रूप से रक्षा इंडस्ट्रियल सहयोग को मजबूत करने पर सहमति जताई है, जिसका उद्देश्य रक्षा उत्पादन और तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देना है. इसके अलावा आर्थिक सहयोग को बढ़ाने के लिए भारत-जर्मनी आर्थिक और निवेश समिति के तहत एक मुख्य कार्यकारी अधिकारी मंच की स्थापना भी घोषित की गई, जो द्विपक्षीय निवेश और आर्थिक गतिविधियों को सुचारू बनाने में मदद करेगा. 

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सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री में भी साझेदारी बढ़ाएंगे भारत-जर्मनी

इतना ही नहीं मोबाइल, मोबाइल कंपोनेंट और EV के निर्माण के लिए अहम सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री में साझेदारी को लेकर भी दोनों देशों ने समझौता किया है, जिससे इस क्षेत्र में तकनीकी विकास को बढ़ावा मिलेगा. उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भी नई योजनाओं के तहत एक इंडो-जर्मन रोडमैप पेश किया गया, जो शैक्षिक सहयोग को उत्साह बढ़ाएगा.

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स्वास्थ्य क्षेत्र में दोनों देशों ने स्किल पार्टनरशिप की घोषणा की, जिससे हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स की नैतिक और टिकाऊ भर्ती सुनिश्चित होगी. रिन्यूएबल एनर्जी के क्षेत्र में स्किल डेवलपमेंट को बढ़ावा देने के लिए हैदराबाद स्थित राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थान में एक उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने की भी घोषणा की गई. 

जर्मन चांसलर मर्ज का स्वागत करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "भारत जर्मनी के साथ अपनी दोस्ती और पार्टनरशिप को और मजबूत करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है. गुजरात में हम कहते हैं ‘आवकारो मिठो आपजे रे’-यानी स्नेह और आत्मीयता से आपका स्वागत करते हैं. इसी भावना के साथ, हम चांसलर का भारत में दिल से स्वागत करते हैं." 

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आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई पर भारत और जर्मनी एकमत!

पीएम मोदी ने कहा, "हम एकमत हैं कि आतंकवाद पूरी मानवता के लिए एक गंभीर खतरा है. भारत और जर्मनी इसके विरुद्ध एकजुट होकर पूरी दृढ़ता से लड़ाई जारी रखेंगे. भारत और जर्मनी सहमत हैं कि वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए वैश्विक संस्थाओं में सुधार अत्यंत महत्वपूर्ण है. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार के लिए जी4 के माध्यम से हमारा संयुक्त प्रयास इसी सोच का प्रमाण है."

प्रधानमंत्री ने चांसलर की यात्रा को ऐतिहासिक बताया. उन्होंने कहा, "चांसलर मर्ज की ये यात्रा एक विशेष समय पर हो रही है. पिछले वर्ष हमने अपनी रणनीतिक साझेदारी के 25 वर्ष पूरे किए और इस वर्ष हम अपने राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष भी मना रहे हैं. ये माइलस्टोन केवल समय की उपलब्धियां नहीं हैं, ये हमारी साझा महत्वाकांक्षाओं, परस्पर विश्वास और निरंतर सशक्त होते सहयोग के प्रतीक हैं...भारत और जर्मनी जैसे देशों की अर्थव्यवस्थाओं के बीच करीबी सहयोग पूरी मानवता के लिए महत्वपूर्ण है."

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उन्होंने आगे कहा, "भारत और जर्मनी के बीच तकनीकी सहयोग प्रति वर्ष मजबूत हुआ है, और आज इसका प्रभाव जमीन पर स्पष्ट रूप से दिखाई देता है. नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भारत और जर्मनी की प्राथमिकताएं समान हैं."

इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज के बीच गांधीनगर के महात्मा मंदिर कनवेंशन सेंटर में द्विपक्षीय वार्ता हुई. व्यापारिक साझेदारी 50 बिलियन डॉलर के ऐतिहासिक स्तर से भी आगे बढ़ चुकी है. भारत में दो हजार से अधिक जर्मन कंपनियां निवेश कर भरोसा जता चुकी हैं. इसी कड़ी में भारत- जर्मनी एक्सलेंस सेंटर की स्थापना का निर्णय लिया गया है, जो वैज्ञानिक और तकनीकी सहयोग को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा. ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में नया प्रोजेक्ट गेम-चेंजर साबित होगा. आज हुए समझौतों (MoUs) से हमारे सहयोग को और मजबूती तथा गति मिलेगी. रक्षा क्षेत्र में भी दोनों देशों का सहयोग विशेष महत्व रखता है और इससे नए व्यापार के रास्ते खुलेंगे.

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की भारत की मांग का जर्मनी ने किया समर्थन!

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प्रधानमंत्री ने इस दौरान कहा कि भारत और जर्मनी सहमत हैं कि Global Challenges से निपटने के लिए Global institutions में सुधार अत्यंत महत्वपूर्ण है, UN Security Council में सुधार के लिए G4 के माध्यम से हमारा संयुक्त प्रयास इसी सोच का प्रमाण है. आपको बता दें कि G4- चार देशों (ब्राजील, जर्मनी, भारत और जापान) का समूह जो UNSC में स्थायी सीटों के लिये एक-दूसरे की दावेदारी का समर्थन कर रहे हैं.

वहीं गाजा और यूक्रेन में जारी लड़ाई के मुद्दे पर पीएम मोदी ने आगे कहा कि आज हमने यूक्रेन और गाज़ा सहित कई वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की. भारत सभी समस्याओं और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान का पक्षधर रहा है और इस दिशा में किए जा रहे सभी प्रयासों का समर्थन करता है. 

भारतीयों को वीज़ा-फ्री ट्रांजिट की घोषणा

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प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि भारतीय नागरिकों के लिए वीज़ा-फ्री ट्रांजिट की घोषणा के लिए मैं चांसलर मर्ज़ का आभार व्यक्त करता हूँ. इससे दोनों देशों के लोगों के बीच नज़दीकियाँ और बढ़ेंगी. मुझे खुशी है कि गुजरात के लोथल में बनाए जा रहे National Maritime Heritage Complex से German Maritime Museum जुड़ रहा है. यह दोनों देशों की maritime history को जोड़ने वाला ऐतिहासिक कदम है. Traditional Medicines के क्षेत्र में गुजरात आयुर्वेद यूनिवर्सिटी का जर्मनी के साथ करीबी सहयोग रहा है. इस महत्वपूर्ण विषय पर आज किए जा रहे MOU से हमारे सहयोग को और अधिक बल मिलेगा.

पीएम मोदी मे जर्मन विश्वविद्यालयों को दिया भारत आने का न्यौता!

आज Higher Education पर बना Comprehensive Roadmap शिक्षा के क्षेत्र में हमारी साझेदारी को नई दिशा देगा. मैं जर्मन विश्वविद्यालयों को भारत में अपने campus खोलने का आमंत्रण देता हूँ. भारत और जर्मनी के बीच ऐतिहासिक और गहरे people-to-people ties हैं, रवीन्द्रनाथ टैगोर की रचनाओं ने जर्मनी के बौद्धिक जगत को नई दृष्टि दी. उन्होंने आगे कहा कि स्वामी विवेकानंद की विचारधारा ने जर्मनी सहित पूरे यूरोप को प्रेरित किया, और मैडम कामा ने जर्मनी में पहली बार भारत की आज़ादी का ध्वज फहराकर, हमारी स्वतंत्रता की आकांक्षा को वैश्विक पहचान दी: 

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वहीं रक्षा सहयोग के मुद्दे पर पीएम मोदी ने कहा कि रक्षा और सुरक्षा में बढ़ता सहयोग हमारे आपसी भरोसे और साझी सोच का प्रतीक है. रक्षा व्यापार से जुड़ी प्रक्रियाओं को सरल बनाने के लिए मैं चांसलर मर्ज़ का हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ. हम रक्षा उद्योगों के बीच सहयोग बढ़ाने के लिए एक रोडमैप पर भी काम करेंगे, जिससे Co-Development और Co-Production के नए अवसर खुलेंगे.

इससे पहले दिन में पीएम मोदी और चांसलर मर्ज साबरमती रिवरफ्रंट पर 'अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव' में पहुंचे थे. उनका स्वागत पारंपरिक गुजराती स्कार्फ और जश्न के माहौल में किया गया. राज्य के अलग-अलग हिस्सों से आए कलाकारों ने जर्मन लीडर का स्वागत पारंपरिक नृत्य और लोक संगीत के जरिए किया.

दोनों नेताओं ने पतंग उड़ाते हुए उत्सव का आनंद लिया.

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प्रधानमंत्री मोदी को ‘भारत-वसुधैव कुटुम्बकम’ संदेश वाली विशेष पतंग उड़ाते देखा गया, जो दुनिया को एक परिवार मानने की भारत की सोच को दर्शाती है. कई पतंगों पर तिरंगा, हिंदू देवी-देवता, और दोनों नेताओं के डिजाइन भी थे. पतंग उड़ाने के दौरान नदी किनारे भारी भीड़ जमा हुई और लोग भारतीय और जर्मन झंडे लहराते दिखे, जो दोनों देशों के गहरे रिश्तों और बढ़ती साझेदारी का प्रतीक था.

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महोत्सव में हिस्सा लेने वाले कई अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागियों से पीएम मोदी व चांसलर मर्ज ने बातचीत की. प्रधानमंत्री मोदी ने जर्मन चांसलर को उत्तरायण के सांस्कृतिक महत्व और सजावट के बारे में जानकारी दी. इसके अलावा, दोनों नेताओं ने साबरमती आश्रम का दौरा कर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी. उन्होंने गांधी के जीवन और विरासत को प्रदर्शित करने वाली प्रदर्शनी देखी और जर्मन चांसलर ने विजिटर्स बुक में अपने विचार भी लिखे. पीएम मोदी और चांसलर मर्ज के बीच मुलाकात भारत-जर्मनी रिश्तों को मजबूत करने और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने के प्रयास के तौर पर देखने को मिली.

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