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पहले दिन हारा भारत, विमान भी नहीं उड़े...कांग्रेसी पृथ्वीराज चौहान का ऑपरेशन सिंदूर और सेना पर पर विवादित बयान

सेना और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर दिए बयान को लेकर पृथ्वीराज चव्हाण के बयान से सियासी हलचल तेज हो गई है. बीजेपी ने उनसे माफी की मांग की है, जबकि चव्हाण ने माफी से इनकार करते हुए कहा कि उनके शब्दों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया.

Prithviraj Chavan (File Photo)
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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण द्वारा सेना और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर दिए गए बयान के बाद देश की राजनीति में जबरदस्त हलचल मच गई है. बयान पर भाजपा ने कड़ा ऐतराज जताते हुए उनसे सार्वजनिक माफी की मांग की है. वहीं, पृथ्वीराज चव्हाण ने साफ कर दिया है कि वे न तो अपने बयान से पीछे हटेंगे और न ही किसी तरह की माफी मांगेंगे.

पुणे में आयोजित एक पत्रकार परिषद में पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा कि उनके बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया जा रहा है. उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने भारतीय सेना का अपमान करने वाली कोई बात नहीं कही. चव्हाण ने कहा कि उन्होंने केवल अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और उनके भारतीय राजनीति पर संभावित प्रभाव की चर्चा की थी. उन्होंने यह भी जोड़ा कि अमेरिका में 19 दिसंबर को कुछ अहम जानकारियां सामने आने वाली हैं, जिनका सीधा असर वैश्विक राजनीति के साथ-साथ भारत पर भी पड़ सकता है.

मैं माफी क्यों मांगूं: पृथ्वीराज चव्हाण 

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बीजेपी द्वारा पाकिस्तान की भाषा बोलने और सेना के अपमान का आरोप लगाए जाने पर पृथ्वीराज चव्हाण ने तीखी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि माफी मांगने का सवाल ही नहीं उठता. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जब अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में भारत ने परमाणु परीक्षण किया, तो अगले ही दिन पाकिस्तान ने भी परीक्षण कर खुद को न्यूक्लियर वेपन स्टेट घोषित कर दिया. उनका तर्क था कि दो परमाणु संपन्न देशों के बीच पूर्ण युद्ध संभव नहीं होता. यही स्थिति कारगिल युद्ध में देखने को मिली और इसी तरह का परिदृश्य हालिया ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भी सामने आया. चव्हाण ने कहा कि उनके बयान का उद्देश्य सैन्य रणनीति और बदलते युद्ध स्वरूप पर सवाल उठाना था, न कि सेना की क्षमता पर संदेह करना. उन्होंने दोहराया कि भारतीय सेना पर उन्हें पूरा भरोसा है, लेकिन भविष्य की चुनौतियों को लेकर चर्चा करना लोकतंत्र में जरूरी है.

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कांग्रेस नेताओं ने किया चव्हाण का बचाव 

पृथ्वीराज चव्हाण के बयान के बाद कांग्रेस के अन्य वरिष्ठ नेताओं ने भी प्रतिक्रिया दी. कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि भारत की सशस्त्र सेनाएं अनुशासित, सक्षम और विजयी रही हैं. उन्होंने कहा कि सेना हमेशा राजनीतिक नेतृत्व के निर्देशों के अनुसार पेशेवर तरीके से काम करती है. प्रमोद तिवारी ने इंदिरा गांधी के नेतृत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके साहसिक फैसलों ने दुनिया का भू-राजनीतिक नक्शा बदल दिया था. उन्होंने याद दिलाया कि 1971 में मात्र 14 दिनों के भीतर बांग्लादेश का निर्माण हुआ, जो भारत की सैन्य शक्ति और मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति का प्रमाण है. वहीं, कांग्रेस सांसद उज्ज्वल रमण सिंह ने केंद्र सरकार पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान विपक्ष द्वारा उठाए गए सवालों का न तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जवाब दिया और न ही बीजेपी के अन्य नेताओं ने. उनके अनुसार, सरकार ने सवालों से बचने का रास्ता अपनाया है. उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दों पर पारदर्शिता बेहद जरूरी होती है, लेकिन सरकार इस दिशा में असफल नजर आ रही है.

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क्या है पूरा विवाद?

दरअसल, पूरा विवाद पृथ्वीराज चव्हाण के उस बयान से शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने कहा था कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के पहले दिन ही भारत रणनीतिक रूप से पिछड़ गया था. उन्होंने दावा किया था कि इस ऑपरेशन के दौरान सेना की जमीनी मूवमेंट एक किलोमीटर तक भी नहीं हुई और दो-तीन दिनों तक केवल हवाई और मिसाइल हमले ही होते रहे. चव्हाण ने यह सवाल भी उठाया था कि अगर भविष्य के युद्ध इसी तरह तकनीक आधारित होंगे, तो क्या 12 लाख सैनिकों की विशाल सेना की जरूरत रहेगी, या फिर उनके संसाधनों का उपयोग किसी अन्य दिशा में किया जा सकता है. उनके इसी बयान को बीजेपी ने सेना के अपमान के रूप में पेश किया.

बीजेपी ने बोला तीखा हमला 

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बीजेपी सांसद बृज लाल ने पृथ्वीराज चव्हाण के बयान की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी की आदत रही है कि वह देश और सेना का अपमान करती है. उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता विदेशों में जाकर भी भारत की छवि खराब करते हैं. उनके अनुसार, पूरा देश यह देख रहा है और जनता कांग्रेस को इसका जवाब जरूर देगी.बीजेपी सांसद जगदम्बिका पॉल ने भी बयान को शर्मनाक बताया. उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भारत की सैन्य ताकत को सराहा है. ऐसे में एक पूर्व मुख्यमंत्री द्वारा इस तरह की टिप्पणी करना सेना के शौर्य पर सवाल उठाने जैसा है. उन्होंने मांग की कि पृथ्वीराज चव्हाण और कांग्रेस नेतृत्व को देश से माफी मांगनी चाहिए.

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फिलहाल, यह विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है. एक तरफ कांग्रेस इसे विचार और रणनीति पर बहस बता रही है, तो दूसरी ओर भाजपा इसे राष्ट्र और सेना के सम्मान से जोड़कर देख रही है. आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है.

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