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दावोस में दिखी भारत की ताकत, डिजिटल लोकलाइजेशन का बजा डंका, पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट को दुनिया ने अपने लिए ब्लूप्रिंट माना

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में भारत की मजबूत उपस्थिति रही. दुनिया ने भारत के कोऑपरेटिव और कॉम्पिटिटिव फेडरलिज्म की ताकत देखी. वहीं भारत के डिजिटल लोकलाइजेशन और पर्सनल डेटा एक्ट का भी डंका बजा.

India At Davos (Screengrab)
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दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम 2026 में भारत का डेलिगेशन जोर-शोर से भाग ले रहा है. यहां मंत्रालय, विभाग, स्टेट, सब्जेक्ट आधारित प्रतिनिधिमंडल भाग लेने पहुंचा है. इसी कड़ी में महाराष्ट्र के देवेंद्र फडणवीस और रेल-इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्री अश्विनी वैष्णव भी पहुंचे. विभिन्न सत्रों में भाग लेने के बाद दोनों नेताओं ने एक संयुक्त पीसी की और भारत में निवेश, टेक, AI फ्रंट पर मिल रही सफलताओं और MoUs की जानकारी दी.

इस दौरान रेल मंत्री ने कहा कि दावोस में भारत की मजबूत उपस्थिति, प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में देश की विकास यात्रा, आर्थिक वृद्धि और तकनीक के क्षेत्र में भारत की उभरती वैश्विक नेतृत्व भूमिका की हर मंच पर चर्चा हो रही है. समावेशी विकास में भारत किस तरह नेतृत्व कर रहा है, इस पर भी व्यापक संवाद देखने को मिल रहा है.

दावोस में भारत की बहुत दमदार मौजूदगी: देवेंद्र फडणवीस

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इस दौरान मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि भारत सरकार के मार्गदर्शन में दावोस में भारत की मौजूदगी बेहद प्रभावी ढंग से दर्ज हो रही है. इस बार करीब 10 राज्यों की भागीदारी देखने को मिल रही है, जो प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए कोऑपरेटिव फेडरलिज्म और कॉम्पिटिटिव फेडरलिज्म की भावना को दर्शाती है. 

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जियोपॉलिटिक्स और कनेक्टेड ग्लोबल इकोनॉमी का अहम मंच: फडणवीस

उन्होंने कहा कि दावोस आज के जियोपॉलिटिक्स और कनेक्टेड ग्लोबल इकोनॉमी के दौर में प्रासंगिक बने रहने का एक अहम मंच है. यह वह स्थान है जहां बिजनेस, इनोवेशन, टेक्नोलॉजी और प्रोसेसेस पर नए विचार सामने आते हैं और दुनिया के बदलते रुझानों को समझने का अवसर मिलता है. इसका एक स्वाभाविक परिणाम यह भी होता है कि बिजनेस आपस में जुड़ते हैं, एमओयू होते हैं और निवेश के नए रास्ते खुलते हैं.

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महाराष्ट्र ने किए कई MoUs

मुख्यमंत्री ने बताया कि इस बार महाराष्ट्र ने बड़े पैमाने पर रणनीतिक एमओयू पर फोकस किया है. यूनिवर्सिटी ऑफ बर्कले, एमआईटी और इंस्टीट्यूट ऑफ जियोलॉजी जैसे विश्व के प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ तकनीकी और रणनीतिक समझौते किए गए हैं, ताकि ज्ञान और तकनीक को देश और राज्य तक लाया जा सके और एक मजबूत इकोसिस्टम तैयार किया जा सके. महाराष्ट्र पवेलियन में मेडटेक पर एक विस्तृत संवाद हुआ, जिसमें इस क्षेत्र के कई दिग्गज शामिल हुए. एमआईटी लैब के साथ मिलकर मेडटेक में नए एंटरप्रेन्योर तैयार करने की दिशा में एक बड़ा इनिशिएटिव लिया जा रहा है.

 वैश्विक नेताओं तक पहुंच रही भारत की ग्रोथ स्टोरी: फडणवीस

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उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा राज्यों को यहां आने और वैश्विक मंच पर अपनी बात रखने की अनुमति देना भारत को दुनिया की अर्थव्यवस्था में सेंटर स्टेज दिलाता है. भारत की ग्रोथ स्टोरी वैश्विक नेताओं तक पहुंच रही है. उन्होंने बताया कि उन्होंने एक पैनल चर्चा में हिस्सा लिया, जिसमें नौ देशों के वरिष्ठ मंत्री और नेता शामिल थे. चर्चा का विषय डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) को नेक्स्ट जेनरेशन गवर्नेंस टेक्नोलॉजी में कैसे बदला जाए, इस पर केंद्रित था. भारत की DPI की कहानी ने सभी को प्रभावित किया, यहां तक कि ब्राजील ने भी स्वीकार किया कि उसने यूपीआई से प्रेरणा लेकर अपना डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया है.

राउंडटेबल डिस्कशंस में भारत की तेज प्रगति की जोरदार चर्चा

इसके साथ ही सेमीकंडक्टर पर आयोजित राउंडटेबल में इंडस्ट्री के शीर्ष सीईओ और लीडर्स ने भारत की तेज़ प्रगति की सराहना की. आज भारत में एंड-टू-एंड 2 नैनोमीटर जैसी अत्याधुनिक चिप्स डिजाइन हो रही हैं, नए स्टार्टअप्स उभर रहे हैं, टैलेंट पाइपलाइन मजबूत हो रही है और मैन्युफैक्चरिंग भी शुरू हो चुकी है. इसी तरह एआई के क्षेत्र में भारत ने एआई स्टैक की सभी पांच लेयर्स पर काम कर एक अलग पहचान बनाई है. प्रधानमंत्री के टेक्नोलॉजी डेमोक्रेटाइजेशन मिशन के तहत कॉमन कंप्यूट फैसिलिटी और जीपीयू एक्सेस एक बड़ा बदलाव साबित हो रहा है.

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करीब-करीब हर पैनल और हर मंच पर चाहे रिन्यूएबल एनर्जी हो, मेडिकल टेक्नोलॉजी, एआई, सेमीकंडक्टर या फूड प्रोसेसिंग भारत की अलग पहचान उभरकर सामने आ रही है.

इस दौरान सवालों का जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार सभी राज्यों का स्वागत करती है और उन्हें सही बिजनेस मीटिंग्स और ग्लोबल लीडर्स से जोड़ने में सहयोग करती है. अधिक राज्यों की भागीदारी से भारत की सामूहिक ताकत और मजबूत होती है.

भारत दुनिया का भरोसेमंद साझेदार: वैष्णव

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अमेरिका-भारत ट्रेड डील को लेकर जारी बातचीत को लेकर सवाल पर केंद्रीय मंत्री अश्विणी वैष्णव ने कहा कि भारत आज दुनिया के लिए एक भरोसेमंद साझेदार है. वैश्विक अस्थिरता के इस दौर में दुनिया ऐसे देशों की तलाश में है जिनकी नीतियां स्थिर हों, सोच स्पष्ट हो और जिन पर भरोसा किया जा सके और भारत इस सूची में सबसे ऊपर है.

भारत के  डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट का दुनिया ने माना लोहा

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भारत के टैलेंट और टेक्नोलॉजी पर सवालों के जवाब में कहा गया कि सेमीकंडक्टर, एआई, सोलर, मेडिकल टेक्नोलॉजी सहित हर सेक्टर में भारतीय टैलेंट को वैश्विक पहचान मिल रही है. डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट को भी कई वैश्विक नेता दुनिया के लिए एक ब्लूप्रिंट मान रहे हैं.

भारत के डिजिटल लोकलाइजेशन की दुनिया कायल

एआई के डेमोक्रेटाइजेशन पर बोलते हुए बताया गया कि भारत ने कॉमन कंप्यूट फैसिलिटी के जरिए टेक्नोलॉजी को आम लोगों तक पहुंचाने का मॉडल तैयार किया है. आज भारत में करीब 38,000 जीपीयू एक-तिहाई वैश्विक लागत पर उपलब्ध कराए गए हैं, जो दुनिया में अनोखा है. अन्य देशों में टेक्नोलॉजी कुछ बड़ी कंपनियों तक सीमित है, जबकि भारत ने ओपन-सोर्स मॉडल, पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप और साझा इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए इसे लोकतांत्रिक बनाया है.

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एआई रेगुलेशन और इसके दुरुपयोग को लेकर वैश्विक स्तर पर गंभीर चिंता जताई गई. कई देश और टेक कंपनियां एआई में गार्डरेल्स लगाने पर काम कर रही हैं, ताकि टेक्नोलॉजी जिम्मेदार बने. यह समाज के लिए बेहद जरूरी कदम है.

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अंत में यह भी बताया गया कि दावोस केवल निवेश या बैठकों का मंच नहीं, बल्कि नए विचारों को सीखने और अपनाने की जगह भी है. यूएई का ‘जीरो ब्यूरोक्रेसी’ मॉडल और जिम्मेदार एआई जैसे विचार भारत के लिए भी प्रेरणादायक हो सकते हैं. यही दावोस की सबसे बड़ी उपलब्धि है-संवाद, सहयोग और भविष्य की दिशा तय करना.

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