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भारत का डिफेंस सेक्टर धमाल मचा रहा, जल्द बनेगा ग्लोबल पावरहाउस

भारत का डिफेंस सेक्टर अब केवल आत्मनिर्भर नहीं, बल्कि एक ग्लोबल पावरहाउस बनने की राह पर है। हाल ही में आई रिपोर्ट के अनुसार, भारत का डिफेंस एक्सपोर्ट 2024 में 21,083 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो पिछले साल की तुलना में 32.5% की बढ़ोतरी दर्शाता है।

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भारत का डिफेंस सेक्टर अब सिर्फ आत्मनिर्भरता की ओर नहीं बढ़ रहा, बल्कि वह वैश्विक स्तर पर अपनी धाक जमाने की तैयारी में है। हाल ही में आई एक रिपोर्ट के अनुसार, देश का रक्षा निर्यात वित्त वर्ष 2024 में 21,083 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो 2023 के 15,920 करोड़ रुपये की तुलना में 32.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। यह उछाल दिखाता है कि आने वाले वर्षों में भारत डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग और निर्यात में एक ग्लोबल पावरहाउस बन सकता है।

भारत के डिफेंस सेक्टर में जबरदस्त ग्रोथ

रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले एक दशक में भारत का डिफेंस सेक्टर 31 गुना बढ़ चुका है। यह वृद्धि न केवल स्वदेशी रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता को दिखाती है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारत की पकड़ को भी मजबूत करती है।
सरकार के अनुमान के अनुसार, वित्त वर्ष 2029 तक 50,000 करोड़ रुपये का डिफेंस निर्यात करने का लक्ष्य रखा गया है। यह संकेत है कि आने वाले समय में भारत वैश्विक रक्षा आपूर्ति श्रृंखला (Global Defense Supply Chain) का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है।

यूरोप में बढ़ती मांग से भारत को फायदा

रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत के रक्षा क्षेत्र की सबसे बड़ी ग्रोथ यूरोपीय देशों से आने वाली बढ़ती मांग के कारण हो रही है। यूरोपीय देशों में मैन्युफैक्चरिंग बाधाओं और कार्यबल की कमी के कारण भारत एक भरोसेमंद डिफेंस सप्लायर बनकर उभर रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही में यूरोपीय रक्षा ऑर्डर की पहली बड़ी खेप भारत को मिल सकती है। इससे भारत के डिफेंस सेक्टर के निर्यात में और तेजी आएगी।

डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग में सरकार की नई नीतियां

भारत सरकार डिफेंस सेक्टर को तेजी से बढ़ाने के लिए नए सुधार और निवेश को बढ़ावा दे रही है। मार्च 2025 तक 1.5 लाख करोड़ रुपये की रक्षा खरीद योजना बनाई गई है, ताकि धीमे ऑर्डर प्लेसमेंट की समस्या को हल किया जा सके।
सरकार की मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत नीतियों ने डिफेंस सेक्टर को मजबूती दी है। भारत अब न केवल अपने रक्षा उपकरण बना रहा है, बल्कि दुनिया के अन्य देशों को भी आधुनिक हथियार, मिसाइल और रक्षा प्रणाली बेच रहा है।

ग्लोबल डिफेंस मार्केट में भारत की स्थिति मजबूत

रिपोर्ट में कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय रक्षा क्षेत्र में बदलाव भारत के लिए अतिरिक्त अवसर पैदा कर रहा है। अमेरिका ने हाल ही में यूक्रेन को दी जाने वाली सैन्य सहायता में कटौती की है, जिससे नाटो (NATO) की अमेरिकी रक्षा फंडिंग पर निर्भरता कम होगी। अब यूरोपीय देशों पर अपनी रक्षा व्यवस्था मजबूत करने का दबाव बढ़ रहा है, और ऐसे में भारत के रक्षा उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ सकती है।

रक्षा शेयरों में जबरदस्त उछाल की उम्मीद
सरकार की नीतियों और वैश्विक स्तर पर बदलते सुरक्षा परिदृश्य के कारण भारतीय रक्षा कंपनियों के शेयरों में भी तेजी आने की उम्मीद है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले सालों में भारत के डिफेंस सेक्टर में निवेश करना काफी फायदेमंद साबित हो सकता है।

भारत अब केवल रक्षा उपकरणों का उपभोक्ता नहीं, बल्कि बड़ा निर्यातक बनता जा रहा है। सरकार के ठोस प्रयासों और वैश्विक परिस्थितियों के चलते भारत का डिफेंस सेक्टर आने वाले वर्षों में एक ग्लोबल पावरहाउस के रूप में उभरेगा।
अगर भारत इसी रफ्तार से आगे बढ़ता रहा, तो वह न केवल अपनी सुरक्षा जरूरतों को पूरा करेगा, बल्कि दुनिया के बड़े डिफेंस सप्लायर में से एक भी बन जाएगा।
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