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India-Canada dispute: ट्रूडो के आरोपों पर भारत का सख्त जवाब, बताया ‘राजनीतिक एजेंडा’
India-Canada dispute :अक्टूबर 2024 में, भारत ने कनाडा द्वारा लगाए गए नए आरोपों को सख्ती से खारिज कर दिया, जिसमें भारतीय राजनयिकों को एक आपराधिक जांच में 'पर्सन ऑफ इंटरेस्ट' बताया गया था। भारत ने इन आरोपों को 'बेतुका' करार देते हुए कहा कि यह प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो की वोट बैंक राजनीति और उनके राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा है।
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India-Canada dispute : भारत ने कनाडा द्वारा लगाए गए ताजा आरोपों को 'बेतुका' करार देते हुए, उन्हें प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा बताया है। कनाडा की सरकार ने दावा किया है कि भारतीय उच्चायुक्त संजय कुमार वर्मा और अन्य भारतीय राजनयिक ‘पर्सन ऑफ इंटरेस्ट’ (जांच के संदिग्ध) के रूप में शामिल हैं, लेकिन भारत ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है।
विदेश मंत्रालय (MEA) द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि कनाडा की ओर से कोई ठोस सबूत न होने के बावजूद भारत को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। इस तरह के आरोपों को भारत ने राजनीति से प्रेरित बताते हुए इन्हें नकारा और ट्रूडो सरकार पर आरोप लगाया कि यह सब उनके ‘वोट बैंक’ की राजनीति का हिस्सा है। विदेश मंत्रालय ने ट्रूडो सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि "कनाडा में विदेशी हस्तक्षेप पर चल रही जांच के दौरान भारत को बेवजह घसीटना उनकी सरकार की राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है।" बयान में भारत ने यह भी कहा कि कनाडा की सरकार जानबूझकर भारतीय नेताओं और समुदाय को धमकी देने और डराने वाले तत्वों को संरक्षण देती रही है।
विदेश मंत्रालय ने कनाडाई सरकार द्वारा उठाए गए इन आरोपों के खिलाफ कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की और चेतावनी दी कि भारत अपनी सुरक्षा और प्रतिष्ठा की रक्षा के लिए किसी भी तरह के कदम उठाने का अधिकार सुरक्षित रखता है।
भारत-कनाडा के बिगड़ते संबंधों की पृष्ठभूमि
भारत और कनाडा के संबंध पिछले कुछ समय से तनावपूर्ण रहे हैं। 2023 में, ट्रूडो ने सार्वजनिक रूप से भारतीय एजेंसियों पर कनाडाई सिख नेता हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में शामिल होने का आरोप लगाया था। भारत ने इस आरोप को बेबुनियाद बताया था, और तब से दोनों देशों के बीच रिश्ते लगातार खराब होते जा रहे हैं।
आरोपों के पीछे राजनीतिक चाल?
विदेश मंत्रालय के बयान में साफ़ कहा गया है कि प्रधानमंत्री ट्रूडो की सरकार में कुछ ऐसे मंत्री शामिल हैं जो खुले तौर पर भारत विरोधी एजेंडे का समर्थन करते हैं। खासकर, 2020 में किसान आंदोलन के समय ट्रूडो की टिप्पणी ने भारत में नाराजगी पैदा की थी, क्योंकि इसे भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप के रूप में देखा गया था। अब फिर से भारतीय राजनयिकों को ‘पर्सन ऑफ इंटरेस्ट’ कहकर जांच में शामिल करना, भारत के अनुसार, उनकी संकीर्ण राजनीतिक लाभ उठाने की चाल है।
भारत ने कनाडा पर यह भी आरोप लगाया कि वहां आतंकवादी और संगठित अपराध के सरगना खुलेआम काम कर रहे हैं और कनाडा सरकार ने उन्हें सुरक्षित पनाहगाह मुहैया कराई है। भारत के मुताबिक, कनाडाई भूमि पर मौजूद भारत विरोधी ताकतें वहां के आतंकवादियों और अलगाववादियों को संरक्षण दे रही हैं। कई प्रत्यर्पण अनुरोधों को नजरअंदाज करना, और हिंसक गतिविधियों में शामिल लोगों को शरण देना, कनाडा की सरकार की विफलता को दर्शाता है।
‘पर्सन ऑफ इंटरेस्ट’ का मतलब क्या है?
‘पर्सन ऑफ इंटरेस्ट’ एक कानूनी शब्द है, जिसका इस्तेमाल किसी ऐसे व्यक्ति के संदर्भ में किया जाता है जो किसी जांच के संदर्भ में महत्वपूर्ण हो सकता है, लेकिन उस पर कोई औपचारिक आरोप नहीं लगाया गया हो। कनाडा ने भारतीय उच्चायुक्त संजय कुमार वर्मा सहित कुछ भारतीय राजनयिकों को इसी श्रेणी में रखा है। लेकिन भारत ने इस दावे को पूरी तरह से खारिज कर दिया है और इसे "हास्यास्पद" बताया है।
भारत और कनाडा के बीच बढ़ते तनाव ने दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को एक गंभीर मोड़ पर पहुंचा दिया है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि कनाडा की सरकार इस विवाद को कैसे सुलझाने की कोशिश करती है और क्या ट्रूडो सरकार भारत के साथ संबंध सुधारने के लिए कोई ठोस कदम उठाएगी या फिर यह टकराव और बढ़ेगा।
Source- IANS
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