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ऊर्जा संकट को भारत ने दी मात, खाड़ी से बाहर बढ़ाया गैस आयात, रवाना हुए दो और LNG जहाज

भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करते हुए खाड़ी देशों पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से अन्य स्रोतों से एलएनजी (LNG) आयात में वृद्धि की है.

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घरेलू उपभोक्ताओं के लिए गैस की सप्लाई बढ़ाने के उद्देश्य से दो और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (एलएनजी) कार्गो भारत की ओर आ रहे हैं. एक वरिष्ठ केंद्रीय सरकारी अधिकारी ने बुधवार को बताया कि मिडिल ईस्ट में ईरान से जुड़े युद्ध के बीच सार्वजनिक क्षेत्र की तेल और गैस कंपनियों ने खाड़ी क्षेत्र के बाहर से गैस आयात बढ़ा दिया है. पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने राष्ट्रीय राजधानी में प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि कच्चे तेल की सप्लाई पूरी तरह सुरक्षित है. उन्होंने बताया कि फिलहाल जितना कच्चा तेल आ रहा है, वह सामान्य तौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य से आने वाले तेल से भी ज्यादा है.

’75 प्रतिशत तेल अन्य मार्गों से आ रहा है’

उन्होंने कहा कि ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने अलग-अलग देशों से कच्चे तेल के कई कार्गो सुरक्षित कर लिए हैं. पहले जहां करीब 55 प्रतिशत कच्चा तेल होर्मुज मार्ग से आता था, अब करीब 75 प्रतिशत तेल अन्य मार्गों से आ रहा है. मिडिल ईस्ट संकट के कारण एलएनजी सिलेंडर की घबराहट में बुकिंग बढ़ने पर उन्होंने कहा कि घरेलू एलपीजी की सामान्य डिलीवरी अवधि अभी भी लगभग 2.5 दिन ही है, इसलिए ग्राहकों को जल्दबाजी में सिलेंडर बुक करने की जरूरत नहीं है.

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LPG उत्पादन में 25 प्रतिशत की वृद्धि हुई है

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उन्होंने कहा कि सरकार मिडिल ईस्ट संकट के बीच ऊर्जा आपूर्ति पर लगातार नजर रख रही है और जरूरी कदम उठा रही है. अधिकारी ने बताया कि वैकल्पिक रास्तों से गैस और तेल की खरीद की जा रही है ताकि सप्लाई सुरक्षित बनी रहे. भारत अपनी जरूरत का करीब 60 प्रतिशत एलपीजी आयात करता है. उन्होंने बताया कि घरेलू एलपीजी उत्पादन में 25 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, और सरकार के कदमों के बाद इसका अधिक हिस्सा घरेलू उपभोक्ताओं को दिया जा रहा है. 

आयातित गैस आपूर्ति पर युद्ध का असर

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उन्होंने यह भी कहा कि देश की रिफाइनरियां फिलहाल अपनी अधिकतम क्षमता पर काम कर रही हैं, और कुछ रिफाइनरियां तो 100 प्रतिशत से भी ज्यादा क्षमता पर चल रही हैं. देश में कुल गैस खपत 189 एमएमएससीएमडी (मिलियन मेट्रिक स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर प्रति दिन) है. इसमें से 97.5 एमएमएससीएमडी गैस देश में ही उत्पादित होती है, जबकि बाकी आयात की जाती है. उन्होंने बताया कि ईरान युद्ध के कारण उत्पन्न 'फोर्स मेज्योर' स्थिति के चलते लगभग 47.4 एमएमएससीएमडी गैस सप्लाई प्रभावित हुई है. प्राकृतिक गैस की कमी को लेकर चिंता तब बढ़ी जब कतर ने ईरान के हमलों के कारण उत्पादन अस्थायी रूप से रोक दिया. कतर भारत को एलएनजी की सप्लाई करने वाला सबसे बड़ा देश है.

घरेलू गैस आपूर्ति को सरकार ने दी प्राथमिकता

इस बीच पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने मंगलवार को उपभोक्ताओं को भरोसा दिलाया कि घरेलू रसोई के लिए एलपीजी की कोई कमी नहीं है. केंद्र सरकार ने मंगलवार को आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत आदेश जारी कर घरेलू पाइप्ड नेचुरल गैस, एलपीजी और वाहनों के लिए सीएनजी की निर्बाध आपूर्ति को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का निर्देश दिया है. सरकार के आकलन के अनुसार, मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए एलएनजी शिपमेंट प्रभावित हुए हैं और कुछ सप्लायर्स ने 'फोर्स मेज्योर' का हवाला दिया है. ऐसे में गैस सप्लाई को प्राथमिक क्षेत्रों की ओर मोड़ा जा सकता है.

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सरकार ने LPG उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए

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आदेश में कहा गया है कि घरेलू पाइप्ड गैस, ट्रांसपोर्ट के लिए सीएनजी, एलपीजी उत्पादन, पाइपलाइन कंप्रेसर ईंधन और अन्य जरूरी आवश्यकताओं के लिए गैस की सप्लाई को प्राथमिकता दी जाएगी. इसे प्राथमिकता सेक्टर-1 के रूप में सूचीबद्ध किया गया है. इसके अलावा, केंद्र सरकार ने रिफाइनरियों और पेट्रोकेमिकल यूनिट्स को एलपीजी उत्पादन अधिकतम करने और जरूरी हाइड्रोकार्बन संसाधनों को एलपीजी उत्पादन के लिए इस्तेमाल करने का निर्देश भी दिया है.

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