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ईरान के युद्धपोत पर US हमले के बीच भारत ने उठाया मानवीय कदम, ईरानी जहाज को दी शरण, कोच्चि में ठहरे 183 क्रू मेंबर
ईरान के इस युद्धपोत ने ऐसे समय में शरण ली है जब दो दिन पहले अमेरिका ने ईरानी युद्धपोत पर हमला किया था. जिसमें करीब 87 लोग मारे गए. वह युद्धपोत भारत से ही लौटा था.
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ईरान-US जंग के बीच भारत ने ईरान के एक जहाज को भारत में शरण दी है. तेहरान की अपील पर कोच्चि में ईरानी नौसेनिक जहाज को लंगर डालने की इजाजत दी गई है. यह जहाज 'आईआरआईएस लवन (IRIS Lavan)’ है. ईरान के इस युद्धपोत ने ऐसे समय में शरण ली है जब दो दिन पहले अमेरिका ने ईरानी युद्धपोत पर हमला किया था. जिसमें करीब 87 लोग मारे गए. वह युद्धपोत भारत से ही लौटा था.
IRIS Lavan वॉरशिप फरवरी में कोच्चि में हुए इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू में भाग लेने के लिए इस भारत आया था. ईरान का एक और जहाज फ्रिगेट आईरिस डेना भी भारत आया था. फ्लीट रिव्यू में शामिल होने के बाद वह वापस ईरान लौट रहा था, तभी श्रीलंका में अमेरिका ने उसे निशाना बनाकर हमला किया.
भारत ने क्यों दी ईरानी जहाज को शरण?
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भारत ने तकनीकी खराबी की रिपोर्ट मिलने के बाद आपातकालीन अनुमति दी. ईरानी युद्धपोत चार मार्च को कोच्चि पहुंचा था. जब केंद्र सरकार ने तेहरान के अनुरोध को मंजूरी दी, जिससे जहाज तकनीकी कारणों से तत्काल रुक सके. केंद्र सरकार ने एक मार्च को इस अनुरोध को मंजूरी दी, जिससे जहाज को कोच्चि बंदरगाह में प्रवेश करने का रास्ता मिल गया. युद्धपोत पर मौजूद 183 नाविकों के लिए शहर में भारतीय नौसेना की विशेष सुविधाओं में व्यवस्था की गई है. नौसैनिक अधिकारियों ने यह सुनिश्चित किया कि चालक दल के लिए सभी जरूरी लॉजिस्टिक और मानवतावादी व्यवस्थाएं उपलब्ध कराई जाएं.
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इससे पहले जहाज को इस इलाके में काम करते समय 28 फरवरी को एक तकनीकी खराबी का पता चला था. उसने जरूरी जांच और मदद के लिए डॉक करने के लिए भारत से मदद मांगी थी. यह घटना उस समय हुई जब जियोपॉलिटिकल बदलाव के हालात बने हुए हैं. क्योंकि आईआरआईएस डेना की घटना ने कूटनीतिक और राजनीतिक बहस को जन्म दिया है, जिससे क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा स्थिति और इसके प्रभाव पर सवाल उठ रहे हैं.
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पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र में बढ़ती तनावपूर्ण स्थिति के बीच एक ईरानी नौसैनिक जहाज का भारतीय बंदरगाह पर होना रणनीतिक सर्कल में भी ध्यान का केंद्र बन गया है. हालांकि, अधिकारियों ने कहा कि जहाज को डॉकिंग की अनुमति मानवतावादी आधार पर दी गई, क्योंकि ईरान ने तकनीकी खराबी के बाद तत्काल सहायता का अनुरोध किया था.
हर दिन भीषण ईरान-US की जंग
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ईरान-US और इजरायल की जंग 8वें दिन में प्रवेश कर चुकी है. इजराइली और अमेरिकी सेनाओं ने ईरान के कई अहम ठिकानों को निशाना बनाया. जैसा की अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही कह चुके हैं ये जंग लंबी चलने वाली है इसलिए लड़ाई हर दिन भीषण होती जा रही है. अमेरिका और इजरायल की सेनाएं ईरान पर मिसाइल हमलें कर रही हैं. दूसरी ओर इजराइल और खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ईरान के हमले भी जारी हैं.