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अहमदाबाद में 10वें स्टील ब्रिज का लोकार्पण... इस दिन मिलेगी मुंबई-अहमदाबाद पहली बुलेट ट्रेन, जानिए पूरी खबर
बता दें कि 60 मीटर लंबे 10वें स्टील ब्रिज का लोकार्पण सफलतापूर्वक पूरा हो गया है. इस ब्रिज का लोकार्पण सावधानीपूर्वक योजना और सटीकता के साथ मात्र 7 घंटों में पूरा हुआ. इसमें मुंबई अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए कुल 12 स्टेशन का निर्माण किया जा रहा है, जिनमें मुंबई, ठाणे, विरार, बोइसर, वापी, बिलिमोरा, सूरत, भरूच, वडोदरा, आनंद, अहमदाबाद, साबरमती शामिल हैं.
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भारत के पहले बुलेट ट्रेन का सपना देखने वालों का इंतजार खत्म होने वाला है. भारतीय रेलवे ने कंफर्म कर दिया है कि आखिर कितने दिनों के भीतर देश को पहली बुलेट ट्रेन की सौगात मिल जाएगी. बता दें कि मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन सेवा का पहला चरण दिसंबर 2027 तक पूरा हो जाएगा. इस परियोजना के लिए रूट पर चल रहे काम को तेजी से पूरा करने की प्रक्रिया चल रही है. इस बीच मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना ने एक और मील का पत्थर हासिल किया. शनिवार को गुजरात के अहमदाबाद जिले में परियोजना के 10वें स्टील ब्रिज का लोकार्पण सफलतापूर्वक पूरा हो गया. यह अहमदाबाद में लोकार्पित पहला स्टील ब्रिज है, जो पश्चिमी रेलवे की लॉन्ड्री सुविधा के ऊपर रेलवे ट्रैक के पास स्थापित किया गया है.
10वें स्टील ब्रिज का लोकार्पण सफलतापूर्वक पूरा
बता दें कि 60 मीटर लंबे 10वें स्टील ब्रिज का लोकार्पण सफलतापूर्वक पूरा हो गया है. इस ब्रिज का लोकार्पण सावधानीपूर्वक योजना और सटीकता के साथ मात्र 7 घंटों में पूरा हुआ. इसमें मुंबई अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए कुल 12 स्टेशन का निर्माण किया जा रहा है, जिनमें मुंबई, ठाणे, विरार, बोइसर, वापी, बिलिमोरा, सूरत, भरूच, वडोदरा, आनंद, अहमदाबाद, साबरमती शामिल हैं.
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अहमदाबाद में लोकार्पित पहला स्टील ब्रिज
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485 मीट्रिक टन वजनी इस ब्रिज की ऊंचाई 12 मीटर और चौड़ाई 11.4 मीटर है. इसे वर्धा (नागपुर, महाराष्ट्र) की एक समर्पित कार्यशाला में निर्मित किया गया और विशेष ट्रेलरों के जरिए अहमदाबाद लाया गया. ब्रिज में 20,360 टोर-शियर टाइप हाई स्ट्रेंथ (टीटीएचएस) बोल्ट का उपयोग हुआ है, जिन्हें सी5 सिस्टम सुरक्षात्मक पेंटिंग और इलास्टोमेरिक बियरिंग्स से लेपित किया गया हैं, ताकि स्थायित्व और कंपन नियंत्रण सुनिश्चित हो.
स्टील ब्रिज की खासियत
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अहमदाबाद का लोकार्पित पहला स्टील ब्रिज 16.5 मीटर की ऊंचाई पर अस्थायी ट्रेस्टल्स पर स्थापित किया गया है. दो 200-टन क्षमता वाले अर्ध-स्वचालित जैक और लॉकिंग ट्रॉलियों का उपयोग कर अनुप्रस्थ स्लीविंग की गई. संरचना को मजबूत करने के लिए 35x60 मीटर का अस्थायी प्लेटफॉर्म बनाया गया और ट्रैक बीम को सहारा देने के लिए अतिरिक्त ब्रैकेट लगाए गए. कुल 14 स्किड व्यवस्थाओं का उपयोग हुआ, जिनमें 4 अनुप्रस्थ प्रक्षेपण के लिए थीं.
कुल 28 स्टील ब्रिज बनाए जाएंगे
बता दें कि मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन कॉरिडोर में कुल 28 स्टील ब्रिज बनाए जाएंगे, जिनमें 17 गुजरात और 11 महाराष्ट्र में होंगे. अहमदाबाद में यह वायडक्ट रेलवे ट्रैक, फ्लाईओवर, नहर, साबरमती नदी पर नदी पुल और छह स्टील पुलों सहित 31 क्रॉसिंग से होकर गुजरेगा. यह परियोजना भारत की हाई-स्पीड रेल प्रणाली की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, जो मुंबई और अहमदाबाद के बीच यात्रा समय को 320 किमी/घंटा की रफ्तार से महज 2 घंटे तक कम कर देगी.
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रोजगार और कनेक्टिविटी को बढ़ावा देगा यह ब्रिज
राष्ट्रीय हाई-स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एनएचएसआरसीएल) ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता जताई है. अधिकारियों ने कहा कि यह ब्रिज परियोजना की इंजीनियरिंग उत्कृष्टता और समयबद्धता का प्रतीक है. स्थानीय लोग भी इस विकास से उत्साहित हैं, क्योंकि यह क्षेत्र में रोजगार और कनेक्टिविटी को बढ़ावा देगा.
कितनी होगी बुलेट ट्रेन की स्पीड?
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नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) ने बुलेट ट्रेन की अधिकतम स्पीड 320 किलोमीटर प्रति घंटे होने का दावा किया है. पहला प्रोजेक्ट मुंबई से अहमदाबाद और दूसरा हावड़ा से बिहार होते हुए नई दिल्ली तक जाएगा, जबकि तीसरा दिल्ली से अमृतसर तक जाएगा.
2 घंटे 7 मिनट में तय होगी 9 घंटे की दूरी
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि ‘गूगल मैप’ ऐप मुंबई और अहमदाबाद के बीच यात्रा का समय 9 घंटे का है, लेकिन बुलेट ट्रेन से यह दूरी महज 2 घंटे 7 मिनट में तय होगी. जानकारी के लिए बता दें कि बुलेट ट्रेन परियोजना का पहला चरण 2027 में सूरत-बिलिमोरा खंड पर शुरू किया जाएगा. इसके अलावा 2028 में ठाणे और 2029 में बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स तक इसका बाकी चरण पूरा हो जाएगा.
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हर 10 मिनट में एक ट्रेन
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अश्विनी वैष्णव ने बताया कि '320 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर का निर्माण पूरा हो चुका है, बाकि अन्य स्थलों पर स्टेशन निर्माण काफी तेजी से चल रहा है. नदी पुलों का निर्माण व्यवस्थित ढंग से किया जा रहा है और साबरमती सुरंग का निर्माण कार्य भी लगभग पूरा होने वाला है. ट्रेनों के परिचालन की इस तरह से योजना बनाई गई है कि सुबह और शाम के व्यस्त समय में हर आधे घंटे में एक ट्रेन रवाना होगी. इस परियोजना का पूरा नेटवर्क व्यवस्थित हो जाने के व्यस्त समय में हर 10 मिनट में एक ट्रेन उपलब्ध होगी.'