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अमेरिका में पत्रकार ने पूछा सवाल, बगले झांकने लगे राहुल, हंसने लगी जनता !

राहुल गांधी को विदेशी धरती पर समझाया गया कि INDI Alliance होता है, INDIA Alliance नहीं।राहुल जी BJP का एंगल ले आए हमेशा की तरह। पूछा गया INDIA में आखिरी A से क्या होता है? उसके बाद बगल वाले भी हंसने लगे।

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युवराज, शहजादा, पप्पू ना जाने बीजेपी ने कितनी उपमाएं बीजेपी ने राहुल गांधी को दी है। हालाकिं कई मौकों पर खुद राहुल को भी ये कहते सुना है कि हां मै पप्पू हूं, खड़गे साहब का कहना है कि राहुल गांधी पप्पू नहीं है। लेकिन कोई कुछ भी कहे राहुल इस वक्त देश में विपक्ष के नेता है और ऐसे नामों से उनका संबोधन ठीक नहीं है, बीजेपी को भी इस बात को समझना चाहिए। हालांकि बीजेपी ने ऐसे शब्दों का उपयोग करना कम भी किया था, लेकिन इसी बीच राहुल तीन दिन की यात्रा पर अमेरिका निकल लिए।बहुत सारे मुद्दो पर बात की , हर बार की तरफ बीजेपी चुनाव आयोग, लोकतंत्र को लपेटे में लिया। इसी बीच एक वक्त ऐसा भी आ गया जब राहुल गांधी खुद लपेट में आ ग। सुनिए

इस छोटे से वीडियों में आप समझ सकते है कि पत्रकार सवाल पूछ रहा है कि आप इंडी़ अलायंस का नेतृतव कर रहे है। लेकिन लोकसभा चुनाव में आप टीएमसी और उद्धव ठाकरे की पार्टी को सीट शेयरिंग के मुद्दे पर ज्यादा प्रभावित नहीं कर सके। तो मेरा सवाल है कि अगर आप जीत जाते तो सरकार कैसे चलाते। इस के जबाव में राहुल ने कहा कि नहीं हमने काफी हद तक समन्वय बना लिया था, और इसके बाद राहुल गांधी पत्रकार से सही करते हुए कहते है कि ये इंड़ी अलायंस नहीं है इंडिया अलायंस है, और इंड़ी अलायंस जो शब्द है वो बीजेपी ने गढ़ा है, तब पत्रकार लगे हाथ आखरी A का मतलब पूछ देता है। 

राहुल गांधी ठिठकते है और सोच कर कहते है अलायंस , तो पत्रकार कहता है कि दो बार अलायंस कैसे हो सकता है। तब वहां बैठी जनता हंसने लगती है। वैसे भी इन अलायंस के ज्यादातर नेता इंडिया का पूरा नाम लेने में दिक्कत महसूस करता है, और वही दिक्कत राहुल को भी हुई और अमेरिका में हुई। राहुल के इस वीडियों को शेयर करते हुए पत्रकार सुशांत सिन्हा ने लिखा है। राहुल गांधी को विदेशी धरती पर समझाया गया कि INDI Alliance होता है, INDIA Alliance नहीं। राहुल जी BJP का एंगल ले आए हमेशा की तरह।  पूछा गया INDIA में आखिरी A से क्या होता है? उसके बाद बगल वाले की हँसी देखना मिस मत कीजिएगा। 

वैसे राहुल गांधी ने अपनी इस यात्रा पर देश के ढेर सारे मुद्दे दुनिया के सामने रखे, जैसे इस बार के चुनाव निष्पक्ष नही थे, बल्कि नियंत्रित किए गए थे, लेकिन गरीब स बात को समझ गया है कि अगर संविधान खत्म हो गया तो सारा खेल खत्म हो जाएगा। गरीब समझ गया है कि असल लड़ाई तो संविधान बचाने वालों की और संविधान खत्म करने वालों की है। चुनाव अगर निष्पक्ष होते तो बीजेपी 240 तक भी नहीं पहुंच पाती। बीजेपी के पास बड़ा आर्थिक लाभ था और हमारे बैंक खाते सील थे। अब राहुल गांधी कैसे समझेंगे की अगर खटाखट योजना से एक लाख देने का वादा नहीं करते तो जो 99 आई है वो भा शायद कही और हो सकती थी, और इस चुनाव में  राहुल के साथ परिवार ने भी जितनी मेहनत की है, उससे ज्यादा तो अकेले मोदी ने की थी, लेकिन लोकतंत्र खतरें में है का ढिंढोरा आज भी राहुल गांधी पीट ही रहे है। खैर राहुल गांधी है कुछ भी बोल सकते है सोचना थोड़े ही है।

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