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मनी लॉन्ड्रिंग केस में ईडी की बड़ी कार्रवाई, एडेल लैंडमार्क्स की 585.46 करोड़ की संपत्तियां कुर्क

ईडी ने हरियाणा पुलिस, दिल्ली पुलिस और इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (ईओडब्ल्यू), दिल्ली द्वारा दर्ज की गई 74 एफआईआर/चार्जशीट के आधार पर जांच शुरू की.

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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के गुरुग्राम जोनल ऑफिस ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत 9 जनवरी को एक अस्थायी कुर्की का आदेश जारी किया है, जिसमें मेसर्स एडेल लैंडमार्क्स लिमिटेड (पहले मेसर्स एरा लैंडमार्क्स लिमिटेड के नाम से जाना जाता था) और इसके प्रमोटर हेम सिंह भड़ाना एवं सुमित भड़ाना से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में लगभग 585.46 करोड़ रुपए की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया गया है.

अस्थायी रूप से अटैच की गई संपत्तियों में हरियाणा के गुरुग्राम, फरीदाबाद, पलवल और बहादुरगढ़ के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के मेरठ और गाजियाबाद में स्थित लगभग 340 एकड़ के विभिन्न प्लॉट और जमीन के टुकड़े शामिल हैं. ये संपत्तियां मेसर्स एडेल लैंडमार्क्स लिमिटेड और इसकी सहयोगी कंपनियों के स्वामित्व में हैं.

74 एफआईआर के आधार पर शुरू हुई जांच

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ईडी ने हरियाणा पुलिस, दिल्ली पुलिस और इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (ईओडब्ल्यू), दिल्ली द्वारा दर्ज की गई 74 एफआईआर/चार्जशीट के आधार पर जांच शुरू की. एफआईआर में लगाए गए आरोपों के अनुसार, मेसर्स एडेल लैंडमार्क्स लिमिटेड, इसके प्रमोटरों और सहयोगी कंपनियों ने कई घर खरीदारों को वादा किए गए फ्लैट और यूनिट समय पर नहीं देकर धोखा दिया, जबकि इसमें 12 से 19 साल की देरी हुई.

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4,771 ग्राहकों से वसूले गए 1,075 करोड़, प्रोजेक्ट अब भी अधूरे

ईडी की जांच में पता चला कि मेसर्स एडेल लैंडमार्क्स लिमिटेड ने हरियाणा के गुरुग्राम, फरीदाबाद और पलवल में कई आवासीय ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट शुरू किए थे और आठ प्रोजेक्टों—कॉस्मोकोर्ट, कॉस्मोसिटी-I, कॉस्मोसिटी-III, स्काईविले, रेडवुड रेजिडेंसी, एरा ग्रीन वर्ल्ड, एरा डिवाइन कोर्ट और एडेल डिवाइन कोर्ट—में 4,771 ग्राहकों से एडवांस बुकिंग के तौर पर लगभग 1,075 करोड़ रुपए जमा किए थे. ये प्रोजेक्ट जो 2006-2012 में शुरू किए गए थे, आज तक अधूरे हैं.

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खरीदारों का पैसा डायवर्ट कर जमीन खरीदी

जांच में आगे पता चला कि प्रमोटरों ने घर खरीदारों से जमा किए फंड को वादा किए गए हाउसिंग प्रोजेक्ट को पूरा करने के बजाय, जमीन के टुकड़े खरीदने और अन्य उद्देश्यों के लिए ग्रुप कंपनियों को एडवांस के तौर पर डायवर्ट कर दिया. फंड के इस डायवर्जन के कारण आज तक फ्लैट और प्लॉट की डिलीवरी नहीं हो पाई है.

बाउंस हुए रिफंड चेक, बिना बताए जमीन गिरवी

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इसके अलावा, जांच में यह भी पता चला कि डिलीवरी न होने के कारण रिफंड मांगने वाले परेशान ग्राहकों को कंपनी ने चेक जारी किए थे, जिनमें से कई अलग-अलग कारणों से बाउंस हो गए. यह भी पता चला है कि मेसर्स एडेल लैंडमार्क्स लिमिटेड ने एकतरफा तरीके से प्रोजेक्ट प्लान और लाइसेंस वाली जमीन के एरिया में बदलाव किया, जिसमें शुरू में प्रस्तावित जमीन को कम करना भी शामिल था, जिससे खरीदारों को शुरू में किए गए वादों के अनुसार बेसिक सुविधाएं नहीं मिल पाईं. इसके अलावा, ग्रुप के प्रमोटरों ने खरीदारों को बिना बताए प्रोजेक्ट की जमीन को बैंकों के पास गिरवी रखकर प्रोजेक्ट के डेवलपमेंट के लिए टर्म लोन लिया था.

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फिलहाल मामले में आगे की जांच जारी है.

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