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25 साल में बुलेट ट्रेन की रफ्तार से बढ़ी उत्तराखंड की अर्थ व्यवस्था, छत्तीसगढ़ और झारखंड को भी पछाड़ा
उत्तराखंड राज्य 25 साल का वक्त पूरा कर चुका है. इन 25 सालों में राज्य ने कई उतार-चढ़ाव देखे, लेकिन इनसे गुजरते हुए उत्तराखंड ने अपने सटीक कदमों और फैसलों के दम पर अपनी आर्थिक बुनियाद को मजबूत किया है.
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9 नवंबर 2000, जब उत्तर प्रदेश से अलग होकर उत्तराखंड राज्य बना था, जिसे पहले उत्तरांचल के नाम से जाना जाता था और बाद में जनवरी 2007 में इसका नाम बदलकर उत्तराखंड़ कर दिया गया था.
उत्तराखंड की आर्थिक व्यवस्था तेजी से मजबूत हो रही
उत्तराखंड राज्य 25 साल का वक्त पूरा कर चुका है. इन 25 सालों में राज्य ने कई उतार-चढ़ाव देखे, लेकिन इनसे गुजरते हुए उत्तराखंड ने अपने सटीक कदमों और फैसलों के दम पर अपनी आर्थिक बुनियाद को मजबूत किया है. उत्तराखंड की आर्थिक व्यवस्था तेजी से मजबूत हो रही है. उत्तराखंड देश का श्रेष्ठ राज्य बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. राज्य ने कई नए आयाम छुए हैं, साथ ही कई मिल के पत्थर साबित किए हैं.
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उत्तराखंड ने राष्ट्रीय लेवल पर झंडे गाड़ दिए
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साल 2001- 2002 में 15 हज़ार 826 करोड़ के साथ आगे बढ़ी उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था अब 3.78 लाख करोड़ का विशाल आकार ले चुकी है. इतना ही नहीं सतत विकास के लक्ष्य हासिल करने में कई बड़ राज्यों को पीछे छोड़ते हुए उत्तराखंड ने राष्ट्रीय लेवल पर झंडे गाड़ दिए हैं.
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उत्तराखंड के बजट ने लिया विशाल रुप
नीति आयोग की ओर से जारी साल 2023-24 की एसडीजी इंडेक्स रिपोर्ट में उत्तराखंड सतत विकास के लक्ष्य को हासिल करने वालो राज्यों में केरल के साथ पहले पायदान पर है. साल 2002-03 में प्रदेश की पहली निर्वाचित कांग्रेस की एनडी तिवारी सरकार ने पाँच हज़ार 880 करोड़ रूपए का सालाना बजट पेश किया था, तो इसे काफी बड़ा बदलाव माना गया था. एक अलग राज्य के रूप में उत्तराखंड की किसी निर्वाचित सरकार का ये पहला बड़ा बजट था. इस साल बीजेपी की पुष्कर सिंह धामी सरकार ने 20 फरवरी को राज्य का बजट पेश किया था. जो अपने आप में एक रिकॉर्ड बन गया. महज़ कुछ हज़ार रूपए के सालाना बजट के साथ शुरु हुआ उत्तराखंड के बजट ने अब विशाल रुप ले लिया है.जो कि एक लाख करोड़ से अधिक का हो चुका है.
7 गुना से ज्यादा बढ़ गई प्रतिव्यक्ति आय
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सीएम धामी ने क्या कहा?
वहीं उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी ने इसे लेकर कहा, उत्तराखंड लगातार विकास के पथ पर अग्रसर है. 25 वर्ष की विकास यात्रा में कई नए आयाम छुए हैं. नए मील के पत्थर भी स्थापित किए हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गनिर्देशन में डबल इंजन की सरकार के साथ उत्तराखंड देश का अग्रणी राज्य बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है.
‘उत्तराखंड देश के अग्रणी राज्यों में शामिल होगा’
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सीएम धामी ने आगे कहा, “प्राथमिक सेक्टर की मजबूती के लिए हाल में बागवानी और कृषि से जुड़ी 1200 करोड़ रुपये से अधिक की मिलेट की खेती, बागवानी से जुडी विशिष्ट नीतियां तैयार की गई है. निसंदेह उत्तराखंड देश के अग्रणी राज्यों में शामिल होगा.”
उत्तराखंड के साथ- साथ ये दो राज्य भी बने
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बता दें कि साल 2000 में उत्तराखंड के साथ साथ दो राज्य छत्तीसगढ़ और झारखंड भी बने थे. खनिजों और संसाधनों से भरपूर दोनों राज्यों के मुकाबले उत्तराखंड की स्थिति छत्तीसगढ़ और झारखंड के मुकाबले ज्यादा अच्छी नहीं थी. लेकिन उत्तराखंड अपने साथ अस्तित्व में आए बाकी राज्यों से काफी आगे निकल गया है.
उत्तराखंड ने छत्तीसगंढ़ और झारखंड को छोड़ा पीछे
तीनों राज्यों की प्रति व्यक्ति आय में इसकी झलक साफ़ देखने को मिल रही है. साल 2001 में उत्तराखंड की प्रति व्यक्ति आय महज़ 16 हज़ार 232 रूपए थी. जो साल 2011-12 में बढ़कर एक लाख 314 रूपए और फिर साल 2023-24 में ज़ोरदार छलांग लगते हुए 2.46 लाख रूपए से ज्यादा तक आ पहुंची है.
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वहीं इस अवधि में छत्तीसगढ़ 12 हजार 170 रुपये, 55 हजार 177 रुपये और 1.47 लाख रुपये की छलांग लगा पाई है. वहीं इस मामले में झारखंड तीसरे नंबर पर है. साल 2001 में झारखंड की प्रतिव्यक्ति आय 11 हजार 34 रुपये थी. जिसके बाद अगले दस साल में ये बढ़कर 41 हजार 254 रुपये तक पहुंची. वहीं साल 2023 के आंकड़ों की मानें तो झारखंड की प्रतिव्यक्ति आय एक लाख पांच हजार 274 रुपये है.
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जिस तरह से उत्तराखंड अपनी नीतियों और फैसलों के बाद अब पर आगे बढ़ रहा है और अपनी अर्थ व्यवस्था को मज़बूत बना रहा है, वो दिन दूर नहीं जब उत्तराखंड देश का श्रेष्ठ राज्य बनने की दिशा में सबसे आगे निकल जाएगा.