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Modi चाहें तो Nitish और Naidu के बिना भी सरकार बना सकते है, ये है फॉर्मूला

PM Modi को नीतीश कुमार और चंद्रबाबू नायडू जैसे दो बड़े नेताओं के साथ सरकार बनानी पड़ेगी और ये बात तो आप भी जानते हैं कि अतीत में दोनों ही नेता मौका पाते ही मोदी का साथ छोड़ कर जा चुके हैं, अब ऐसे में सवाल ये है कि क्या पीएम मोदी के पास ऐसा कोई फॉर्मूला है, जिससे नीतीश और नायडू की जरूरत भी ना पड़े और मोदी तीसरी बार सरकार भी बना लें, तो इसका जवाब है। हां । मोदी के पास अभी भी एक ऐसा विकल्प है । जिसके दम पर नीतीश नायडू के बिना भी मोदी सरकार बना सकते हैं !

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दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश हिंदुस्तान में हुए चुनाव के नतीजों का ऐलान कर दिया गया है । और इस नतीजे के साथ ही एक बात और साफ हो गई है कि इस बार देश की जनता ने बीजेपी को नहीं । एनडीए गठबंधन को बहुमत दिया है । यानि इस बार मोदी को अपने दम पर नहीं। नीतीश कुमार और चंद्रबाबू नायडू जैसे दो बड़े नेताओं के साथ सरकार बनानी पड़ेगी। और ये बात तो आप भी जानते हैं कि दोनों ही नेताओं का अतीत कुछ खास नहीं रहा है । दोनों ही नेता मौका पाते ही मोदी का साथ छोड़ कर जा चुके हैं ।अब ऐसे में सवाल ये है कि क्या पीएम मोदी के पास ऐसा कोई फॉर्मूला है। जिससे नीतीश और नायडू की जरूरत भी ना पड़े ।और मोदी तीसरी बार सरकार भी बना लें ।तो इसका जवाब है ।हां ।मोदी के पास अभी भी एक ऐसा विकल्प है । जिसके दम पर नीतीश नायडू के बिना भी मोदी सरकार बना सकते हैं।




दरअसल ये बात तो आप भी जानते हैं कि इस बार के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को 240 सीटों पर ही जीत मिली है। यानि मोदी अकेले दम पर सरकार नहीं बना सकते हैं।उन्हें अपने पूरे पांच साल नीतीश के 12 सांसद और नायडू के 16 सांसदों के भरोसे रहना पड़ेगा।और अगर दोनों ही नेता किसी वजह से मोदी का साथ छोड़ देते हैं ।तो मोदी की टेंशन बढ़ जाएगी। क्योंकि NDA 265 पर आ जाएगा जो बहुमत के आंकड़े 272 से 7 सीटें कम हैं। तो ऐसे में मोदी के पास एक और विकल्प मौजूद रहेगा सरकार बनाने के लिए।  बस उन्हें निर्दलीय सांसदों को साधना पड़ेगा। वो भी उन सांसदों को। जो कभी एनडीए का हिस्सा रह चुके हों। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल ये है कि


कौन हैं वो निर्दलीय जो दे सकते हैं मोदी का साथ ?


सबसे पहले चलते हैं पंजाब। जहां बीजेपी ने साल 2014 और 2019 में चली मोदी लहर के बावजूद दो सीटों से आगे नहीं बढ़ पाई ।तो वहीं इस बार के लोकसभा चुनाव में तो बीजेपी का खाता भी नहीं खुला है ।लेकिन बीजेपी की पुरानी सहयोगी पार्टी शिरोमणि अकाली दल को जरूर एक सीट मिली है । भटिंडा से हरसिमिरत कौर बादल ने जीत दर्ज की है ।जो मोदी सरकार के दोनों कार्यकाल में केंद्रीय मंत्री भी रह चुकी हैं ।यानि बीजेपी के साथ उनका पुराना रिश्ता रहा है। ऐसे में पीएम मोदी अगर अकाली दल को मना लेते हैं तो अकाली दल का समर्थन पाने में मोदी को कोई दिक्कत नहीं होगी।

आंध्र प्रदेश

अब चलते हैं आंध्र प्रदेश की ओर ।जहां वैसे तो बीजेपी का चंद्रबाबू नायडू की पार्टी के साथ गठबंधन है जिसके पास 16 सांसद हैं ।लेकिन नायडू अगर मोदी को धोखा देते हैं तो बीजेपी पूर्व सीएम जगनमोहन रेड्डी से समर्थन मांग सकती है जिसके पास आंध्रा में चार सांसद हैं । क्योंकि इससे पहले भी जब जब संसद में मोदी मुश्किल में पड़े।जगनमोहन रेड्डी उनका साथ देते रहे हैं। ऐसे में रेड्डी से भी पीएम मोदी समर्थन मांग सकते हैं ।

राजस्थान

बात राजस्थान की करें तो यहां बीजेपी की सरकार है। लेकिन इसके बावजूद बीजेपी के खाते में 25 में से 14 सीटें ही आई हैं। तो वहीं सबसे बड़ी बात ये है कि नागौर सीट से एक बार फिर आरएलपी नेता हनुमान बेनीवाल ने जीत दर्ज की है ।और इससे भी बड़ी बात तो ये है कि हनुमान बेनीवाल भी उन सांसदों में हैं जो साल 2019 में बीजेपी के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ चुके हैं ।ऐसे में मोदी के एक इशारे पर हनुमान बेनीवाल भी मोदी का साथ दे सकते हैं ।

दमन दीव

अब चलते हैं दमन दीव की ओर ।गुजरात के पास स्थित इस छोटे से द्वीप में एक सीट से दमन दीव । जहां 2009 से बीजेपी नेता लल्लू भाई पटेल जीत हासिल करते आ रहे हैं । लेकिन इस बार दमन दीव की जनता ने बीजेपी को हरा दिया । यहां से निर्दलीय उम्मीदवार उमेश भाई बाबू भाई पटेल ने जीत हासिल की है। तो वहीं बात समर्थन की करें तो। इस सवाल पर सांसद उमेश भाई बाबू ने कहा ।" मैंने अभी ये तय नहीं किया है, लेकिन फैसला जो भी होगा वो दमन और दीव की जनता के हित को ध्यान में रखकर लिया जाएगा, मैं लोगों से बात करूंगा फिर तय करूंगा किसको समर्थन देना है"।

यानि बीजेपी अगर कोशिश करती है तो उमेश भाई बाबू भी मोदी सरकार को समर्थन दे सकते हैं । ऐसे में नीतीश और नायडू अगर मोदी का साथ छोड़ भी देते हैं तो इन सात निर्दलीय सांसदों को साध कर पीएम मोदी सरकार बना सकते हैं ।वैसे आपको क्या लगता है ।पीएम मोदी को अपने सहयोगी नीतीश और नायडू पर भरोसा करना चाहिए। 
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