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चीन ने भारत को दिखाई आंख तो भुगतना पड़ेगा बुरा अंजाम, LAC पर बनने जा रहा "अदृश्य किला"

केंद्र की मोदी सरकार ने चीन को खुली चेतावनी दे दी है कि अगर "छेड़ोगे तो छोड़ेंगे" नहीं। देश की राजधानी दिल्ली से बीजिंग में बैठे PLA के फौजी जनरलों और उनके आका शी जिनपिंग को भी क्लियर कट मैसेज पहुंचा दिया गया है कि डोकलाम जैसा सोचा तो "रण" होगा। भारत हिमालय की चोटियों पर "अदृश्य किला" बनाने जा रही है।

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केंद्र की मोदी सरकार ने चीन की हालात खराब कर दी है। दोनों देशों के बीच LAC बॉर्डर पर समझौते के बाद माहौल पूरी तरीके से बदल चुका है। दोनों देशों के रिश्तों में सुधार है। लेकिन भारत के मन में कहीं ना कहीं इस बात का डर हमेशा से रहा है कि चीन कभी भी पीठ पीछे खंजर घोप सकता है। समझौते और रिश्ते अच्छे होने के बावजूद कई बार चीन ने ऐसी हरकत की है जिसकी वजह से भारत इस मुल्क पर पूरी तरीके से विश्वास नहीं कर सकता। ऐसे में केंद्र की मोदी सरकार हिमालय की चोटियों पर कुछ ऐसा करने जा रही है। जहां से LAC पार चीन ने अगर कुछ भी गड़बड़ करने की कोशिश की। तो उसकी आंखें नोच ली जाएगी। भारत हिमालय की चोटियों पर "अदृश्य किला" बनाने जा रहा है।  

केंद्र की मोदी सरकार ने कहा "छेड़ोगे तो छोड़ेंगे नहीं" 

बता दें कि केंद्र की मोदी सरकार ने चीन को खुली चेतावनी दे दी है कि अगर "छेड़ोगे तो छोड़ेंगे" नहीं। देश की राजधानी दिल्ली से बीजिंग में बैठे PLA के फौजी जनरलों और उनके आका शी जिनपिंग को भी क्लियर कट मैसेज पहुंचा दिया गया है कि डोकलाम जैसा सोचा तो "रण" होगा। 1962 जैसी हरकत करने की कोशिश की। तो सब कुछ धुंआ- धुंआ हो जाएगा। चीन अब भारत के साथ पूरी तरीके से शांतिपूर्वक माहौल बनाने की कोशिश में है। लेकिन उसकी पुरानी हरकतों को देखते हुए भारत पहले से अलर्ट मोड पर है। 

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मोदी सरकार हिमालय की चोटियों पर बना रही "खुफिया टनल" 

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बता दें कि केंद्र की मोदी सरकार और प्रशासनिक अधिकारियों के दिमाग में लंबे समय से इस बात को लेकर प्लान चल रहा था कि लद्दाख में केला दर्रे से होते हुए एक लंबी टनल बनाई जाए। इसको लेकर केंद्र की मोदी सरकार और रक्षा मंत्रालय लंबे समय से तैयारियों में थी। सरकार इस दिशा में काफी पहले से काम करना शुरू कर चुकी थी। जानकारी के लिए बता दें कि लद्दाख के केला दर्रे से होते हुए करीब 7 से 8 किलोमीटर लंबी ट्विन-ट्यूब सुरंग बनाने के प्रस्ताव पर मंथन हो चुका है। इस सुरंग की ऊंचाई समुद्र तल से 18,600 फिट से ज्यादा होगी। इसको लेकर लद्दाख प्रशासन को पहले से ही प्रस्ताव भेज दिया गया है। इस मिशन में कुल 6000 करोड़ रूपये का खर्च आएगा। यहां काम शुरू होने के बाद लद्दाख के पास चीन की अतिक्रमण वाली दुकान भी बंद हो जाएगी। इसके बनने से भारतीय सेना लेह से पैंगोंग झील तक पलक झपकते ही पहुंच जाएगी। गृह मंत्रालय का पेपर वर्क हो चुका है। इस प्रोजेक्ट पर फाइनल मुहर भी लग चुकी है। 

इस टनल से भारत को क्या फायदा होगा? 

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लद्दाख में इस टनल को बनाने का मकसद सातों दिन और 24 घंटे कनेक्टिविटी बढ़ाना है। इसके बनने से सेना की क्षमता बढ़ेगी और आम जनता के लिए घूमना फिरना आसान हो जाएगा। सफर के दौरान ज्यादा समय नहीं लगेगा। यह एक रणनीतिक रास्ता भी होगा। हालांकि सेना की सहूलियत और सुरक्षा जरूरतों के हिसाब से आने-जाने की परमिशन होगी। इस जगह को सेना अपने तरीके से कंट्रोल करेगा। वही 2 साल पहले लद्दाख प्रशासन ने नई सुरंग की जरूरत को बताते हुए एक रोडमैप तैयार किया था। 

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कुल मिलाकर देखा जाए। तो भारत अब कहीं भी किसी भी तरीके से चीन बॉर्डर पर कोई भी कोताही नहीं बरतेगा। भारत चीन की हर एक गलती का मुंहतोड़ जवाब देगा। 

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