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'कोई भी सरकारी पद नहीं स्वीकार करूंगा...', CJI बी. आर. गवई ने बताया अपना रिटायरमेंट प्लान, आखिर किस क्षेत्र में काम करने की इच्छा जताई?

भारत के मुख्य न्यायाधीश बी. आर. गवई ने रिटायरमेंट से 6 महीने पहले अमरावती के अपने पैतृक गांव दारापुर में एक कार्यक्रम के दौरान कहा है कि 'मैंने कई मौकों पर इस बात को स्पष्ट कर दिया है कि मैं 24 नवंबर के बाद किसी भी तरह का कोई भी सरकारी पद स्वीकार नहीं करूंगा, बल्कि मैं परामर्श और मध्यस्थता के कार्य में जुड़ा रहूंगा.'

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चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया बी. आर.  गवई ने 6 महीने पहले ही अपने रिटायरमेंट प्लान को लेकर बड़ी घोषणा की है. उन्होंने कहा है कि वह किसी भी तरह का कोई भी सरकारी पद स्वीकार नहीं करेंगे, बल्कि वह एक खास क्षेत्र में काम करेंगे. बता दें कि वह 23 नवंबर 2025 को रिटायर होने वाले हैं. उनका यह बयान महाराष्ट्र के अमरावती जिले में लेट टी. आर. गिल्डा मेमोरियल ई-लाइब्रेरी के उद्घाटन के दौरान आया है. 

भारत के मुख्य न्यायाधीश ने बताया अपना रिटायरमेंट प्लान 

भारत के मुख्य न्यायाधीश बी. आर. गवई ने रिटायरमेंट से 6 महीने पहले अमरावती के अपने पैतृक गांव दारापुर में एक कार्यक्रम के दौरान कहा है कि 'मैंने कई मौकों पर इस बात को स्पष्ट कर दिया है कि मैं 24 नवंबर के बाद किसी भी तरह का कोई भी सरकारी पद स्वीकार नहीं करूंगा, बल्कि मैं परामर्श और मध्यस्थता के कार्य में जुड़ा रहूंगा.' इसके अलावा उन्होंने यह भी बताया कि वह रिटायरमेंट के बाद अधिकांश समय दारापुर, अमरावती और नागपुर में बिताने की योजना बना रहे हैं. 

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'अपने पिता को पुष्पांजलि अर्पित की'

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बी. आर. गवई शुक्रवार को अपने पैतृक गांव दारापुर पहुंचे, जहां उन्होंने अपने पिता केरल और बिहार के पूर्व राज्यपाल रहे आर. एस. गवई की स्मृति पर पुष्पांजलि अर्पित की. इसके अलावा उनकी पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में भाग लेते हुए अपना संबोधन दिया. उनके स्वागत में काफी ज्यादा भीड़ देखने को मिली. अपने पैतृक गांव में उन्होंने पिताजी के नाम पर बने एक भव्य प्रवेश द्वार की भी आधारशिला रखी. 

'चुनाव लड़ना नैतिक चिंताओं को जन्म देता है'

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CJI ने न्यायिक स्वतंत्रता पर जोर देते हुए कहा कि 'रिटायरमेंट के बाद वह किसी भी तरह का कोई भी सरकारी पद स्वीकार नहीं करेंगे, किसी भी तरह का चुनाव लड़ना नैतिक चिताओं को जन्म देता है. इससे जनता का न्यायपालिका पर विश्वास कमजोर होता है.' उन्होंने आगे कहा कि उनके कई अन्य सहयोगियों ने भी सार्वजनिक रूप से प्रतिज्ञा ली है कि वह रिटायरमेंट के बाद किसी भी तरह की सरकारी भूमिका स्वीकार नहीं करेंगे, ताकि न्यायपालिका का विश्वास और स्वतंत्रता बनी रहे.

'युवा वकीलों को दी खास सलाह'

उन्होंने युवा वकीलों को सलाह देते हुए कहा कि 'कभी भी अपने पद और प्रतिष्ठा का गलत इस्तेमाल न करें, न ही उसे सिर पर चढ़ने दें. वकील और जज समान साझेदार हैं. हमें अपनी शक्ति का उपयोग लोगों की सेवा के लिए करना चाहिए, इसे अपने अहंकार का हिस्सा नहीं बनने देना चाहिए.'

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भारत के 52वें मुख्य न्यायाधीश हैं 

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बता दें कि CJI गवई भारत के 52वें मुख्य न्यायाधीश हैं. 14 मई 2025 को उन्हें यह पद मिला. उनका कार्यकाल 6 महीने का है और वह 23 नवंबर 2025 को रिटायर हो जाएंगे. गवई देश के पहले बौद्ध और दूसरे दलित CJI हैं.

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