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'मैं पकड़ा गया और मेरी पिटाई हुई...', अपने पहले आंदोलन की कहानी सुनाते हुए बोले शिवराज सिंह चौहान, कहा - मेरे चाचा लाठी लेकर निकले

मध्य-प्रदेश के 4 बार के मुख्यमंत्री और वर्तमान केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने बचपन और जीवन के पहले आंदोलन का किस्सा सुनाया. इस दौरान उन्होंने बताया कि कैसे उनका यह आंदोलन असफल हुआ था और मजदूरों की मजदूरी को बढ़ाने को लेकर चाचा ने लाठी से पिटाई की थी.

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मध्य-प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक इंटरव्यू में अपने जीवन के पहले आंदोलन की कहानी सुनाई. इस दौरान उन्होंने बताया कि जब मजदूरों की समस्या को उन्होंने उठाने का प्रयास किया, तो उस दौरान कैसे उनकी पिटाई हुई थी. एक किसान परिवार में जन्में शिवराज सिंह चौहान मध्य-प्रदेश के 4 बार मुख्यमंत्री रह चुके हैं. 

'पहले आंदोलन में घर में पिटाई हुई थी'

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक इंटरव्यू के दौरान अपने बचपन का किस्सा सुनाते हुए कहा कि उन्होंने छोटी सी उम्र में मजदूरों की समस्या को उठाने का प्रयास किया था, लेकिन उनके जीवन के इस पहले आंदोलन में ही पिटाई खानी पड़ी थी. उन्होंने बताया कि जिन मजदूरों के लिए वह आंदोलन कर रहे थे, वह भाग खड़े हुए और उनके चाचा ने लाठी से उनकी पिटाई कर डाली. 

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'मजदूरों को देखकर बहुत कष्ट होता था'

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एक किसान परिवार में जन्मे मामा शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि 'उनके यहां हरवाहे और चरवाहे काम करते थे. मैं उन्हें जब संघर्ष करते देखता था, तो बहुत दुख होता था. वह मेहनत भी करते थे और डांट भी सुनते थे. इतना सब करने के बावजूद उन्हें मजदूरी काफी कम मिलती थी. मजदूर देर शाम तक काम करते थे और मजदूरी के नाम पर उन्हें ढाई पाई मिलते थे. पहले मजदूरी में पैसे नहीं मिलते थे, बल्कि बर्तन से नापकर अनाज दिया जाता था. इसे ही पाई कहा जाता था. मैं जो किस्सा बता रहा हूं. वह करीब 60 साल पुराना है.'

'एक चरवाहा बच्चा कांपता हुआ आता था'

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अपने बचपन का किस्सा सुनाते हुए शिवराज सिंह चौहान ने आगे बताया कि 'एक चरवाहा का बच्चा था. वह सर्दी के दिनों में कांपता हुआ आता था. उसके गालों में दरारें पड़ी रहती थी. 1 दिन वह काफी देर से आया, जिस पर मेरे चाचा ने डांट लगाई. दादी मुझे कहती थी कि रजाई ओढ़ लो काफी ज्यादा ठंड है. उस दौरान मन में वेदना थी कि एक तरफ मुझे दादी रजाई ओढ़ने के लिए कह रही हैं, दूसरी तरफ वह कांप रहा है और उसे डांट पड़ रही है.'

'वह सुबह से रात तक काम करते थे'

शिवराज सिंह चौहान ने अपने मन की पीड़ा को व्यक्त करते हुए बताया कि 'वह सुबह से रात तक काम करते थे और उन्हें सिर्फ ढाई पाई मिलती थी. मेरा मानना था कि मजदूरी कम है ज्यादा होनी चाहिए और ड्यूटी का घंटा भी तय होना चाहिए.' अपने पहले आंदोलन का किस्सा सुनाते हुए शिवराज सिंह चौहान ने आगे कहा कि 'उस दौरान मैं पढ़ने लगा था और मुझे भोपाल भेज दिया गया. मुझे लगा कि दूसरों के लिए अच्छा करें, लेकिन उस दौरान मेरे मन में एक चीज आई कि मजदूरी ठीक मिलनी चाहिए. उस दौरान मैं सातवीं क्लास में था और गर्मी की छुट्टी में मैं भोपाल से 100 किलोमीटर दूर अपने घर आया था.'

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'25-26 लोगों के साथ हमने जुलूस निकाला'

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केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने आगे बताया कि मैं जब गांव पहुंचा, तो मैंने गंभीरता से इस मामले को लिया और सभी मजदूरों को एक मंदिर पर बुलाया. मैंने उस दौरान कहा कि इन लोगों की मजदूरी बढ़नी चाहिए और इसके लिए आंदोलन होना चाहिए. मैंने उनसे कहा कि अगर काम तुम बंद कर दोगे, तो फिर कौन करेगा. मजबूरी में हमें मजदूरी करानी पड़ेगी. इस दौरान हमने एक पेट्रोमैक्स का इंतजाम किया और उसको जलाने के बाद एक मजदूर ने उसे सिर पर लिया. इस दौरान 25- 26 लोगों के साथ हमने जुलूस निकाला. मैंने मजदूरों से कहा कि काम बंद नहीं करोगे और ढाई पाई के बदले पांच पाई लोगे. इस दौरान जैसे जुलूस मेरे घर के पास आया. उसी दौरान मेरे चाचा लाठी लेकर निकले और उन्होंने कहा कि आओ मैं तुम्हें पांच पाई देता हूं. उनके चिल्लाने से सभी मजदूर भाग गए और मैं अकेला पड़ गया. उसके बाद मेरी जमकर पिटाई हुई और मुझे भोपाल भेज दिया गया. मेरे जीवन का पहला आंदोलन असफल हुआ और मन में एक दर्द सा रह गया कि जो भी हुआ वह गलत है.' 

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