Advertisement
‘बुर्का पहनकर भागना न पड़ जाए…’, हिजाब वाली प्रधानमंत्री के बयान पर ओवैसी को कपिल मिश्रा का पलटवार
महाराष्ट्र में नगर निगम चुनावों से पहले ओवैसी के हिजाब वाली महिला के प्रधानमंत्री बनने वाले बयान पर सियासत तेज हुई. इस पर कपिल मिश्रा ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए पलटवार किया.
Advertisement
महाराष्ट्र में 15 जनवरी को होने वाले नगर निगम चुनावों से पहले सियासी बयानबाजी तेज हो गई है. ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के एक बयान ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है. ओवैसी ने चुनावी रैली के दौरान कहा था कि एक दिन हिजाब पहनने वाली महिला भारत की प्रधानमंत्री बनेगी. ओवैसी के इस बयान पर दिल्ली सरकार में मंत्री और बीजेपी नेता कपिल मिश्रा ने कहा कि ऐसा ना हो कि एक दिन ओवैसी को ही बुर्का पहनकर ना भागना पड़ जाए.
ओवैसी के बयान पर कपिल मिश्रा का पलटवार
ओवैसी के इस बयान को उन्होंने संविधान और समानता के नजरिए से जोड़कर पेश किया. उनका कहना था कि भारत में हर नागरिक को आगे बढ़ने का अधिकार है, चाहे उसकी पहचान या पहनावा कुछ भी हो. यह बयान सोलापुर में एक चुनावी सभा के दौरान दिया गया था, जहां ओवैसी ने अल्पसंख्यक अधिकारों और संवैधानिक मूल्यों पर जोर दिया. ओवैसी की इस टिप्पणी पर दिल्ली सरकार में मंत्री कपिल मिश्रा ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. मीडिया से बातचीत में कपिल मिश्रा ने कहा कि ओवैसी पहले अपने समाज में महिलाओं की स्थिति सुधारें. उन्होंने आरोप लगाया कि महिलाओं को घर से बाहर निकलने और पढ़ाई करने से रोका जाता है. कपिल मिश्रा ने कहा कि ट्रिपल तलाक और हलाला जैसी प्रथाओं के कारण महिलाओं को दबाया जाता रहा है.
Advertisement
ईरान जैसे हालात बनाएं हुए हैं: कपिल मिश्रा
Advertisement
कपिल मिश्रा ने आगे कहा कि अगर महिलाओं पर ज्यादा दबाव डाला गया, तो हालात ईरान जैसे हो सकते हैं. उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि एक दिन ऐसा भी आ सकता है, जब ओवैसी को ही बुर्का पहनकर भागना पड़े. एक अन्य कार्यक्रम में भी मिश्रा ने इसी तरह का बयान देते हुए कहा कि अगर महिलाएं जाग गईं और उनके अधिकारों को लेकर आवाज उठाने लगीं, तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं. इस पूरे विवाद में ईरान का जिक्र भी बार बार सामने आ रहा है. गौरतलब है कि ईरान में कट्टरपंथी इस्लामिक शासन के खिलाफ बीते कुछ समय से राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं. इन प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा में 100 से ज्यादा लोगों की मौत की खबरें सामने आई हैं. ईरान के हालात पर अमेरिका समेत कई देश नजर बनाए हुए हैं.
यह भी पढ़ें
बताते चलें कि राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ओवैसी का बयान जहां समानता और प्रतिनिधित्व की बात करता है, वहीं कपिल मिश्रा की प्रतिक्रिया इसे सामाजिक और धार्मिक बहस की दिशा में ले जाती है. चुनावी माहौल में ऐसे बयान मतदाताओं को प्रभावित करने के साथ साथ राजनीतिक ध्रुवीकरण को भी तेज कर सकते हैं. आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है, क्योंकि चुनाव नजदीक हैं और बयानबाजी का दौर थमने वाला नहीं दिख रहा है.