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कैसे चुना जाएगा नया उपराष्ट्रपति? क्या है खास और कैसे है बाकी चुनावों से अलग? जानिए वोटिंग से लेकर जीत के फॉर्मूले तक सबकुछ...

अब देश में नया उपराष्ट्रपति कौन होगा और उसे कैसे चुना जाएगा ,इसको लेकर लोगों के मन में कई सवाल हैं....

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Vice President Dhankhar Resigns: भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सोमवार की शाम अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया. उन्होंने कहा कि वे अब अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखना चाहते हैं, इसलिए वे उपराष्ट्रपति पद छोड़ रहे हैं. उन्होंने यह जानकारी एक चिट्ठी के जरिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को दी. चूंकि उनका कार्यकाल अभी खत्म नहीं हुआ था, इसलिए अब देश में नया उपराष्ट्रपति कौन होगा और उसे कैसे चुना जाएगा, इसको लेकर लोगों के मन में कई सवाल हैं. आइए जानते हैं उपराष्ट्रपति का चुनाव कैसे होता है....

उपराष्ट्रपति को कौन चुनता है?

भारत का उपराष्ट्रपति संसद के सांसदों द्वारा चुना जाता है. इसमें लोकसभा के 543 सदस्य, राज्यसभा के 233 चुने हुए सदस्य, और राज्यसभा के 12 मनोनीत सदस्य शामिल होते हैं. यानी कुल मिलाकर लगभग 788 सांसद इस चुनाव में वोट डालते हैं. जब चुनाव आयोग चुनाव की तारीख तय करता है, तब वह यह देखता है कि उस समय संसद में कितने सांसद मौजूद हैं और उन्हीं के हिसाब से चुनाव कराया जाता है.

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चुनाव कैसे होता है?

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उपराष्ट्रपति का चुनाव एक खास प्रक्रिया से होता है जिसे "सिंगल ट्रांसफरेबल वोट सिस्टम" कहा जाता है. इसका मतलब यह है कि हर वोटर (सांसद) को उम्मीदवारों की वरीयता (पसंद) के आधार पर वोट देना होता है. जैसे कि उसे किसे पहली पसंद देना है, किसे दूसरी, और इसी तरह. यह बैलेट पेपर पर रोमन अंकों (I, II, III) में लिखा जाता है. यह वोटिंग पूरी तरह गुप्त (सीक्रेट) होती है और इसके लिए चुनाव आयोग एक खास पेन देता है जिसका ही इस्तेमाल करना होता है.

वोटों की गिनती कैसे होती है?

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वोटों की गिनती भी थोड़ी अलग होती है. सबसे पहले देखा जाता है कि किस उम्मीदवार को पहली पसंद के कितने वोट मिले. सभी पहली पसंद के वोटों को जोड़कर एक टोटल निकाला जाता है, फिर उसे दो से भाग दिया जाता है और उसमें एक जोड़ा जाता है. जो संख्या आती है, वही जीतने के लिए जरूरी वोटों का आंकड़ा होता है.

अगर किसी को इतनी संख्या में वोट मिल जाते हैं तो वह सीधा विजेता बन जाता है. अगर नहीं, तो जिस उम्मीदवार को सबसे कम वोट मिले होते हैं, उसे हटा दिया जाता है. फिर उसके वोटों में दूसरी पसंद देखी जाती है और वे दूसरे उम्मीदवारों में बांटे जाते हैं। यह प्रक्रिया तब तक दोहराई जाती है जब तक किसी एक को जीत के लिए जरूरी संख्या में वोट न मिल जाएं.

उपराष्ट्रपति का उम्मीदवार कौन बन सकता है?

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अगर कोई व्यक्ति उपराष्ट्रपति बनना चाहता है तो उसे कम से कम 20 सांसदों का समर्थन और 20 सांसदों का प्रस्ताव चाहिए होता है. इसके साथ ही उसे 15,000 रुपये की जमानत राशि भी जमा करनी होती है. जब कोई व्यक्ति नामांकन करता है, तब निर्वाचन अधिकारी उसके कागजों की जांच करता है, और सही पाए गए उम्मीदवारों के नाम बैलेट में डाले जाते हैं.

उपराष्ट्रपति का काम क्या होता है?

भारत में उपराष्ट्रपति का सबसे बड़ा काम होता है राज्यसभा के सभापति के रूप में काम करना. यानी वे राज्यसभा की बैठकें चलाते हैं और वहां की कार्यवाही को संभालते हैं. इसके अलावा, अगर किसी वजह से राष्ट्रपति का पद खाली हो जाए जैसे उनकी मृत्यु हो जाए, इस्तीफा दे दें या पद संभालने में अक्षम हों  तो उस दौरान उपराष्ट्रपति कार्यवाहक राष्ट्रपति बनते हैं और राष्ट्रपति की जिम्मेदारी संभालते हैं.

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राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनाव में क्या फर्क होता है?

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राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनाव में सबसे बड़ा फर्क यह है कि राष्ट्रपति के चुनाव में सांसदों के साथ राज्यों के विधायक भी वोट डालते हैं, जबकि उपराष्ट्रपति के चुनाव में सिर्फ संसद के सदस्य वोट देते हैं. इसके अलावा, राष्ट्रपति चुनाव में मनोनीत सदस्य वोट नहीं डाल सकते, जबकि उपराष्ट्रपति चुनाव में वे भी हिस्सा ले सकते हैं.

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