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जाति या आर्थिक आधार पर, कैसे मिले Reservation, सुनिये Khan Sir का जवाब ?

सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या आरक्षण खत्म कर देना चाहिए या फिर जाति नहीं आर्थिक आधार पर आरक्षण दिया जाना चाहिए, पटना वाले खान सर आरक्षण को लेकर जो जवाब दिया है सुनकर आप भी दंग रह जाएंगे !

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देश की राजनीति में आरक्षण का मुद्दा कोई नई बात नहीं है। जब जब चुनाव होता है। आरक्षण को लेकर माहौल जरूर गरम होता है। कभी देश से आरक्षण खत्म करने की बात होती है। तो कभी देश में आर्थिक आधार पर आरक्षण देने की मांग उठती है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या आरक्षण खत्म कर देना चाहिए। या फिर जाति नहीं। आर्थिक आधार पर आरक्षण दिया जाना चाहिए। पटना वाले खान सर आरक्षण को लेकर जो जवाब दिया है।  सुनकर आप भी दंग रह जाएंगे।


आरक्षण पर बात करने से पहले आपको बता दें महात्मा गांधी ने ‘हरिजन’ के 12 दिसंबर 1936 के संस्करण में लिखा था ‘धर्म के आधार पर दलित समाज को आरक्षण देना अनुचित होगा, आरक्षण का धर्म से कुछ लेना-देना नहीं है, सरकारी मदद केवल उन्हीं लोगों को मिलनी चाहिए, जो सामाजिक स्तर पर पिछड़ा हुआ हो’
तो वहीं संविधान निर्माता भीमराव अंबेडकर ने खुद संविधान बनाते वक्त कहा था कि।

"10 साल में यह समीक्षा हो कि जिन्हें आरक्षण दिया गया, क्या उनकी स्थिति में कोई सुधार हुआ या नहीं? यदि आरक्षण से किसी वर्ग का विकास हो जाता है तो उसके आगे की पीढ़ी को आरक्षण का लाभ नहीं देना चाहिए क्योंकि आरक्षण का मतलब बैसाखी नहीं है, जिसके सहारे पूरी जिंदगी काट दी जाए, यह विकसित होने का एक मात्र अधिकार है "

भीम राव अंबेडकर ने खुद ये बात कही थी कि आरक्षण का मतलब बैसाखी नहीं है।आरक्षण का फायदा उठाने वाले जिन लोगों की आर्थिक स्थिति में सुधार हो चुका है। उन्हें आरक्षण का लाभ नहीं देना चाहिए। कुछ इसी तरह की टिप्पणी कुछ ही महीनों पहले देश की सबसे बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट ने की थी। और एससी एसटी के आरक्षण में भी क्रीमीलेयर की व्यवस्था लागू करने की जरूरत है।ऐसे में सबसे बड़ा सवाल ये है कि  "क्या अब वक्त आ गया है कि देश में आर्थिक आरक्षण लागू करना चाहिए या फिर जाति आधारित आरक्षण बरकरार रहना चाहिए ?

इस मुद्दे पर नेताओें के साथ देश की जनता की राय तो अलग अलग हो सकती है। लेकिन छात्रों को पढ़ाने वाले देश के मशहूर टीचर खान सर आखिर आरक्षण को लेकर क्या सोचते हैं।अब जरा ये भी जान लीजिये।

बात आर्थिक आधार पर आरक्षण देने की आई तो खान सर ने ऐसी मांग करने वालों से दो टूक कह दिया कि अगर किसी को लगता है कि आरक्षण खराब है या फिर आरक्षण से किसी को लाभ मिलता है तो ऐसे लोग अपनी जाति उसको दे दे और उसका आरक्षण ले ले। तब समझ आएगा आरक्षण का लाभ क्या होता है। वैसे खान सर की बात से आप कितना सहमत हैं। क्या वाकई देश में जाति आधारित आरक्षण बरकरार रहना चाहिए।  या फिर आर्थिक आधार पर आरक्षण देना चाहिए। 



 
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