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सिर्फ 2 साल में Pushkar Singh Dhami ने कैसे Uttarakhand को बदला, जानिए कड़े और बड़े फैसले !

पुष्कर सिंह धामी ने अपने कुछ फैसलों से उत्तराखंड में कई बदलाव किए हैं। एक-एक फैसलों ने उत्तराखंड के नाम को इतिहास के पन्नों में दर्ज करा दिया है, और ये सब कुछ धामी सरकार के सिर्फ दो सालों में हुआ है। इस रिपोर्ट में उन एक-एक फैसलों को विस्तार से जानिए।

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पुष्कर सिंह धामी ने अपने कुछ फैसलों से उत्तराखंड में कई बदलाव किए हैं। एक-एक फैसलों ने उत्तराखंड के नाम को इतिहास के पन्नों में दर्ज करा दिया है, और ये सब कुछ धामी सरकार के सिर्फ दो सालों में हुआ है। इस रिपोर्ट में उन एक-एक फैसलों को विस्तार से जानिए। 


सिर्फ दो साल ।कहने को वैसे तो दो साल का मतलब होता है सिर्फ 730 दिन। लेकिन इसी सात सौ तीस दिन में किसी राज्य की शक्ल-ओ-सूरत को कैसे बदला जा सकता है। इसके शानदार उदाहरण हैं, पुष्कर सिंह धामी। कैसे कम दिन में किसी राज्य में इतिहास लिखा जा सकता है, इसके उदाहरण हैं धामी। और कैसे अपनी सोच से दूरगामी निर्णय लेकर लंबी लकीर खींचने का सार्थक प्रयास किया जा सकता है। इसके उदाहऱण हैं धामी। 

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दो साल का कार्यकाल पुष्कर सिंह धामी का पूरा हो चुका है। और दो साल का वक्त बीतते ही, इस पर चर्चा शुरू हुई कि, धामी सरकार ने जो वादे और दावे किए थे, क्या वो धरातल पर दिख रहे हैं या नहीं ? 


तो एक वाक्य में इसे समझिए कि ।धामी के कामों की सूची बहुत लंबी है। मतलब पूरी लिस्ट जानने के लिए धैर्य से इसे सुनना पड़ेगा। 

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पुष्कर सिंह धामी ने खुद तो अपनी सरकार की कहानी बताई उसके बाद हमने भी एक-एक करके पड़ताल की। और जाना कि आखिर पिछले दो साल में उत्तराखंड में धामी की सरकार ने कौन-कौन से बड़े फैसले किए हैं।

  

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 सिर्फ दो साल और बड़े कमाल !


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1. समान नागरिक संहिता (UCC)

2. नकल विरोधी कानून 

3. सख्त धर्मांतरण कानून 

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4. अंत्योदय परिवार को साल में 3 गैस सिलेंडर मुफ्त 

5. स्थानीय महिलाओं को सरकारी नौकरी में 30% आरक्षण

6. राज्य आंदोलनकारियों को 10% क्षैतिज आरक्षण

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ऐसा नहीं है कि धामी सरकार के सामने कोई चुनौती नहीं थी या अभी नहीं है। लेकिन इसे दरकिनार कर धामी सरकार ने इतिहास के पन्नों में कई फैसलों को दर्ज कराया है। ये भी सच है कि कई बार धामी सरकार को मुश्किलों से गुजरना पड़ा है। लेकिन एक-एक करके सारे सवालों का जवाब धामी सरकार ने सबके सामने रख दिया। जिसका नतीजा ये निकला कि बीजेपी पहले की तुलना में उत्तराखंड में अब ज्यादा मजबूत हो गई है। 

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अब थोड़ा सा पीछे चलते हैं, जब पुष्कर सिंह धामी को पहली बार उत्तराखंड का मुख्यमंत्री बनाया गया था। ये सच है कि उस समय धामी के कार्यकाल को बहुत कम वक्त मिला था। लेकिन इस कम वक्त में भी उन्होंने कमाल का काम किया। जिसकी तारीफ उत्तराखंड से लेकर दिल्ली तक की गई। फिर उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव का वक्त आया और बीजेपी ने कमाल कर दिया। फिर से राज्य में बीजेपी ही सरकार बनाई। और उसके बाद एक के बाद एक कई फैसलों से इतिहास रच दिया है। 


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धामी जैसे ही दूसरी बार उत्तराखंड के मुख्यमंत्री बने। उसके बाद पहली कैबिनेट में धर्मांतरण कानून लागू किया गया। फिर सबसे बड़ा फैसला था नकल माफियाओं को लेकर। चुकि नकल माफियाओं की वजह से धामी सरकार पर सवाल भी खड़े हुए थे। तो इस पर नकेल कसने के लिए कमाल के फैसले लिए गए। 



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धामी के ऐतिहासिक फैसले !


देश का सबसे कड़ा नकल विरोधी कानून  

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आजीवन कारावास या 10 साल की सजा 

नकल माफियाओं को 10 करोड़ तक जुर्माना

नकल माफियाओं की संपत्ति भी जब्त हो सकती है 

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इतना ही नहीं, धामी सरकार ने इस एक्ट में इस बात का भी ख्याल रखा है कि अगर कोई छात्र भर्ती परीक्षाओँ में पेपर लीक करते हुए पकड़ा जाता है या फिर नकल के जरिए परीक्षा पास करता है तो उसके ऊपर दस साल तक का बैन लगाया जा सकता है।

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यूसीसी को लेकर भी धामी सरकार की खूब तारीफ हुई है। इसे भी ऐतिहासिक फैसलों की लिस्ट में रखा गया है। इसे लागू होने के ठीक बाद मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि “प्रदेश में समान नागरिक संहिता कानून लागू होने से सभी नागरिकों को समान अधिकार मिलेगा। महिलाओं पर हो रहे उत्पीड़न में भी काफी कमी आएगी। यह कानून महिलाओं के विकास के लिए है इस फैसले ने पूरे देश में एक मैसेज दिया। साथ ही यूसीसी को धामी सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक माना गया। विधानसभा चुनाव से पहले उत्तराखंड के लोगों से धामी ने यूसीसी को लेकर वादा किया था। और जैसे ही धामी की सरकार बनी, इसे पूरा किया गया। और ये फैसला पूरे देश के लिए नजीर बन गया “। 


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इस एक फैसले से पुष्कर सिंह धामी की छवि पूरे देश में बदल गई। पूरे देश में धामी ने अपनी हिंदुत्व वाली छवि को एक नई ऊंचाई दी।  

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कहते हैं कि सरकार का असल काम वही होता है, जिसकी चर्चा आम लोगों के बीच हो। और इस बात को धामी सरकार अच्छे से जानती है। शायद तभी धामी सरकार ने जितने फैसले लिए हैं। उसकी चर्चा उत्तराखंड के आम लोगों के बीच भी होती है। 


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इसी दौरान, युवाओं के लिए रोजगार सृजन के मामले में भी उत्तराखंड में बड़े स्तर पर काम शुरू किया गया। इसके साथ-साथ सीएम धामी कई चुनौतियों से भी पार पाना चाहते हैं। ताकि भविष्य में उत्तराखंड की चर्चा अलग स्तर पर हो। इसीलिए, सीएम धामी ने साल 2025 तक उत्तराखंड को देश का सर्वाधिक विकसित राज्य बनाने का लक्ष्य रखा है। और इसके लिए सरकार तेजी से काम कर रही है। इस सबके साथ ही धामी की छवि और कद दोनों बढ़ते जा रहे हैं। 

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