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पाकिस्तान से युद्ध के बीच भारत के पास कितना है विदेशी मुद्रा भंडार, RBI रिपोर्ट में खुलासा

भारत-पाकिस्तान तनाव के बीच रिजर्व बैंक ने विदेशी मुद्रा भंडार के ताज़ा आंकड़े जारी किए हैं. भंडार में 2.06 अरब डॉलर की गिरावट आई है, लेकिन देश के पास अब भी 686.06 अरब डॉलर का स्टॉक मौजूद है. जानिए क्या यह भंडार भारत को युद्ध जैसी आपात स्थिति में बचाने के लिए पर्याप्त है.

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देश की सीमाओं पर तनाव चरम पर है. पाकिस्तान के साथ हालात ऐसे बन चुके हैं कि कभी भी युद्ध शुरू हो सकता है. सीमा पर ड्रोन हमलों की घटनाएं, आतंकी गतिविधियों में इजाफा और अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच भारत को हर मोर्चे पर सतर्क रहना पड़ रहा है. लेकिन जब गोलियों की आवाज़ गूंजती है, तब सबसे जरूरी सवाल होता है – क्या देश की आर्थिक रीढ़ इतनी मज़बूत है कि वह युद्ध की मार सह सके? इस सवाल का जवाब हमें भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी किए गए विदेशी मुद्रा भंडार के आंकड़ों में मिलता है.

आरबीआई ने क्या बताया?

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने शुक्रवार को बताया कि 2 मई को समाप्त सप्ताह में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 2.06 अरब डॉलर घटकर 686.06 अरब डॉलर पर आ गया है. इससे पहले के सप्ताह में यह भंडार 1.98 अरब डॉलर बढ़कर 688.13 अरब डॉलर हो गया था. यानी सीमाओं पर तनाव बढ़ने के साथ ही देश की आर्थिक सुरक्षा दीवार भी थोड़ा डगमगाई है. यह गिरावट भले ही मामूली लगे, लेकिन युद्ध जैसे हालातों में हर डॉलर मायने रखता है.

पिछले साल रिकॉर्ड स्तर पर था भंडार

सितंबर 2024 में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 704.89 अरब डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर था. यह भारत के आर्थिक इतिहास का एक अहम पड़ाव था. यह आंकड़ा न केवल भारत की मजबूत आर्थिक नीतियों का प्रमाण था, बल्कि यह भी दिखाता था कि भारत किसी भी वैश्विक संकट या युद्ध के समय खुद को स्थिर रख सकता है. हालाँकि मौजूदा हालात में यह भंडार थोड़ा घटा है, लेकिन अब भी भारत के पास पर्याप्त विदेशी मुद्रा है, जिससे वह कई महीनों तक युद्ध या आपात स्थिति का सामना कर सकता है.

फॉरेन करेंसी में आया इजाफा, सोने में गिरावट

भंडार के घटने के बावजूद एक राहत की बात यह रही कि विदेशी मुद्राओं की हिस्सेदारी बढ़ी है. RBI के अनुसार, विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियाँ 51.4 करोड़ डॉलर बढ़कर 581.18 अरब डॉलर पर पहुँच गई हैं. लेकिन स्वर्ण भंडार में गिरावट आई है. समीक्षाधीन सप्ताह में भारत का स्वर्ण भंडार 2.54 करोड़ डॉलर घटकर 81.82 अरब डॉलर रह गया. इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) में जमा भारत का आरक्षित भंडार 30 लाख डॉलर की गिरावट के साथ 4.51 अरब डॉलर पर आ गया. विशेष आहरण अधिकार (SDR) भी 3 करोड़ डॉलर घटकर 18.56 अरब डॉलर हो गया.

क्यों जरूरी है विदेशी मुद्रा भंडार?

किसी भी देश की आर्थिक सुरक्षा उसकी सीमाओं जितनी ही अहम होती है. विदेशी मुद्रा भंडार वह ढाल है जो वैश्विक व्यापार के दौरान संकट से बचाव करता है. युद्ध के समय जब आयात-निर्यात बाधित होते हैं, तब यही भंडार काम आता है. चाहे वो पेट्रोलियम उत्पाद हों, खाद्यान्न हो या रक्षा उपकरण सभी चीज़ें डॉलर में खरीदी जाती हैं. ऐसे में मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार यह सुनिश्चित करता है कि देश की जीवनरेखा कभी बंद न हो. RBI गवर्नर ने पहले ही कहा था कि भारत के पास इतना भंडार है कि वह 11 महीने तक के आयात बिल को बिना किसी रुकावट के चुका सकता है.

वैसे आपको बता दे कि भारत इस समय दुनिया का चौथा सबसे बड़ा विदेशी मुद्रा भंडार रखने वाला देश है. पहले नंबर पर चीन है, जिसके पास लगभग 3,571 अरब डॉलर का भंडार है. दूसरे स्थान पर जापान है, जिसके पास 1,238 अरब डॉलर हैं. तीसरे नंबर पर स्विट्जरलैंड आता है, जिसके पास 952 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार है. भारत 686 अरब डॉलर के साथ चौथे स्थान पर है. रूस 620 अरब डॉलर के साथ पांचवें पायदान पर है. यह दिखाता है कि भारत वैश्विक आर्थिक मंच पर न केवल एक बड़ी ताकत है, बल्कि युद्ध जैसी स्थिति में भी आत्मनिर्भरता के मामले में आगे है.

क्या ये आंकड़े युद्ध के लिए काफी हैं?
इस सवाल का जवाब सीधा है हां. भारत का विदेशी मुद्रा भंडार आज उस स्तर पर है कि वह न केवल लंबी अवधि के युद्ध को झेल सकता है, बल्कि घरेलू बाजार में आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता भी सुनिश्चित कर सकता है. युद्ध के समय डॉलर की मांग तेज़ होती है क्योंकि रक्षा उपकरण, कच्चा तेल, दवाएं और अन्य सामग्री आयात करनी होती है. ऐसे में यदि किसी देश के पास पर्याप्त विदेशी मुद्रा न हो, तो उसकी मुद्रा पर दबाव बढ़ जाता है और महंगाई आसमान छूने लगती है. लेकिन भारत के पास इस संकट से लड़ने के पर्याप्त संसाधन हैं.

पाकिस्तान की स्थिति क्या है?
वहीं पाकिस्तान की स्थिति पूरी तरह विपरीत है. उसका विदेशी मुद्रा भंडार महज 4 से 5 अरब डॉलर के आसपास बना हुआ है. IMF की शर्तों पर चलते हुए उसकी अर्थव्यवस्था गंभीर संकट में है. डॉलर की कमी के चलते पाकिस्तान को आवश्यक वस्तुओं के आयात में भी कठिनाई हो रही है. ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि युद्ध के लिए पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति पूरी तरह से तैयार नहीं है. और यही कारण है कि वह हाइब्रिड वॉरफेयर जैसे ड्रोन हमले, साइबर हमले और आतंकी गतिविधियों के ज़रिए भारत को अस्थिर करने की कोशिश कर रहा है.

भारत-पाक युद्ध के हालात में केवल सीमा पर तैनात सेना ही नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था की तैयारी भी उतनी ही जरूरी होती है. आरबीआई द्वारा जारी विदेशी मुद्रा भंडार के ताज़ा आंकड़े दिखाते हैं कि भारत एक मजबूत स्थिति में है. भले ही भंडार में हल्की गिरावट आई हो, लेकिन मौजूदा स्तर भी भारत को लंबे समय तक आत्मनिर्भर बनाकर रखने के लिए पर्याप्त है.

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