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दिल्ली एयरपोर्ट पर कैसे आई इतनी बड़ी 'आफत', क्या है 'ATC' ग्लिच जिसकी वजह से 600 से फ्लाइट्स की आवाजाही में हुई देरी?

खबरों के मुताबिक, AMSS यानी ऑटोमैटिक मैसेज स्विचिंग सिस्टम जो हर फ्लाइट का प्लान, रूट और मौसम की जानकारी सैंकड़ों में एयर ट्रैफिक कंट्रोलर की स्क्रीन पर पहुंचाता है, लेकिन कल दोपहर 3 बजे के बाद यह सिस्टम अचानक से बंद हो गया, जिसके बाद सभी काम मैनुअल तरीके से हो रहे हैं.

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गुरुवार को दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर एयर ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम में आई गड़बड़ी ने हर किसी को हैरान कर दिया. एक साथ इतनी ज्यादा संख्या में यह गड़बड़ी देखने को मिली कि भारत के सबसे व्यस्त हवाई अड्डे को हिलाकर रख दिया. हालात ऐसे बन गए कि कई फ्लाइट्स को घंटों तक इंतजार करना पड़ा. अचानक से आई गड़बड़ी को देखते ही पैसेंजरों में हड़कंप मच गया. देश की कई बड़ी कंपनियों के फ्लाइट्स एयरपोर्ट पर घंटों तक खड़े रहें. इस परेशानी के चलते कई पैसेंजर्स ने हंगामा भी किया. हालांकि, अभी भी यह समस्या खत्म नहीं हुई है और 300 से ज्यादा फ्लाइट्स की उड़ानों में देरी की खबर है. ऐसे में हर कोई जानना चाहता है कि आखिर इसके पीछे की क्या बड़ी वजह रही? इनमें से कुछ बड़े कारण सामने आए हैं. बताया जा रहा है कि यह ATC ग्लिच के फेल होने की वजह से हुआ. 

घंटों तक खड़ी रहीं फ्लाइट्स 

बता दें कि कल शाम से शुरू हुई तकनीकी खराबी ने दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट को हिलाकर रख दिया. सबसे व्यस्त हवाई अड्डे पर ATC (एयर ट्रैफिक कंट्रोल) सिस्टम ने अचानक से धोखा दे दिया, जिसके चलते सुबह होते ही सैकड़ों फ्लाइट्स लाइन में लग गईं. कंट्रोलर्स को मैनुअल तरीके से हर उड़ान को हैंडल करना पड़ रहा है. वहीं कई फ्लाइट्स को 53 मिनट से लेकर 2 घंटे तक का इंतजार करना पड़ा. इन गड़बड़ियों को देखते हुए इंडिगो, एयर इंडिया, स्पाइसजेट और अकासा एयर जैसी कंपनियों ने पैसेंजर्स को अलर्ट किया.

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क्या है ATC ग्लिच और क्यों फेल हुआ?

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खबरों के मुताबिक, AMSS यानी ऑटोमैटिक मैसेज स्विचिंग सिस्टम जो हर फ्लाइट का प्लान, रूट और मौसम की जानकारी सैंकड़ों में एयर ट्रैफिक कंट्रोलर की स्क्रीन पर पहुंचाता है, लेकिन कल दोपहर 3 बजे के बाद यह सिस्टम अचानक से बंद हो गया, जिसके बाद सभी काम मैनुअल तरीके से हो रहे हैं. 

कागज और पेन से हर उड़ान की डिटेल नोट कर रहे 

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बताया जा रहा है कि इस तकनीकी गड़बड़ी के चलते कंट्रोलर अब फोन और कागज-पेन से हर उड़ान की डिटेल नोट कर रहे हैं. एक काम जो पहले 10 सेकंड में हो जाता था, अब 10-15 मिनट लग रहे हैं. आमतौर पर 1,500 से ज्यादा फ्लाइट मूवमेंट्स वाले एयरपोर्ट पर अब घंटे में मुश्किल से कुछ ही उड़ानें संभल पा रही हैं. 

कैसे आया इतना बड़ा संकट?

खबरों के मुताबिक, आधुनिक एटीसी सिस्टम उड़ान योजनाओं को प्रोसेस करने, विमानों को ट्रैक करने और रियल-टाइम डेटा प्रदान करने के लिए स्वचालित प्रणालियों पर बहुत अधिक निर्भर करता है. इस पूरी प्रकिया का AMSS संचार कड़ी के रूप में काम करता है. ऐसे में जब यह ऑटोमेशन विफल होता है, तो कंट्रोलरों को मैन्युअल प्रक्रियाओं पर लौटना पड़ता है. ऐसे हालात में सुरक्षा तो बनी रहती है, लेकिन गति पूरी तरह से खत्म हो जाती है. खास तौर से मैनुअल प्रोसेस की धीमी गति ने प्रति घंटे प्रोसेस की जाने वाली उड़ानों की संख्या को काफी कम कर दिया, जिसकी वजह से भारी भीड़-भाड़ पैदा हो गई.

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दिल्ली के अलावा अन्य क्षेत्रों में भी नेटवर्क पर असर

फ्लाइट्स के संचालन में दिल्ली देश का एक प्रमुख कनेक्टिंग हब है. यहां देरी होने का मतलब है कि पूरे क्षेत्रीय नेटवर्क में देरी और उसपर असर पड़ना है. कल आई तकनीकी गड़बड़ी के चलते दिल्ली से आगे जाने वाली उड़ानें जमीन पर खड़ी रह गईं. इसके अलावा क्रू के ड्यूटी टाइम लिमिट भी प्रभावित हुए.

650 से ज्यादा उड़ाने हुईं लेट

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बता दें कि इस तकनीकी समस्या के चलते गुरुवार को 513 उड़ानें और शुक्रवार सुबह तक 171 उड़ानें लेट हुईं. इसके अलावा मैनुअल क्लीयरेंस के लिए विमानों की कतार लग गई.

क्या है AAI की रिपोर्ट? 

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इस मामले पर एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया की 50 से ज्यादा इंजीनियरों की टीम पिछले 18 घंटे से लगातार काम कर रही है. बताया जा रहा है कि फिर से यह सर्वर रीस्टार्ट किया गया है और बैकअप लोड किया गया है. लेकिन अभी तक सिस्टम पूरी तरह बहाल नहीं हुआ. यह कब तक बहाल होगा, अभी इसकी भी कोई जानकारी सामने नहीं आई है.

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