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Premanand Maharaj कैसे Varanasi से Vrindavan आए… बुजुर्ग महिला ने खोले बड़े राज !

एक बुजुर्ग महिला की वजह से प्रेमानंद महाराज चर्चाओं में बने हुए हैं... जिसके बारे में कहा जा रहा है कि उन्होंने प्रेमानंद महाराज के सालों पुराने राज तक खोल दिये…

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संत प्रेमानंद महाराज। इस नाम से भला कौन परिचित नहीं होगा। लंबी लंबी जटाएं। बड़ी बड़ी दाढ़ी। तन पर पीला वस्त्र। और सबसे बड़ी बात। उनके विचार।जिसे सोशल मीडिया के जरिये आपने भी कभी ना कभी जरूर सुना होगा। और उनके विचारों को आत्मसात भी किया होगा।ऐसे महान संत अपने विचारों को लेकर तो चर्चाओं में बने ही रहते हैं। लेकिन इस बार एक बुजुर्ग महिला की वजह से प्रेमानंद महाराज चर्चाओं में बने हुए हैं।जिसके बारे में कहा जा रहा है कि उन्होंने प्रेमानंद महाराज के सालों पुराने राज तक खोल दिये।

कौन हैं वो बुजुर्ग महिला जिसने प्रेमानंद महाराज के खोले राज ?


तस्वीरों में नजर आ रहीं बुजुर्ग महिला का नाम है शीला। जो व्रज में ही रहती हैं। और प्रेमानंद महाराज के बारे में तब से जानती हैं। जब वो महादेव की काशी में रहा करते थे। क्योंकि बुजुर्ग अम्मा के पति श्रीराम शर्मा एक बड़े रासाचार्य थे।जो अक्सर रास की प्रस्तुति देने के लिए महादेव की काशी जाया करते थे। जिसे लोग वाराणसी या बनारस के नाम से भी जानते हैं।इसी पुरातन शहर में जब बृजवासी अम्मा के पति रास की प्रस्तुति देने के लिए जाते थे तो उनके साथ वो भी जाया करती थीं।जिन्हें सुनने के लिए प्रेमानंद महाराज भी आया करते थे।जो उस वक्त इतना मशहूर नहीं थे। जितने आज हैं।मेरो वृंदावन नाम के एक यूट्यूब चैनल से उस दौर की बात याद करते हुए 90 साल की बृजवासी अम्मा शीला बताती हैं कि।  "मेरे पति ने 18 साल तक बनारस में लीला की जिसे देखने के लिए प्रेमानंद महाराज भी रोज आते थे उस वक्त उनकी बड़ी-बड़ी जटाएं थीं और फक्कड़ की तरह रहते थे, जब उन्हें पता चला की रास बिहारी वापस जाने वाले हैं तो प्रेमानंद महाराज उनके पैरों में गिर गये और कहने लगे महाराज जी हमें अपने साथ ले चलो हम तुम्हारा काम कर दिया करेंगे और लीला भी देख लिया करेंगे तो ये बोले बाबा हमारे साथ कहां जाओगे हम तो जगह-जगह जाते हैं "

बुजुर्ग महिला शीला के मुताबिक रास आचार्य के लाख समझाने के बावजूद जब प्रेमानंद महाराज नहीं माने तो उन्होंने कहा कि वृंदावन चलो बांके बिहारी जी एक बार हाथ पकड़ेंगे तो फिर तुम्हें जाने नहीं देंगे, इसके बाद किसी और बाबा के साथ वो वृंदावन आए तो आज तक वापस नहीं गये
प्रेमानंद महाराज की बीमारी के बारे में जिक्र करते हुए बुजुर्ग अम्मा बताती हैं कि "जब वो बनारस में रहते थे तो लंबी-लंबी जटाएं थीं इनकी और खटिया पर पड़े रहते थे, इनकी किडनी भी खराब हो गई थी, किडनी देने के लिए तो बहुत लोग तैयार हैं लेकिन प्रेमानंद महाराज लेने को तैयार नहीं हैं वो कहते हैं क्यों किसी और को कष्ट दें जो है हम ही भोगेंगे इसे"

प्रेमानंद महाराज पहले रात में परिक्रमा के लिए भी निकलते थे। इस दौरान लोगों को उनके दर्शन भी हो जाया करते थे।लेकिन एनआरआई ग्रीन कॉलोनी की महिलाओं के विरोध के बाद उन्होंने परिक्रमा पर जाना बंद कर दिया था।जिसके बारे में बुजुर्ग अम्मा बताती हैं कि।बाबा कभी किसी से नहीं कहते थे बैंड-बाजा लाने के लिए लोग खुद ही लेकर आते हैं वो तो अपनी खुशी से लोग आते हैं और बजाते हैं। महिलाओं के विरोध के बाद प्रेमानंद महाराज ने अपनी यात्रा परिक्रमा बंद कर दी। और अब वो बालकनी से खड़े होकर ही अपने भक्तों को दर्शन देते हैं।बहरहाल बनारस लेकर वृंदावन तक।प्रेमानंद महाराज के बारे में बुजुर्ग बृजवासी अम्मा ने जो राज खोले हैं। 
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