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'हिंदुओं में कहावत है...', ट्रंप की धमकियों पर भारत ने लिया स्टैंड, धर्म-कर्म की बात करने लगा कम्युनिस्ट चीन, कहा-अपने भाई की नाव पार लगाओ...

अमेरिका से रिश्तों में तल्खी बढ़ रही है, लेकिन इसी बीच भारत और चीन के बीच कुछ नरमी आती दिख रही है. सात साल बाद पीएम नरेंद्र मोदी चीन दौरे पर जा रहे हैं. 31 अगस्त से 1 सितंबर के बीच वो तियानजिन में होने वाले शंघाई सहयोग संगठन (SCO) समिट में हिस्सा लेंगे. ट्रंप के पागलपन का शिकार चीन अब धर्म कर्म की बात करने लगा है और हिंदुओं की कहावत का हवाला दे रहा है.

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'किसी का नुकसान, किसी का फायदा...अमेरिका घाटा, ट्रंप का क्या ही जाता?' अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फैसलों का विश्लेषण इतिहास करेगा लेकिन एक बाद तय है कि अमेरिका के सबसे मजबूत जोड़ीदार के साथ संबंधों में जिस तरह की खाई उन्होंने पैदा की है उसके गंभीर परिणाम होंगे. ऐसा किसी ने नहीं सोचा था कि वर्षों से चली आ रही प्रतिद्वंदिता, डोकलाम, गलवान और पहलगाम के बाद भारत और चीन करीब आ पाएंगे, लेकिन भला हो ट्रंप का जिसके पागलपन, अदृष्टि, और मूर्खता के कारण दोनों देश फिर से पास आने लगे हैं.

अमेरिकी धमकी पर क्या बोले पीएम मोदी?

अमेरिका से रिश्तों में तल्खी बढ़ रही है, लेकिन इसी बीच भारत और चीन के बीच कुछ नरमी आती दिख रही है. सात साल बाद पीएम नरेंद्र मोदी चीन दौरे पर जा रहे हैं. 31 अगस्त से 1 सितंबर के बीच वो तियानजिन में होने वाले शंघाई सहयोग संगठन (SCO) समिट में हिस्सा लेंगे. मोदी का ये चीन दौरा ऐसे वक्त पर हो रहा है जब अमेरिका ने भारत पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है. दरअसल, भारत द्वारा रूस से तेल खरीद जारी रखने पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नाराज़गी जताई है और जवाब में भारत पर 50% टैरिफ बढ़ा दिया है. इस पर पीएम मोदी का भी साफ संदेश आया है – भारत अपने हितों से समझौता नहीं करेगा. ज़रूरत पड़ी तो कोई भी कीमत चुकाने के लिए तैयार हैं.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को अमेरिका के टैरिफ फैसले पर तीखा और स्पष्ट संदेश दिया. उन्होंने कहा कि भारत अपने किसानों, पशुपालकों और मछुआरों के हितों से कभी समझौता नहीं करेगा. पीएम मोदी ने एमएस स्वामीनाथन शताब्दी अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान यह भी कहा कि भारत की प्राथमिकता में सबसे ऊपर किसान हैं. उन्होंने साफ कर दिया कि देश की ऊर्जा, कृषि और व्यापार नीतियां केवल विदेशी दबावों से नहीं, बल्कि देश की ज़रूरतों और जनहित के आधार पर बनेंगी.

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पीएम मोदी के चीन दौरे पर ग्लोबल टाइम्स ने छापा लेख

ठीक इसके बाद उनके चीन दौरे की खबर सामने आई, जिस पर चीन में भी इसकी खूब चर्चा शुरू हो गई. चीनी सरकार के मुखपत्र माने जाने वाले अखबार ग्लोबल टाइम्स ने इसको लेकर एक संपादकीय लेख छापा है, जिसमें भारत-चीन संबंधों को लेकर कई बड़ी बातें कही गईं हैं.

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ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है कि भारत और चीन के बीच जो गर्मजोशी देखने को मिल रही है, वो इस बात का संकेत है कि अमेरिका, भारत की स्वतंत्र विदेश नीति को डिक्टेट (धमका, संचालित) नहीं कर सकता. अखबार ने माना कि  भारत और चीन के बीच लंबे समय से कई मतभेद और विवाद रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद अब रिश्तों में थोड़ी नरमी और सकारात्मकता दिखाई दे रही है.

अखबार ने यह भी लिखा कि 2020 में गलवान घाटी की झड़प के बाद दोनों देशों के रिश्तों में काफी तनाव रहा, जिसने राजनीतिक भरोसे, व्यापारिक संबंधों और जनता के स्तर पर संवाद को भी प्रभावित किया. लेकिन अब जो माहौल बन रहा है, वो पहले से अलग है और उम्मीद जगाता है.  

इस साल जून से अब तक भारत के तीन बड़े नेता – राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और विदेश मंत्री एस. जयशंकर – चीन का दौरा कर चुके हैं. चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स का कहना है कि हाल के वर्षों में इस स्तर की सहभागिता बहुत कम देखने को मिली है.

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गलवान घाटी विवाद के बाद जो द्विपक्षीय बातचीत के तंत्र ठप हो गए थे, अब वो धीरे-धीरे फिर से सक्रिय हो रहे हैं. भारत और चीन दोनों ही देशों का कहना है कि सीमा विवाद को आपसी रिश्तों की राह में बाधा नहीं बनना चाहिए.

सिर्फ बातचीत ही नहीं, जमीन पर भी कुछ अहम कदम उठाए गए हैं. जनवरी में चीन ने भारतीय तीर्थयात्रियों के लिए तिब्बत में कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील का रास्ता फिर से खोलने पर सहमति दी थी. वहीं भारत ने भी चीनी पर्यटकों के लिए दरवाजे खोलते हुए 24 जुलाई से चीनी नागरिकों को टूरिस्ट वीजा जारी करना शुरू कर दिया है. ग्लोबल टाइम्स का मानना है कि ये सभी पहल भारत-चीन संबंधों में आ रही सकारात्मकता के साफ संकेत हैं. 

ग्लोबल टाइम्स ने आगे लिखा क चीन के नजरिए से देखें तो, भारत-चीन सहयोग किसी तीसरे पक्ष को टार्गेट नहीं करता है. अखबार लिखता है, 'चीन और भारत पड़ोसी हैं, और जिन क्षेत्रों में वे सहयोग कर सकते हैं उनकी लिस्ट लंबी है.

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'हिंदुओं के बीच एक कहावत है...'

अगर इस बार मोदी की चीन यात्रा हो पाती है, तो यह चीन और भारत के बीच सहयोग के लिए एक बड़ा प्लेटफॉर्म बनेगा. एससीओ के जरिए मजबूत होता सहयोग न केवल दोनों देशों के विकास को फायदा पहुंचाएगा बल्कि क्षेत्रीय शांति और समृद्धि में भी योगदान देगा. जैसा कि हिंदुओं के बीच एक कहावत है कि अपने भाई की नाव पार लगाओ और तुम्हारी नाव किनारे तक पहुंच जाएगी.' लेख के अंत में ग्लोबल टाइम्स ने लिखा, 'द्विपक्षीय संबंधों को बेहतर बनाने और- ड्रैगन (चीन) और हाथी (भारत) के साथ नाचने के एक नए चैप्टर को शुरू करने के सच्चे इरादे से हम प्रधानमंत्री मोदी की चीन यात्रा का स्वागत करते हैं.' 

डोभाल-पुतिन की मुलाकात
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 'टैरिफ बम' के बीच मॉस्को में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से NSA अजीत डोभाल ने मुलाकात की है. डोभाल की रूस के साथ हुई इस मुलाकात से साफ हो गया है कि ट्रंप कितना भी दादागिरी दिखाते रहें, भारत उनके आगे ना झुकने वाला है न ही किसी दबाव में आएगा. बताया जा रहा है कि इसमें भारत और रूस के बीच रणनीतिक साझेदारी को और भी ज्यादा मजबूत करने और रक्षा, ऊर्जा, भू राजनीतिक जैसे कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई है. 

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ट्रंप की दादागिरी के खिलाफ RIC एक्टिव 

अमेरिका द्वारा भारत पर टैरिफ का दबाव बढ़ाने के बीच भारत ने अपनी कूटनीतिक सक्रियता तेज कर दी है. एनएसए अजित डोभाल रूस में हैं और जल्द ही विदेश मंत्री जयशंकर भी रूस जाएंगे. वहीं प्रधानमंत्री मोदी 30 अगस्त को जापान और फिर 31 अगस्त को चीन (SCO समिट) की यात्रा पर जाएंगे. जापान दौरे में रणनीतिक सहयोग पर बात होगी, जबकि चीन में क्षेत्रीय सुरक्षा और आतंकवाद जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी.

पीएम मोदी का चीन दौरा, पुतिन का भारत दौरा 

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प्रधानमंत्री जल्द ही SCO समिट के लिए चीन के दौरे पर जाएंगे वहीं, रूसी राष्ट्रपति व्लादीमीर पुतिन भी पीएम मोदी के न्यौते पर नई दिल्ली के दौरे पर आएंगे. प्रधानमंत्री मोदी ने बीते दिनों राष्ट्रपति पुतिन को भारत आने के लिए आमंत्रित किया है, जब 23वां भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन आयोजित किया जाएगा.

प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर भी बातचीत की जानकारी साझा करते हुए लिखा कि, “मेरे मित्र राष्ट्रपति पुतिन से बहुत ही अच्छी और विस्तृत बातचीत हुई. यूक्रेन को लेकर हालिया घटनाक्रम साझा करने के लिए उनका आभार व्यक्त किया. हमने द्विपक्षीय एजेंडे की प्रगति की समीक्षा की और भारत-रूस विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी को और सुदृढ़ करने की प्रतिबद्धता दोहराई. इस वर्ष के अंत में भारत में राष्ट्रपति पुतिन की मेजबानी की प्रतीक्षा है.”

6 दिसंबर, 2021 को आखिरी बार भारत आये थे रूस के राष्ट्रपति

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बता दें कि रूस के राष्ट्रपति की आखिरी भारत यात्रा 6 दिसंबर, 2021 को हुई थी, जब वह 21वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए नई दिल्ली आए थे. वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले वर्ष रूस के दो अहम दौरे किए. जुलाई में उन्होंने 22वें भारत-रूस शिखर सम्मेलन में भाग लिया और फिर अक्टूबर में कजान में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भी हिस्सा लिया. इन दौरों और बैठकों से यह स्पष्ट होता है कि दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत बनाए रखने के लिए निरंतर संपर्क में हैं.

रूस से संबंध तोड़ने का अमेरिका बढ़ा रहा दबाव

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर किए गए तीखे हमलों के बीच भारत सरकार ने बीते दिनों साफ कर दिया था कि रूस के साथ उसके संबंध किसी बाहरी दबाव से संचालित नहीं होते है और न होंगे. विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर स्पष्ट किया था कि भारत अपने द्विपक्षीय रिश्ते अपने राष्ट्रीय हितों और स्वतंत्र नीति के आधार पर बनाता है, न कि किसी तीसरे देश की अनुमति या नजरिये से. इसके साथ ही मंत्रालय ने इशारों ही इशारों में ट्रंप और अन्य देशों को सलाह दी कि बाइलेटरल रिलेशन को इसे किसी तीसरे देश के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए.

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विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने ब्रीफिंग में साफ-साफ शब्दों में कहा था कि अलग-अलग देशों के साथ हमारे द्विपक्षीय संबंध हमारी शर्तों पर आधारित हैं और इसे किसी तीसरे देश के चश्मे से न देखा जाए और न ही इस कारण रिश्ते प्रभावित होने देना चाहिए." 

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