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पत्रकार हत्याकांड में राम रहीम को हाई कोर्ट ने किया बरी, 3 आरोपियों की सजा बरकरार, क्या था फैसले का आधार?

साल 2002 में पत्रकार राम चंदर छत्रपति ने अपने अखबार में डेरा से जुड़े कुछ तथ्य प्रकाशित किए थे. जिसके बाद उनकी हत्या कर दी गई थी. कोर्ट ने इस मामले में राम रहीम समेत 4 आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी.

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जेल में कम और पैरोल पर बाहर ज्यादा रहने वाले दुष्कर्म के दोषी राम रहीम को अब बरी कर दिया है. पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पत्रकार राम चंदर छत्रपति हत्याकांड में राम रहीम की सजा रद्द कर दी है. 

इस मामले में कोर्ट ने जनवरी 2019 में राम रहीम समेत सभी आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी. केवल राम रहीम की सजा को रद्द किया गया है, बाकी के तीन अन्य आरोपियों कुलदीप, निर्मल सिंह और कृष्ण लाल की सजा को बरकरार रखा है. मुख्य न्यायाधीश शील नागू और जस्टिस विक्रम अग्रवाल की पीठ ने 2019 में दी गई आजीवन कारावास की सजा के फैसले को पलट दिया. दरअसल, रामचंद्र छत्रपति मामले में 11 जनवरी 2019 को डेरा प्रमुख को दोषी करार दिया था और 17 जनवरी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी. डेरा प्रमुख और अन्य सह आरोपियों ने स्पेशल CBI कोर्ट के फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी. 

कोर्ट ने क्या कहा? 

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फैसले का आधार अपर्याप्त सबूत बने. फैसला सुनाते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि इस हत्याकांड में राम रहीम के साजिशकर्ता होने के पर्याप्त सबूत नहीं हैं. जिस वजह से राम रहीम को बरी कर दिया गया. इस मामले की जांच उन गोलियों को लेकर उठे विवाद के कारण शुरू हुई, जिनका कथित तौर पर अपराध को अंजाम देने में इस्तेमाल किया गया था. अदालत द्वारा रिकॉर्ड में दर्ज सामग्री की समीक्षा के दौरान ये गोलियां एक अहम मुद्दा बन गईं. हालांकि हत्या के मामले में बरी होने के बावजूद राम रहीम जेल में ही रहेंगे क्योंकि वह बलात्कार मामले में सजा काट रहा है. 

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क्या था पत्रकार छत्रपति हत्याकांड? 

2019 में विशेष अदालत ने पत्रकार छत्रपति की हत्या के मामले में राम रहीम और तीन अन्य को दोषी ठहराया था. साल 2002 में पत्रकार राम चंदर छत्रपति की हत्या की गई थी. उसी समय उन्होंने अपने अखबार में राम रहीम और डेरा से जुड़े कई गंभीर आर्टिकल प्रकाशित किए थे. उनकी हत्या के बाद शक की सुई राम रहीम पर ही घूमी थी. CBI ने केस की जांच अपने हाथ में ली और डेरा प्रमुख राम रहीम समेत 4 आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई. फैसले के खिलाफ आरोपियों ने हाई कोर्ट में अपील की गई. जिसमें कोर्ट ने सबूतों को नाकाफी मानते हुए केवल राम रहीम को बरी किया. 

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बलात्कार समेत तीन केस 

राम रहीम को साल 2017 में बलात्कार के एक मामले में दोषी ठहराया गया था. इस मामले में उसे 10 साल की कैद और जुर्माने की सजा सुनाई गई थी. इसके बाद पत्रकार छत्रपति और डेरा मैनेजर रणजीत हत्याकांड में राम रहीम को CBI ने आरोपी बनाया था. 

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जेल में रहते हुए वह कई बार पैरोल और फरलो पर जेल से बाहर आया, जिस पर काफी हो हल्ला भी हुआ. पैरोल पर रहते हुए वह बागपत आश्रम में रहा. वहां उसके समर्थकों का जमावड़ा भी लगा रहता था. जेल जाने के बाद भी हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और अन्य क्षेत्रों सहित कई उत्तरी राज्यों में बड़ी संख्या में अनुयायी हैं. 

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