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स्वास्थ्य से खिलवाड़ पड़ा भारी, UP में 39 मिनरल वाटर ब्रांड्स बैन, योगी सरकार ने उठाए सख्त कदम

CM Yogi: एफएसडीए ने आम लोगों से अपील की है कि वे बोतलबंद पानी खरीदते समय कंपनी का नाम, लाइसेंस नंबर और पैकेजिंग की जानकारी जरूर जांचें. अगर किसी बोतल या ब्रांड पर शक हो या पानी की गुणवत्ता सही न लगे, तो इसकी सूचना तुरंत विभाग को दें.

Image Source: Social Media
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Mineral Water Brands Banned in UP: प्रदेश में काफी समय से बोतलबंद पानी की गुणवत्ता को लेकर लोगों की शिकायतें सामने आ रही थीं. कई उपभोक्ताओं का कहना था कि कुछ कंपनियों का पानी पीने के बाद उन्हें पेट से जुड़ी समस्याएं हो रही हैं. इन लगातार मिल रही शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग (एफएसडीए) ने पूरे प्रदेश में बड़े स्तर पर जांच अभियान चलाने का निर्देश दिया. इस जांच का मकसद यह जानना था कि बाजार में बिक रहा बोतलबंद पानी वास्तव में पीने लायक है या नहीं.

जांच में फेल हुए कई पानी के सैंपल

एफएसडीए की टीमों ने अलग-अलग जिलों में दुकानों, गोदामों और सप्लाई सेंटरों से बोतलबंद पानी के नमूने इकट्ठा किए. इन नमूनों को प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा गया. जांच रिपोर्ट आने के बाद यह सामने आया कि कई ब्रांड्स का पानी तय गुणवत्ता मानकों पर खरा नहीं उतरता. यानी यह पानी पीने के लिए सुरक्षित नहीं था. इसके बाद विभाग ने तुरंत सख्त कदम उठाने का निर्णय लिया.

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स्वास्थ्य के लिए खतरनाक बताया दूषित पानी

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एफएसडीए की आयुक्त डॉ. रोशन जैकेब ने बताया कि जांच में फेल हुआ पानी आम लोगों के स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है. उन्होंने कहा कि इस तरह के पानी से पेट की बीमारियां, संक्रमण और लंबे समय तक चलने वाली स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं. लोग बोतलबंद पानी को साफ और सुरक्षित मानकर पीते हैं, ऐसे में अगर वही पानी दूषित हो तो इसका असर सीधे जनस्वास्थ्य पर पड़ता है.

जनहित में लगाया गया तत्काल प्रतिबंध

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जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद एफएसडीए ने जनहित को ध्यान में रखते हुए संबंधित कंपनियों के बोतलबंद पानी पर तुरंत प्रतिबंध लगा दिया. डॉ. रोशन जैकेब ने साफ कहा कि नागरिकों का स्वास्थ्य विभाग की सबसे बड़ी प्राथमिकता है और गुणवत्ता से किसी भी तरह का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. इसलिए बिना देरी किए यह कार्रवाई की गई.

48 घंटे में स्टॉक की जानकारी देने के आदेश

एफएसडीए आयुक्त ने प्रतिबंधित सभी कंपनियों को निर्देश दिए हैं कि वे 48 घंटे के भीतर अपने पास मौजूद पानी के स्टॉक की पूरी जानकारी विभाग को दें. इसके साथ ही जिला स्तर के अधिकारियों को यह जिम्मेदारी दी गई है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में इन ब्रांड्स की बिक्री और सप्लाई को तुरंत रोकना सुनिश्चित करें, ताकि कोई भी दूषित पानी बाजार में न बिक सके.

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आगे भी जारी रहेगी जांच और कार्रवाई

विभाग ने यह भी साफ कर दिया है कि यह कार्रवाई यहीं खत्म नहीं होगी. आने वाले समय में भी जांच अभियान लगातार जारी रहेगा. अगर किसी अन्य ब्रांड या यूनिट में नियमों का उल्लंघन पाया गया तो उनके खिलाफ भी सख्त कदम उठाए जाएंगे. जरूरत पड़ने पर लाइसेंस रद्द करने और कानूनी कार्रवाई करने से भी पीछे नहीं हटेगा.

उपभोक्ताओं से सतर्क रहने की अपील

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एफएसडीए ने आम लोगों से अपील की है कि वे बोतलबंद पानी खरीदते समय कंपनी का नाम, लाइसेंस नंबर और पैकेजिंग की जानकारी जरूर जांचें. अगर किसी बोतल या ब्रांड पर शक हो या पानी की गुणवत्ता सही न लगे, तो इसकी सूचना तुरंत विभाग को दें. लोगों की सतर्कता से ही ऐसे उत्पादों पर रोक लगाई जा सकती है.

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