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सावन में शिव मंदिर के सामने मांस बेचने का विरोध करता था युवक, अकील और नासिर खान ने कार से कुचलकर मार डाला, दमोह में तनाव

सावन के शुरू होते ही जगह-जगह श्रद्धालुओं की भीड़ दिखने लगी है. लोग कांवड़ लेकर शिव मंदिर की तरफ बढ़ रहे हैं, इसी बीच दमोह से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है. जहां एक युवक को मांस बेचने का विरोध करना भारी पड़ गया है.

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दमोह के एडिशनल एसपी ने कहा कि ये महज हादसा नहीं, हत्या है. आरोपी गिरफ्तार कर लिए गए हैं और कार भी जब्त कर ली गई है. साथ ही मंदिर के पास मांस बिक्री और अवैध कब्जे की जांच भी शुरू कर दी गई है. 

अकील-नासिर ने मांस की बिक्री का विरोध करने पर मार डाला 

एमपी के दमोह में शिव मंदिर के सामने नॉनवेज बिक्री का विरोध करना एक युवक को जान पर भारी पड़ गया. आरोप है कि विरोध के बाद एक युवक को कार से कुचलकर मौत के घाट उतार दिया गया. मृतक की मां नन्नी बाई रैकवार ने कहा है कि मेरे सामने मेरा बेटा तड़प-तड़प कर मर गया. उसे अकील और उसके पिता नासिर खान ने मार डाला है. मैं और मेरा बेटा डॉक्‍टर के पास जा रहे थे तभी हम पर हमला किया गया. इधर पुलिस का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है. दो समुदायों का मामला होने से इलाके में तनाव को देखते हुए भारी पुलिस बल तैनात किया गया है.

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दरअसल दमोह शहर के पठानी मोहल्ला में शुक्रवार की शाम राकेश रैकवार उर्फ रक्के अपनी बीमार मां नन्‍नी बाई को डॉक्टर के पास लेकर जा रहा था. रास्ते में अजमेरी गार्डन के पास अचानक एक कार ने उसे रौंद दिया. प्रत्यक्षदर्शियों और मृतक की मां के मुताबिक, यह महज सड़क दुर्घटना नहीं थी, बल्कि सुनियोजित हत्या थी. मां की आंखों के सामने बेटे को कुचलकर मार दिया गया. मृतक की मां नन्‍नी बाई रैकवार ने बताया कि कार अकील खान चला रहा था और उसके पिता नासिर खान ने इशारे से मारने को कहा था. कार से कुचलकर हत्‍या की गई है.

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मंदिर के सामने खुलेआम हो रही थी मांस की बिक्री 

अजमेरी गार्डन के पास एक प्राचीन शिव मंदिर है, जहां श्रद्धालु बड़ी संख्या में पूजा करने आते हैं. आरोप है कि अकील और उसके पिता नासिर खान ने मंदिर के सामने अवैध रूप से मकान बनाया और वहीं बीते तीन सालों से मांस की दुकान चला रहे थे. मांस की कटाई और बिक्री मंदिर के सामने खुलेआम होती थी, जिससे स्थानीय लोग खासे नाराज थे. राकेश रैकवार इस विरोध की अगुवाई कर रहा था और कई बार प्रशासन से शिकायत भी की थी. शुक्रवार को एक बार फिर इसी मुद्दे पर बहस हुई, जिसके बाद शाम को राकेश की हत्या कर दी गई.

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परिवार का कहना है कि प्रशासन को कई बार शिकायतें दी गईं लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई. अब समाज के लोग, विशेषकर मांझी समाज और हिन्दू संगठन इस घटना के बाद सड़क पर उतर आए हैं. सभी का आरोप है कि यह एक सुनियोजित साजिश थी, जिसे प्रशासन की लापरवाही ने संभव बनाया. शनिवार को राकेश का पोस्टमार्टम हुआ, जिसके बाद आक्रोश और बढ़ गया. शव यात्रा में शामिल लोगों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाज़ी की. दमोह में हिंदू युवा वाहिनी, मांझी समाज और कई अन्य संगठनों ने आंदोलन की चेतावनी दी है.

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