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'सब बर्बाद कर दिया, ओबामा-बुश दिल्ली जाकर रिश्ते सुधारें...', इस अमेरिकी ने ट्रंप को बताया पाखंडी, सनकी, अक्षम

अमेरिकी रक्षा विभाग के पूर्व अधिकारी माइकल रुबिन ने भारत और रूस को एक साथ लाने के लिए डोनाल्ड ट्रंप को नोबेल पुरस्कार देने की मांग की है. उन्होंने आगे कहा कि पूरी दुनिया हैरान है कि कैसे ट्रंप ने दशकों पुरानी दोस्ती को उलट दिया. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि शायद पाकिस्तानी घुसपैठ की वजह से वे ऐसा कर रहे हैं. रूसी तेल पर भारत को दिए गए टैरिफ पर उन्होंने कहा कि अमेरिका पाखंड कर रहा है, क्योंकि वह खुद रूस से खरीदारी करता है. ऐसे में जब हम भारत को भाषण देते हैं तो हम पाखंडी लगते हैं. इतना ही नहीं उन्होंने ये भी कह दिया कि अमेरिकी कांग्रेस को ये कहना होगा कि उसका राजा नंगा है, अगर वो ऐसा नहीं कहते हैं तो वो भी उतने ही दोषी हैं.

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रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा. उनके दो दिवसीय दिल्ली दौरे पर अमेरिका में भी यह सवाल उठने लगा है कि कैसे एक समय अमेरिका का रणनीतिक और कूटनीतिक साझेदार रहा भारत अब उसके विरोधी खेमे में जाता दिख रहा है. इसके लिए ट्रंप के ईगो और व्यक्तिगत खुन्नस को जिम्मेदार माना जा रहा है. पुतिन और पीएम मोदी की मुलाकात पर पेंटागन के पूर्व अधिकारी माइकल रुबिन ने कहा कि रूस के नजरिए से यह यात्रा बेहद सकारात्मक है और भारत ने व्लादिमीर पुतिन को जो सम्मान दिया है, वह दुनिया में कहीं और शायद ही मिल सकता है. मैं तो यह भी तर्क दूंगा कि भारत और रूस को इस तरह एकजुट करने के लिए डोनाल्ड ट्रंप नोबेल पुरस्कार के हकदार हैं.

'सनकी और अक्षम व्यक्ति हैं ट्रंप'

वाशिंगटन में पुतिन-मोदी मुलाकात पर उठ रही चिंताओं के सवाल पर रुबिन ने कहा कि इसे दो तरह से देखा जा रहा है. पहला, डोनाल्ड ट्रंप कभी स्वीकार नहीं करेंगे कि गलती उनकी है. दूसरा, यह ट्रंप की घोर अक्षमता का परिणाम है. आम अमेरिकी इसे ऐसे देख रहे हैं कि 25 वर्षों में बनी अमेरिका-भारत साझेदारी को व्हाइट हाउस में बैठे एक सनकी और अक्षम व्यक्ति द्वारा तार-तार किया जा रहा है.

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उन्होंने चेतावनी दी कि हम या कम से कम व्हाइट हाउस यह पूरी तरह नहीं समझ रहा कि डोनाल्ड ट्रंप के कदमों की क्या कीमत चुकानी पड़ेगी. लोग अभी भी हैरान हैं कि डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका-भारत संबंधों को कैसे उलट दिया है.

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ट्रंप ऐसा कर क्यों रहे हैं?

भारत से रिश्ते खराब करने पर उन्होंने कहा कि कई लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि ट्रंप ऐसा कर क्यों रहे हैं, किसके इशारे पर कर रहे हैं और उन्हें ऐसा करने के लिए कौन प्रेरित कर रहा है. उन्होंने आगे कहा कि शायद यह पाकिस्तानियों की चाटूकारिता है. अधिक संभावना है कि यह पाकिस्तानियों या तुर्की और कतर में उनके समर्थकों द्वारा दी गई किसी रिश्वत का नतीजा हो.

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घोर अक्षमता का प्रमाण है ट्रंप 2.0

पाकिस्तानियों की चाटूकारिता, रिश्वत, व्यक्तिगत तारीफ और पाकिस्तान क्रिप्टो काउंसिल से जुड़ी डील का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यह एक विनाशकारी रिश्वत है, जो आने वाले दशकों तक अमेरिका पर रणनीतिक घाटे का बोझ डालेगी. अमेरिकी राष्ट्रपति को भारत का उत्सव मनाना चाहिए था. और तथ्य यह है कि ऐसा नहीं हो रहा, यह राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की घोर अक्षमता को दर्शाता है.

'मोदी को लोगों ने अपने लिए चुना, आपके लिए नहीं'

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ईंधन की निर्बाध शिपिंग पर उन्होंने कहा कि अमेरिकी यह नहीं समझते कि प्रधानमंत्री मोदी को भारतीयों ने भारतीय हितों के प्रतिनिधित्व के लिए चुना है. भारत दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश है, जल्द ही दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनेगा और उसे ऊर्जा की जरूरत है.

भारत पर अमेरिका के दोहरे मापदंड और पाखंड पर उन्होंने कहा कि अमेरिका खुद रूस से वह सामग्री खरीदता है जिसके लिए उसके पास कोई वैकल्पिक बाजार नहीं. ऐसे में भारत को भाषण देना पाखंड है. यदि हम नहीं चाहते कि भारत रूसी ईंधन खरीदे, तो सवाल है कि क्या हम भारत को उतनी ही मात्रा में और सस्ता ईंधन दे सकते हैं? यदि उत्तर ‘नहीं’ है, तो हमारी सबसे अच्छी सलाह यही है कि हम चुप रहें, क्योंकि भारत को पहले अपनी सुरक्षा देखनी है.

अमेरिकी टैरिफ के भारत पर दबाव डालने में असफल रहने पर उन्होंने कहा कि यह टैरिफ अन्यायपूर्ण और अव्यावहारिक हैं और ये भारत की तुलना में अमेरिका को आर्थिक और रणनीतिक रूप से अधिक नुकसान पहुंचाते हैं. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत को लेकर दृष्टिकोण से बड़ी घोर अक्षमता मिसाल खोजना मुश्किल है.

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'कांग्रेस को कहना होगा कि उसका राजा नंगा है'

उन्होंने कहा कि निराशा की बात यह है कि यह सर्वसम्मति वाला दृष्टिकोण नहीं है. अमेरिकी कांग्रेस भारत के महत्व को समझती है, लेकिन यदि कांग्रेस यह कहने की हिम्मत नहीं जुटाती कि ‘राजा नंगा है’, तो वह भी उतनी ही दोषी है.

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उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका-भारत संबंधों में बढ़ोतरी कभी किसी एक पार्टी या एक राष्ट्रपति की देन नहीं रही है. और वाशिंगटन में कई लोग डरते हैं कि ट्रंप का विरोध करने पर वे उनका निशाना बन सकते हैं. लेकिन कुछ लोग ऐसे भी हैं जो उस डर से ऊपर हैं. विशेष रूप से, राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू. बुश और राष्ट्रपति बराक ओबामा को नई दिल्ली आकर अमेरिका के सच्चे मल्टी पार्टी या निर्विवाद चेहरे के रूप में खुद को प्रस्तुत करना चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका के भविष्य का प्रतिनिधित्व नहीं करते, बल्कि एक अपवाद (Anomaly) मात्र हैं.

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