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हरियाणा सरकार का बड़ा फैसला, अब पेड़ काटना पड़ेगा महंगा, वन अपराधों पर दोगुना दंड

Haryana: सरकार ने भारतीय वन अधिनियम, 1973 (हरियाणा द्वितीय संशोधन) में जरूरी बदलाव किए हैं. यह संशोधन अब पूरी तरह से लागू हो चुका है, क्योंकि इसे राज्यपाल की मंजूरी मिल चुकी है और इसकी सरकारी अधिसूचना भी जारी कर दी गई है.

Source: Nayab Singh Saini
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हरियाणा सरकार ने जंगलों की सुरक्षा को लेकर एक कड़ा कदम उठाया है. राज्य में अब वनों को नुकसान पहुंचाने वाले लोगों को पहले से कहीं ज्यादा सजा और जुर्माना देना होगा. इसके लिए सरकार ने भारतीय वन अधिनियम, 1973 (हरियाणा द्वितीय संशोधन) में जरूरी बदलाव किए हैं. यह संशोधन अब पूरी तरह से लागू हो चुका है, क्योंकि इसे राज्यपाल की मंजूरी मिल चुकी है और इसकी सरकारी अधिसूचना भी जारी कर दी गई है.

अब पहले से दोगुनी होगी सजा और जुर्माना

इस नए कानून के तहत अगर कोई व्यक्ति वनों से जुड़ा अपराध करता है जैसे कि पेड़ काटता है, जंगल में आग लगाता है, जमीन पर अवैध कब्जा करता है, या जंगल के संसाधनों का गलत तरीके से दोहन करता है तो अब उसे पहले से ज्यादा कड़ी सजा का सामना करना पड़ेगा. पहले ऐसे मामलों में अधिकतम 6 महीने की जेल या 500 रुपये का जुर्माना लगता था. लेकिन अब इस सजा को बढ़ाकर 1 साल की जेल या 1000 रुपये तक का जुर्माना कर दिया गया है. इसका मतलब यह है कि अब जंगलों से छेड़छाड़ करने वालों पर सरकार दोगुनी सख्ती से पेश आएगी.

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क्यों किया गया ये बदलाव?

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हरियाणा सरकार के विधि विभाग की प्रशासकीय सचिव रितु गर्ग ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि यह बदलाव जंगलों की सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए किया गया है. राज्य में कई बार देखा गया है कि कुछ लोग पेड़ों की अवैध कटाई, जंगलों में आगजनी, अतिक्रमण (जमीन पर कब्जा) और प्राकृतिक संसाधनों की चोरी जैसी गतिविधियों में शामिल होते हैं. ऐसे मामलों को रोकने के लिए कानून को और ज्यादा सख्त बनाना जरूरी था.

प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा की दिशा में अहम कदम

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जंगल हमारे जीवन के लिए बहुत जरूरी हैं. ये हमें शुद्ध हवा, पानी और पर्यावरण का संतुलन प्रदान करते हैं. अगर हम जंगलों को नहीं बचाएंगे, तो इसका सीधा असर हमारी सेहत, जलवायु, और भविष्य की पीढ़ियों पर पड़ेगा. ऐसे में हरियाणा सरकार का यह कदम प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा की दिशा में एक जरूरी और स्वागत योग्य पहल है.

अब समय है जागरूक होने का

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सरकार ने कानून तो बना दिया है, लेकिन इसे सही मायनों में सफल तभी बनाया जा सकता है जब जनता खुद भी जागरूक हो. हर नागरिक की जिम्मेदारी है कि वो वनों की रक्षा करें, और अगर कहीं अवैध गतिविधियां देखें, तो तुरंत इसकी सूचना दें. मिलकर ही हम अपने जंगलों और पर्यावरण को बचा सकते हैं.

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