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हरियाणा में फिर कांपी जमीन, रोहतक में आया 3.3 तीव्रता का भूकंप... दिल्ली-NCR में भी सहमे लोग

राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) के मुताबिक, 17 जुलाई तड़के 12:46 बजे हरियाणा के रोहतक में 3.3 तीव्रता का भूकंप आया, जिसकी गहराई 10 किलोमीटर थी. इससे पहले 10 और 11 जुलाई को झज्जर में 4.4 और 3.7 तीव्रता के झटके दर्ज किए गए थे. दिल्ली-NCR में यह एक हफ्ते में तीसरा भूकंप है.

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हरियाणा के रोहतक जिले में जब लोग गहरी नींद में थे, तभी जमीन का अचानक हिलना कई घरों में डर और अनिश्चितता का कारण बन गया. हालांकि, इस भूकंप से अभी तक किसी तरह के जान-माल के नुकसान की खबर नहीं आई है, लेकिन डर का माहौल गहराता जा रहा है, खासकर दिल्ली और NCR जैसे संवेदनशील इलाकों में, जहां हाल के दिनों में लगातार झटके महसूस किए गए हैं. राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) के अनुसार, यह भूकंप 3.3 तीव्रता का था और रात 12:46 बजे जमीन के 10 किलोमीटर नीचे केंद्रित हुआ. भूकंप का केंद्र अक्षांश 28.88 उत्तर और देशांतर 76.76 पूर्व पर स्थित था.

एक हफ्ते में तीसरा झटका
दरअसल, यह झटका ऐसे समय में आया है जब पिछले कुछ दिनों में इस क्षेत्र में कई हल्के लेकिन लगातार भूकंप दर्ज किए जा चुके हैं. 11 जुलाई को हरियाणा के झज्जर जिले में 3.7 तीव्रता का भूकंप आया था. उससे ठीक एक दिन पहले इसी इलाके में 4.4 तीव्रता का और ज़्यादा शक्तिशाली झटका दर्ज किया गया था. ये सभी भूकंप 10 किलोमीटर की गहराई पर केंद्रित थे, जो कि एक चिंता का विषय है क्योंकि कम गहराई वाले भूकंप सतह पर ज़्यादा असर डालते हैं.

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भूकंप को लेकर विशेषज्ञों का मानना है कि दिल्ली और उसके आसपास का क्षेत्र भूकंप के लिहाज से जोन-4 और जोन-5 में आता है, जो कि मध्यम से लेकर उच्च खतरे वाले क्षेत्र माने जाते हैं. ऐसे क्षेत्र भूगर्भीय दृष्टिकोण से सक्रिय होते हैं और यहां टेक्टॉनिक प्लेट्स के बीच दबाव समय-समय पर रिहा होता रहता है. इस दबाव के कारण जब ज़मीन में तनाव अधिक हो जाता है, तो वह भूकंप के रूप में सामने आता है. रोहतक, झज्जर, सोनीपत और गुरुग्राम जैसे क्षेत्र इस भूगर्भीय पट्टी का हिस्सा हैं और दिल्ली-NCR पर इसका सीधा असर होता है. यही वजह है कि इन इलाकों में हल्के झटके भी लोगों को बड़ी चिंता में डाल देते हैं. राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र लगातार भूकंप की स्थिति पर नज़र बनाए हुए है और समय-समय पर रिपोर्ट जारी कर रहा है. हालांकि, बार-बार आ रहे इन झटकों ने आपदा प्रबंधन तैयारियों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं. दिल्ली और आसपास के इलाकों की घनी आबादी, ऊंची-ऊंची इमारतें और संकरी गलियां ऐसे समय में बड़े जोखिम का कारण बन सकती हैं. यदि कोई बड़ा भूकंप आता है, तो उसका प्रभाव व्यापक और विनाशकारी हो सकता है.

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