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नागपुर हिंसा मामले में सरकार का एक्शन, मास्टरमाइंड फ़हीम खान के घर पर चला बुलडोज़र

हिंसा का मस्टरमाइंड और मुख्य आरोपी फ़हीम खान निकला। जिसपर अब महाराष्ट्र सरकार का डंडा चला है। फ़हीम खान के घर बुलडोज़र की कार्रवाई की गई है। फ़िलहाल फ़हीम पुलिस हिरासत में है।

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नागपुर हिंसा मामले को लेकर महाराष्ट्र समेत देश में बवाल मचा हुआ है। औरंगजेब की कब्र को हटाने को लेकर हुए प्रदर्शन ने हिंसा का रूप ले लिया था। इस हिंसा का मस्टरमाइंड और मुख्य आरोपी फ़हीम खान निकला। जिसपर अब महाराष्ट्र सरकार का डंडा चला है। फ़हीम खान के घर बुलडोज़र की कार्रवाई की गई है। फ़िलहाल फ़हीम पुलिस हिरासत में है। 


दरअसल 17 मार्च को नागपुर में हिंसा हुई थी। अल्पसंख्यक लोकतांत्रिक पार्टी यानी की एमडीपी के नेता फहीम खान के साथ 100 से ज्यादा लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। सूत्रों के हवाले से ख़बर मिली है कि कुछ दिन पहले नागपुर नगर निगम ने फ़हीम खान को नोटिस भी जारी किया था। नागपुर नगर निगम ने उसे खुद से अवैध निर्माण हटाने के लिए 24 घंटे का समय दिया था और यही अवधी आज पूरी हो गई थी। जिसके बाद ये बड़ा एक्शन लिया गया है। 

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फ़हीम की पत्नी के नाम पर रेजिस्टर्ड है घर 

सूत्रों के हवाले से ख़बर मिल रही है कि जिस मकान पर बुलडोज़र से कार्रवाई की गई है। वो मकान फ़हीम से की पत्नी के नाम पर रेजिस्टर् है। ये मकान यशोधरा नगर इलाके में संजय बाग कॉलोनी में स्थित है। 

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नगर निगम ने फ़हीम के घर का किया था निरिक्षण 

फ़हीम खान के घर 20 मार्च को नगर निगम के अधिकारी पहुँचे थे। अधिकारियों ने इस घर का निरीक्षण किया था और महाराष्ट्र क्षेत्रीय एवं नगर योजना अधिनियम, 1966 के उल्लंघन का हवाला दिया था। निरिक्षण के बाद अधिकारियों ने कहा कि इस घर का कोई भवन योजना स्वीकृत नहीं थी, जिससे यह अवैध निर्माण की श्रेणी में आता है।

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सीएम फडणवीस ने क्या कहा?

नागपुर हिंसा मामले की गंभीरता को देखते हुए महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस ने भी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने कहा थी कि हिंसा के दौरान क्षतिग्रस्त हुई संपत्तियों की कीमत दंगाइयों से वसूली जाएगी और भुगतान करने पर नुकसान की भरपाई के लिए उनकी संपत्तियों को जब्त कर बेचा जाएगा।  मुख्यमंत्री ने दो दिन पहले ही कहा था कि 'अगर कानून अनुमति देता है, तो बुलडोजर चलेगा।

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क्या थी नागपूर हिंसा की पूरी घटना?

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17 मार्च को हिंदू संगठनों VHP और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने नागपुर के महल क्षेत्र में छत्रपति शिवाजी की प्रतिमा के पास विरोध प्रदर्शन किया था। विरोध प्रदर्शन के दौरान, उन्होंने औरंगजेब का पुतला फूंका था। इसके साख ही औरंगजेब के कब्र को हटाने की भी मांग की थी। इसी दौरान, रिपोर्ट्स सामने आई कि धार्मिक भाषा लिखी हुई "चादर" जलाई गई। हालांकि, बाद में स्थानीय पुलिस ने इसे अफवाह करार दिया और बताया कि ऐसी कोई घटना नहीं हुई थी। इसी कथित अफवाह के बाद नागपुर के महल समेत चिटनीस पार्क, हंसपुरी जैसे इलाकों में हिंसा भड़क गई और समुदायों के बीच झड़पें देखी गईं। स्थानीय पुलिस की तरफ़ से बताया गया कि लगभग 1,000 लोगों की भीड़ इकट्ठा हुई। इस भीड़ ने पत्थर और आग के गोले फेंके। जिसमें 34 पुलिसकर्मी घायल हो गए थे। हिंसा के दौरान बताया गया कि 60 से ज्यादा वाहनों में तोड़फोड़ की गई और इन वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया। इसमें कार, बाईक यहाँ तक की क्रेन भी शामिल थी। वहीं स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कई इलाक़ों में कर्फ़्यू लगा दिया गया था। लेकिन अमान्य स्थिति को देखते हुए इसे हटा दिया गया है। फ़िलहाल दंगाईयों के ऊपर सख़्त एक्शन लेने की तैयारी चल रही है। 


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