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भारतीय सेना की ताकत बढ़ाने के लिए इतना खर्चा करेगी सरकार, कांप उठेंगे दुश्मन
भारतीय सेना की ताकत जल्द ही बेहद बढ़ने वाली है, क्योंकि रक्षा मंत्रालय ने बेहद ही हाईटेक टैंक, रडार और नए गश्ती विमानों की खरीद को मंजूरी दे दी है. केंद्र सरकार की रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) ने 1.45 लाख करोड़ रुपये के रक्षा उपकरणों की खरीद को मंजूरी दी है।
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भारतीय सेना की ताकत जल्द ही बेहद बढ़ने वाली है, क्योंकि रक्षा मंत्रालय ने बेहद हाईटेक टैंक, रडार और नए गश्ती विमानों की खरीद को मंजूरी दे दी है। केंद्र सरकार की रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने 1.45 लाख करोड़ रुपये के रक्षा उपकरणों की खरीद को मंजूरी दी है, जिसमें से 99% रकम स्वदेशी सप्लायर से खरीद पर खर्च की जाएगी। इसमें भारतीय सेना के लिए फ्यूचर रेड कॉम्बैट व्हीकल (FRCV), नौसेना के लिए गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट्स और वायुसेना के फाइटर जेट्स के लिए 240 इंजन प्रमुख हैं।
हम बात अगर थल सेना की करें तो उसके लिए
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770 FRCV (फ्यूचर रेडी कॉम्बैट व्हीकल) खरीदे जाएंगे। यह ऐसा लड़ाकू टैंक होगा जिससे बख्तरबंद कोर का आधुनिकीकरण किया जा सकेगा और इसकी लागत करीब 45,000 करोड़ रुपये होगी। यह FRCV बेहद हाईटेक से लैस होते हैं जो कई हथियार प्लेटफॉर्म के रूप में काम कर सकते हैं। सेना फिलहाल टी-90, टी-72 और अर्जुन टैंकों से अपना काम चला रही है, वहीं ये FRCV अब पुराने पड़ चुके टी-72 टैंक्स की जगह लेंगे।
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इसके साथ ही नौसेना की क्षमताओं को बढ़ाने के लिए 75,000 करोड़ रुपये की लागत से सात और प्रोजेक्ट-17बी स्टील्थ फ्रिगेट के निर्माण को भी DAC ने मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही विमानवाहक पोत INS विक्रांत के लिए 26 राफेल-एम लड़ाकू विमानों के अधिग्रहण का रास्ता साफ हो गया है। इन दो इंजनों वाले डेक-बेस्ड लड़ाकू विमानों के सौदे की अनुमानित कीमत लगभग 50,000 करोड़ रुपये है। ये सभी नीलगिरी क्लास फ्रिगेट्स के युद्धपोत होंगे। इन्हें मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स, गार्डेन रीच शिपबिल्डर्स, गोवा शिपयार्ड, लार्सेन एंड टुब्रो जैसी कंपनियां बनाएंगी। फिलहाल मझगांव डॉक और गार्डेन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स प्रोजेक्ट-17 ए (P-17A) के तहत नीलगिरी क्लास के ही फ्रिगेट्स बना रहे हैं। सात जंगी जहाज बनाए जा रहे हैं। पांच लॉन्च हो चुकी हैं जो इस साल फरवरी 2025 तक भारतीय नौसेना में शामिल हो जाएंगी। लॉन्च किए गए फ्रिगेट्स के नाम हैं- नीलगिरी, उदयगिरी, तारागिरी, हिमगिरी और दूनागिरी।
भारत सरकार ने वायुसेना के Su-30MKI फाइटर जेट्स के लिए HAL को 240 एयरो इंजन बनाने को कहा है। इसकी लागत करीब 26 हजार करोड़ रुपये है। इन इंजनों को अगले साल से लेकर आठ साल के अंदर डिलीवर करना है। इंजनों को 54% स्वदेशी रखना है। इंजनों के मिलने से Su-30MKI की फ्लीट को ताकत मिलेगी। वे लगातार देश की आसमानी सुरक्षा में तैनात रह पाएंगे।
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इस वक्त पूरी दुनिया जल, थल और आकाश में अपनी ताकत बढ़ाने में लगी है। इसमें भारत भी पीछे नहीं रहना चाहता। इसका ही नतीजा है कि अपनी तीनों सेनाओं को भारत सरकार ने इतने बड़े पैमाने पर अत्याधुनिक हथियार, यंत्रों और दूसरी चीजों की खरीद की मंजूरी दे दी है।