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हरियाणा के सरकारी कर्मचारियों के लिए खुशखबरी, अब जूनियर से कम सैलरी वाले सीनियर का बढ़ेगा वेतन!
Haryana: जो अधिकारी नियमों के अनुसार पात्र नहीं हैं, उन्हें वित्तीय अधिकार नहीं दिए जाएँगे. इससे गलत निर्णयों और नियमों के उल्लंघन पर रोक लगेगी.
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CM Nayab Singh Saini: हरियाणा सरकार ने साफ कर दिया है कि जिन वरिष्ठ कर्मचारियों (सीनियर) का वेतन उनके जूनियर कर्मचारियों से कम है, उन्हें अब वेतन में बढ़ोतरी (स्टेपिंग-अप) का फायदा दिया जाएगा. लेकिन एक बात सबसे ज़रूरी है, अगर जूनियर का वेतन उसकी किसी व्यक्तिगत वजह से ज़्यादा है (जैसे विशेष इन्क्रीमेंट, पर्सनल पे, या किसी खास कारण से मिली बढ़ोतरी), तो उस स्थिति में वरिष्ठ को बढ़ा हुआ वेतन नहीं दिया जाएगा. यानी सिर्फ उसी मामले में लाभ मिलेगा, जहाँ सैलरी का फर्क नियमों के कारण बना हो, न कि व्यक्तिगत वजह से.
सरकार ने स्पष्ट कर दिया -एसीपी लागू होने पर ही स्टेपिंग-अप मिलेगा
हरियाणा के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी, जो वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव भी हैं, ने इस बारे में दो अलग-अलग आदेश जारी किए हैं. इन आदेशों में कहा गया है कि वरिष्ठ कर्मचारी का वेतन जूनियर के बराबर तभी बढ़ाया जा सकता है, जब वरिष्ठ कर्मचारी एचसीएस (एसीपी) नियम 2016 के तहत एसीपी के पात्र हों.
काफी समय से विभाग स्टेपिंग-अप के मामलों को खुद जांचने की बजाय सीधे वित्त विभाग को भेज रहे थे. वित्त विभाग ने इस पर आपत्ति जताई है और सभी विभागों को निर्देश दिए हैं कि:
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ऐसे मामलों की जांच अपने स्तर पर खुद करें
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सिर्फ वे ही मामले वित्त विभाग को भेजें, जो नियमों के दायरे में नहीं आते या जहाँ स्थिति बिल्कुल स्पष्ट न हो इससे समय भी बचेगा और फालतू की फाइलें आगे नहीं जाएँगी. वित्तीय शक्तियों की री-डेलीगेशन पर भी सरकार ने लगाई रोक कई विभागाध्यक्ष अपने वित्तीय अधिकार फील्ड अधिकारियों को दे रहे थे, जबकि यह नियमों के खिलाफ है.
प्रशासनिक विभाग (मंत्रालय स्तर) क्या कर सकते हैं?
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वे अपनी वित्तीय शक्तियाँ सिर्फ अपने विभाग में कार्यरत राजपत्रित अधिकारियों जैसे सचिव संयुक्त सचिव उप सचिव एसएएस कैडर अधिकारी को ही दे सकते हैं।
विभागाध्यक्ष (डायरेक्टर आदि) क्या कर सकते हैं?
वे अपनी वित्तीय शक्तियाँ केवल अपने कार्यालय के राजपत्रित अधिकारियों जैसे अतिरिक्त निदेशक संयुक्त निदेशक उप निदेशक को ही सौंप सकते हैं.
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क्या नहीं कर सकते?
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प्रशासकीय सचिव किसी भी हालत में अपनी वित्तीय शक्तियाँ विभागाध्यक्षों को नहीं दे सकते. विभागाध्यक्ष अपनी वित्तीय शक्तियाँ फील्ड अधिकारियों या कार्यालय प्रमुखों को नहीं सुना सकते. इसका मतलब है कि जो अधिकारी नियमों के अनुसार पात्र नहीं हैं, उन्हें वित्तीय अधिकार नहीं दिए जाएँगे. इससे गलत निर्णयों और नियमों के उल्लंघन पर रोक लगेगी.